तमिलनाडु में सरकार गठन पर राज्यपाल के फैसले पर सवाल

Report By: Kiran Prakash Singh

तमिलनाडु में 108 विधायक होने के बावजूद विजय की पार्टी को सरकार बनाने का न्योता नहीं मिला। राज्यपाल के फैसले पर बहस तेज।

तमिलनाडु में सरकार गठन पर नया विवाद, राज्यपाल के फैसले पर सवाल

Tamil Nadu की राजनीति में इन दिनों सरकार गठन को लेकर बड़ा विवाद खड़ा हो गया है। चुनाव में सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी विजय की पार्टी को अब तक सरकार बनाने का न्योता नहीं मिलने से राजनीतिक बहस तेज हो गई है। बताया जा रहा है कि पार्टी के पास 108 विधायक होने के बावजूद राज्यपाल ने सरकार गठन के लिए 118 विधायकों के समर्थन पत्र लाने को कहा है।

इस फैसले के बाद राजनीतिक गलियारों में कई सवाल उठने लगे हैं। क्या अब बहुमत का परीक्षण विधानसभा में नहीं बल्कि राजभवन में होगा? क्या संवैधानिक परंपराएं बदल रही हैं? या फिर राज्यपाल किसी राजनीतिक दबाव में काम कर रहे हैं? ऐसे कई सवाल अब चर्चा का केंद्र बन गए हैं।


सबसे बड़ी पार्टी को क्यों नहीं मिला न्योता?

भारतीय राजनीति में आमतौर पर यह परंपरा रही है कि चुनाव के बाद सबसे बड़ी पार्टी को पहले सरकार बनाने का अवसर दिया जाता है। इसके बाद उसे विधानसभा में बहुमत साबित करना होता है।

लेकिन तमिलनाडु में सामने आए इस घटनाक्रम ने राजनीतिक पर्यवेक्षकों को चौंका दिया है। विजय की पार्टी के पास 108 विधायक होने के बावजूद सरकार बनाने का सीधा आमंत्रण नहीं दिया गया।

राज्यपाल की ओर से 118 विधायकों के समर्थन पत्र मांगे जाने के बाद विपक्षी दल इसे लोकतांत्रिक परंपराओं के खिलाफ बता रहे हैं।


क्या विधानसभा फ्लोर टेस्ट की परंपरा बदल रही है?

भारत के संसदीय लोकतंत्र में बहुमत साबित करने का सबसे बड़ा मंच विधानसभा या संसद को माना जाता है। सुप्रीम कोर्ट भी कई मामलों में कह चुका है कि बहुमत परीक्षण सदन के भीतर होना चाहिए।

ऐसे में अब सवाल उठ रहा है कि क्या बहुमत साबित करने की प्रक्रिया बदल रही है? क्या राज्यपाल पहले ही संख्या बल का प्रमाण मांग सकते हैं?

संवैधानिक विशेषज्ञों का मानना है कि राज्यपाल के पास कुछ विशेष परिस्थितियों में समर्थन पत्र मांगने का अधिकार जरूर होता है, लेकिन अंतिम परीक्षण सदन में ही होना लोकतांत्रिक परंपरा माना जाता है।


राज्यपाल की भूमिका पर उठे सवाल

इस पूरे घटनाक्रम के बाद राज्यपाल की भूमिका पर भी सवाल खड़े हो रहे हैं। विपक्षी दलों और राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि संवैधानिक पद पर बैठे व्यक्ति को निष्पक्ष तरीके से फैसले लेने चाहिए।

कुछ नेताओं ने आरोप लगाया है कि यह फैसला राजनीतिक संकेतों के आधार पर लिया गया हो सकता है। हालांकि राजभवन की ओर से इस पर कोई विस्तृत प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।

राजनीतिक विशेषज्ञों का कहना है कि अगर सबसे बड़ी पार्टी को मौका नहीं मिलता तो इससे लोकतांत्रिक प्रक्रियाओं को लेकर नई बहस शुरू हो सकती है।


तमिलनाडु की राजनीति में बढ़ी हलचल

तमिलनाडु की राजनीति हमेशा से राष्ट्रीय स्तर पर चर्चा का केंद्र रही है। अब सरकार गठन को लेकर पैदा हुआ यह विवाद राज्य की राजनीति को और गर्मा रहा है।

विजय समर्थक लगातार सोशल मीडिया और राजनीतिक मंचों पर अपनी नाराजगी जाहिर कर रहे हैं। वहीं विपक्षी दल इस मुद्दे को लोकतंत्र और संविधान से जोड़कर देख रहे हैं।

आने वाले दिनों में यह मामला अदालत तक भी पहुंच सकता है, क्योंकि सरकार गठन की प्रक्रिया को लेकर संवैधानिक बहस लगातार तेज हो रही है।


देशभर में शुरू हुई संवैधानिक बहस

तमिलनाडु का यह मामला अब सिर्फ राज्य की राजनीति तक सीमित नहीं रह गया है। देशभर में इस बात पर चर्चा हो रही है कि सरकार गठन के दौरान राज्यपाल की भूमिका कितनी होनी चाहिए और बहुमत परीक्षण की सही प्रक्रिया क्या है।

विशेषज्ञों का कहना है कि लोकतंत्र में अंतिम फैसला सदन के भीतर होना ही सबसे पारदर्शी तरीका माना जाता है। ऐसे में अब सभी की नजर अगले राजनीतिक घटनाक्रम और राज्यपाल के अगले कदम पर टिकी हुई है।

Also Read

“देश में बाढ़ का कहर: असम से बिहार तक नदियां खतरे के निशान से ऊपर”

आगरा में सपा सांसद रामजीलाल सुमन को मिली धमकी

“नोरा का नया एक्सपेरिमेंट: पंजाबी के बाद अब बांग्ला गाना, कंचना 4 में लीड रोल”

सोनम वांगचुक का अनशन 19वें दिन, सेहत कमजोर पर हौसला कायम

जेमिमा और मंधाना की ब्रांड वैल्यू में भारी बढ़ोतरी, विश्वकप जीत ने बदला खेल

You Might Also Like

‘रामायण’ का ग्लोबल धमाका, 50 हजार स्क्रीन पर रिलीज होगी फिल्म

असम बाढ़ पीड़ितों की मदद को आगे आए अनुपम खेर, दान किए 5 लाख

रिटायरमेंट के बाद ETPL में खेलेंगे अजिंक्य रहाणे, टीम ने किया ऐलान

ईस्पोर्ट्स वर्ल्ड कप में उतरेंगे 4 भारतीय ग्रैंडमास्टर, होगी बड़ी टक्कर

नकुड़ सीट पर 315 वोट से जीती BJP, क्या SIR बदलेगा 2027 का खेल?

आबान के जनाजे में शामिल होंगे उमर-अली, हाईकोर्ट से पैरोल मंजूर

संसद में गृह मंत्री पर घमासान, रिजिजू ने विपक्ष को दिया जवाब

परिसीमन बिल पर DMK का बड़ा ऐलान, मोदी सरकार के खिलाफ रुख कायम

Select Your City