भारत के डैम पर हमला करेगा पाकिस्तान? एक्सपर्ट का बड़ा दावा

Report By: Kiran Prakash Singh

भारत-पाकिस्तान के बीच जल विवाद गहराया। पाकिस्तानी विशेषज्ञ ने भारत के डैम और अंतरराष्ट्रीय कानून को लेकर बड़ा दावा किया, जानें पूरा मामला।

Date: 26 June 2026
Website: digitallivenews.com

भारत-पाकिस्तान जल विवाद: क्या भारत के डैम पर हमला कर सकता है पाकिस्तान? जानिए पूरा मामला

भारत और पाकिस्तान के बीच सिंधु जल संधि को लेकर विवाद लगातार गहराता जा रहा है। पहलगाम आतंकी हमले के बाद भारत द्वारा सिंधु जल संधि को निलंबित करने और चिनाब नदी पर अपनी जल परियोजनाओं को तेजी से आगे बढ़ाने के फैसले के बाद पाकिस्तान लगातार आपत्ति जता रहा है। इस बीच पाकिस्तान के सुप्रीम कोर्ट के वरिष्ठ वकील और पूर्व कार्यवाहक कानून मंत्री अहमर बिलाल सूफी ने एक लेख में अंतरराष्ट्रीय कानून का हवाला देते हुए दावा किया है कि कुछ परिस्थितियों में भारत के निर्माणाधीन बांधों को युद्धकाल में पूर्ण कानूनी सुरक्षा नहीं मिल सकती। हालांकि यह उनकी कानूनी व्याख्या है और इसे किसी अंतरराष्ट्रीय न्यायिक संस्था द्वारा अंतिम निर्णय के रूप में स्वीकार नहीं किया गया है।

सिंधु जल संधि पर बढ़ा तनाव

भारत और पाकिस्तान के बीच 1960 में हुई सिंधु जल संधि दोनों देशों के बीच पानी के बंटवारे का आधार रही है। हाल के घटनाक्रम के बाद भारत ने संधि को निलंबित करने की घोषणा की और चिनाब नदी पर कई जलविद्युत परियोजनाओं पर काम तेज कर दिया। इसके बाद पाकिस्तान ने इस कदम पर गंभीर चिंता जताई और कई नेताओं व अधिकारियों ने कड़ी प्रतिक्रिया दी। जल संसाधनों को लेकर दोनों देशों के बीच तनाव पहले से अधिक बढ़ता दिखाई दे रहा है।

अंतरराष्ट्रीय कानून पर पाकिस्तानी विशेषज्ञ की दलील

पाकिस्तानी अखबार डॉन में प्रकाशित अपने लेख में अहमर बिलाल सूफी ने 1949 के जिनेवा कन्वेंशन के एडिशनल प्रोटोकॉल-I के अनुच्छेद 56 का उल्लेख किया है। उनके अनुसार युद्ध के दौरान बांध, जलाशय और परमाणु संयंत्र जैसी संरचनाओं को सामान्यतः सुरक्षा प्राप्त होती है। हालांकि उन्होंने यह तर्क दिया कि यदि किसी संरचना का उपयोग सैन्य उद्देश्य से किया जा रहा हो या ऐसा आरोप लगाया जाए, तो उसकी कानूनी स्थिति अलग हो सकती है। यह व्याख्या उनकी व्यक्तिगत कानूनी राय है और इस पर व्यापक अंतरराष्ट्रीय सहमति नहीं है।

चिनाब नदी की परियोजनाओं पर पाकिस्तान की नजर

भारत चिनाब नदी के ऊपरी हिस्से में कई महत्वपूर्ण जलविद्युत परियोजनाओं पर काम कर रहा है। इनमें पाकल डुल, किरू, क्वार, रातले और सवालकोट जैसी परियोजनाएं शामिल हैं। पाकिस्तान का कहना है कि इन परियोजनाओं से उसके कृषि क्षेत्र और सिंचाई व्यवस्था पर असर पड़ सकता है। दूसरी ओर भारत का कहना है कि सभी परियोजनाएं उसके अधिकार क्षेत्र में हैं और अंतरराष्ट्रीय नियमों के अनुरूप विकसित की जा रही हैं।

जल मंत्री के बयान का भी दिया गया हवाला

अपने लेख में सूफी ने भारत के जल मंत्री सीआर पाटिल के उस बयान का उल्लेख किया, जिसमें पाकिस्तान को भविष्य में पानी की एक बूंद भी नहीं मिलने की बात कही गई थी। उन्होंने यह भी कहा कि भारत की राजनीतिक और रणनीतिक भाषा पाकिस्तान को यह तर्क देने का अवसर देती है कि जल परियोजनाओं का उद्देश्य केवल विकास नहीं बल्कि दबाव बनाना भी हो सकता है। हालांकि भारत सरकार का आधिकारिक रुख यही है कि उसके सभी निर्णय राष्ट्रीय हित और सुरक्षा को ध्यान में रखकर लिए जाते हैं।

क्या डैम पर हमला अंतरराष्ट्रीय कानून के तहत संभव है?

विशेषज्ञों का मानना है कि युद्ध के दौरान नागरिक ढांचों पर हमला करना अंतरराष्ट्रीय मानवीय कानून के तहत बेहद संवेदनशील विषय है। बांधों पर किसी भी प्रकार का हमला बड़े पैमाने पर मानवीय संकट पैदा कर सकता है, इसलिए अंतरराष्ट्रीय कानून ऐसे ढांचों को विशेष सुरक्षा प्रदान करता है। किसी भी संभावित कार्रवाई की वैधता परिस्थितियों, अंतरराष्ट्रीय कानून की व्याख्या और संबंधित तथ्यों पर निर्भर करेगी। फिलहाल भारत और पाकिस्तान के बीच जल विवाद कूटनीतिक स्तर पर चर्चा का विषय बना हुआ है और दोनों देशों की ओर से अपने-अपने पक्ष रखे जा रहे हैं।

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