वकील बनीं ममता पर भड़के काटजू, BCI ने मांगी रिपोर्ट

Report By: Kiran Prakash Singh

ममता बनर्जी के वकील बनकर हाई कोर्ट पहुंचने पर विवाद बढ़ा। जस्टिस काटजू ने निशाना साधा, BCI ने लाइसेंस की जानकारी मांगी।

📅 15 May 2026
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वकील बन कोर्ट पहुंचीं ममता, कटजू ने उठाए सवाल

ममता बनर्जी के कोर्ट पहुंचने पर शुरू हुआ विवाद

पश्चिम बंगाल की पूर्व मुख्यमंत्री और तृणमूल कांग्रेस प्रमुख ममता बनर्जी के वकील की पोशाक पहनकर कलकत्ता हाई कोर्ट पहुंचने के बाद नया राजनीतिक और कानूनी विवाद खड़ा हो गया है। गुरुवार को ममता बनर्जी काला कोट, गाउन और सफेद बैंड पहनकर अदालत पहुंचीं और चुनाव बाद हिंसा से जुड़े मामलों में अपनी बात रखी। हालांकि, उनके इस कदम को लेकर अब विपक्षी नेताओं और कानूनी विशेषज्ञों की ओर से सवाल उठाए जा रहे हैं। इस पूरे घटनाक्रम ने बंगाल की राजनीति में नई बहस छेड़ दी है।

जस्टिस मार्कंडेय काटजू ने साधा निशाना

सुप्रीम कोर्ट के पूर्व जज मार्कंडेय काटजू ने ममता बनर्जी पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने सोशल मीडिया पर पोस्ट करते हुए कहा कि ममता बनर्जी सिर्फ सुर्खियों में बने रहने के लिए अदालत पहुंचीं। काटजू ने लिखा कि चुनाव हारने के बाद अब ममता विधानसभा में अपनी आवाज नहीं उठा सकतीं, इसलिए उन्होंने हाई कोर्ट का रास्ता चुना। एक अन्य पोस्ट में उन्होंने कहा कि “ममता बनर्जी ने हद कर दी है।” काटजू के इस बयान के बाद सोशल मीडिया पर भी बहस तेज हो गई और लोग अलग-अलग प्रतिक्रियाएं देने लगे।

बार काउंसिल ऑफ इंडिया ने मांगी रिपोर्ट

ममता बनर्जी के वकील के रूप में अदालत पहुंचने के बाद बार काउंसिल ऑफ इंडिया (BCI) ने भी इस मामले पर आपत्ति जताई है। बीसीआई ने पश्चिम बंगाल बार काउंसिल से ममता बनर्जी के वकालत पंजीकरण, लाइसेंस और पेशेवर स्थिति से जुड़ी पूरी जानकारी मांगी है। बीसीआई ने 48 घंटे के भीतर रिपोर्ट सौंपने को कहा है। परिषद ने पूछा है कि क्या ममता बनर्जी का वकालत लाइसेंस सक्रिय है और क्या उन्होंने मुख्यमंत्री रहते हुए अपने लाइसेंस को नियमों के अनुसार निलंबित कराया था। बीसीआई ने यह भी जानना चाहा है कि उनका पंजीकरण नंबर क्या है और राज्य बार काउंसिल में उनका नामांकन कब हुआ था।

कोर्ट में उठाया चुनाव बाद हिंसा का मुद्दा

ममता बनर्जी कलकत्ता हाई कोर्ट में चुनाव के बाद हुई कथित हिंसा और पार्टी कार्यालयों पर हमलों के मुद्दे को लेकर पहुंची थीं। अदालत में उन्होंने कहा कि “बंगाल कोई बुलडोजर राज्य नहीं है।” उन्होंने आरोप लगाया कि चुनाव परिणाम आने के बाद टीएमसी कार्यकर्ताओं और पार्टी कार्यालयों को निशाना बनाया गया। अदालत परिसर से बाहर निकलते समय कुछ लोगों ने उनके खिलाफ नारेबाजी भी की। इस दौरान टीएमसी नेता चंद्रिमा भट्टाचार्य और सांसद कल्याण बनर्जी भी उनके साथ मौजूद रहे।

जनहित याचिका से जुड़ा है पूरा मामला

यह पूरा विवाद टीएमसी की ओर से दाखिल एक जनहित याचिका से जुड़ा है। यह याचिका वकील शीर्षन्या बंद्योपाध्याय ने दायर की थी। इसमें आरोप लगाया गया कि 2026 विधानसभा चुनाव के नतीजों के बाद पार्टी कार्यालयों पर हमले हुए और टीएमसी समर्थकों के साथ हिंसा की गई। कुछ याचिकाओं में यह भी दावा किया गया कि कई जगहों पर तोड़फोड़ और बुलडोजर कार्रवाई की गई। मामले की सुनवाई मुख्य न्यायाधीश सुजॉय पॉल और जस्टिस पार्थसारथी सेन की खंडपीठ के सामने हुई। अब इस पूरे मामले पर राजनीतिक और कानूनी हलकों में लगातार चर्चा जारी है।

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