आगरा-फिरोजाबाद में डॉक्टरों की प्राइवेट प्रैक्टिस जांच

Report By: Kiran Prakash Singh

आगरा और फिरोजाबाद में सरकारी डॉक्टरों की निजी प्रैक्टिस पर प्रशासन सख्त। हाईकोर्ट की सख्ती के बाद सीक्रेट जांच शुरू।

आगरा-फिरोजाबाद में सरकारी डॉक्टरों की प्राइवेट प्रैक्टिस पर बड़ा शिकंजा

Agra और Firozabad में सरकारी डॉक्टरों की निजी प्रैक्टिस को लेकर प्रशासन अब सख्त कार्रवाई के मूड में नजर आ रहा है। हाईकोर्ट की सख्ती और लगातार मिल रही शिकायतों के बाद स्वास्थ्य विभाग और जिला प्रशासन ने सरकारी अस्पतालों में तैनात डॉक्टरों की गतिविधियों पर नजर तेज कर दी है।

बताया जा रहा है कि कई सरकारी डॉक्टर अस्पतालों में कम समय देकर निजी क्लीनिकों में ज्यादा व्यस्त रहते हैं, जिससे मरीजों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ता है। अब प्रशासन ने ऐसे मामलों की सीक्रेट जांच शुरू कर दी है।


सरकारी अस्पतालों में घटती मौजूदगी पर सवाल

आगरा और फिरोजाबाद के सरकारी अस्पतालों में मरीजों की लंबी कतारें अक्सर देखने को मिलती हैं। कई मरीजों का आरोप है कि डॉक्टर समय पर अस्पताल नहीं पहुंचते या फिर जल्दी निकल जाते हैं।

इसके विपरीत, वही डॉक्टर निजी क्लीनिकों और अस्पतालों में आसानी से उपलब्ध रहते हैं। इस स्थिति ने सरकारी स्वास्थ्य सेवाओं की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों का कहना है कि मरीजों की शिकायतों को गंभीरता से लिया जा रहा है और दोषी पाए जाने वालों पर कार्रवाई की जाएगी।


हाईकोर्ट की सख्ती के बाद बढ़ी कार्रवाई

सरकारी डॉक्टरों की निजी प्रैक्टिस का मामला लंबे समय से चर्चा में रहा है। अब हाईकोर्ट की सख्त टिप्पणी के बाद प्रशासनिक मशीनरी सक्रिय हो गई है।

सूत्रों के अनुसार, कई जिलों में डॉक्टरों की गतिविधियों की गोपनीय निगरानी कराई जा रही है। अस्पतालों में उपस्थिति रिकॉर्ड, मरीजों की संख्या और निजी क्लीनिकों की जानकारी जुटाई जा रही है।

प्रशासन यह भी देख रहा है कि जिन डॉक्टरों को नॉन-प्रैक्टिस अलाउंस दिया जा रहा है, वे नियमों का पालन कर रहे हैं या नहीं।


डीएम मनीष बंसल ने दिए सख्त निर्देश

Manish Bansal द्वारा स्वास्थ्य सेवाओं को लेकर सख्त रुख अपनाया गया है। अधिकारियों को निर्देश दिए गए हैं कि सरकारी अस्पतालों में डॉक्टरों की नियमित उपस्थिति सुनिश्चित की जाए।

बताया जा रहा है कि प्रशासन ने शिकायतों के लिए विशेष व्यवस्था भी तैयार की है, ताकि आम लोग सरकारी डॉक्टरों की निजी प्रैक्टिस की सूचना दे सकें।

इस कदम के बाद स्वास्थ्य विभाग में हलचल तेज हो गई है और कई डॉक्टरों में कार्रवाई को लेकर चिंता देखी जा रही है।


सीक्रेट जांच से स्वास्थ्य विभाग में हड़कंप

सूत्रों की मानें तो प्रशासन की टीम बिना पहचान बताए निजी क्लीनिकों और अस्पतालों की निगरानी कर सकती है। इससे उन डॉक्टरों की पहचान की जाएगी जो सरकारी ड्यूटी के समय निजी मरीज देख रहे हैं।

कुछ स्थानों पर अचानक निरीक्षण की भी तैयारी बताई जा रही है। जांच के दौरान रिकॉर्ड, उपस्थिति और मरीजों से बातचीत के आधार पर रिपोर्ट तैयार की जाएगी।

अगर किसी डॉक्टर पर आरोप सही पाए गए तो विभागीय कार्रवाई के साथ अन्य कानूनी कदम भी उठाए जा सकते हैं।


मरीजों को बेहतर सुविधा देने की कोशिश

प्रशासन का कहना है कि इस अभियान का उद्देश्य डॉक्टरों को परेशान करना नहीं, बल्कि सरकारी अस्पतालों में मरीजों को बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराना है।

सरकारी अस्पतालों में डॉक्टरों की नियमित उपलब्धता सुनिश्चित होने से गरीब और जरूरतमंद मरीजों को राहत मिलने की उम्मीद है।

फिलहाल आगरा और फिरोजाबाद में शुरू हुई यह कार्रवाई पूरे प्रदेश में चर्चा का विषय बनी हुई है और आने वाले दिनों में इसका दायरा बढ़ने की संभावना भी जताई जा रही है।

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