
Report By: Kiran Prakash Singh
ED ने 70वें स्थापना दिवस पर रिपोर्ट जारी कर 81 हजार करोड़ जब्ती और 812 चार्जशीट का खुलासा किया, आर्थिक अपराधियों पर सख्ती तेज।
ED का रिपोर्ट कार्ड: आर्थिक अपराध पर कड़ा शिकंजा
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70 साल पूरे, कार्रवाई में तेजी
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812 चार्जशीट और 94% सफलता
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81 हजार करोड़ की संपत्ति जब्त
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पीड़ितों को मिली बड़ी राहत
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बदलते अपराध और नई रणनीति
देश की प्रमुख जांच एजेंसी Enforcement Directorate (ED) ने अपने 70वें स्थापना दिवस पर ऐसा रिपोर्ट कार्ड पेश किया है, जिसने आर्थिक अपराधों के खिलाफ उसकी कड़ी कार्रवाई और बढ़ती ताकत को साफ तौर पर दिखाया है। 1 मई 1956 को स्थापित यह एजेंसी आज भारत में मनी लॉन्ड्रिंग और आर्थिक अपराधों के खिलाफ सबसे अहम संस्थाओं में गिनी जाती है।
वित्त वर्ष 2025-26 ED के लिए बेहद महत्वपूर्ण रहा। एजेंसी ने इस दौरान कुल 812 चार्जशीट दाखिल कीं, जिनमें 155 सप्लीमेंट्री चार्जशीट शामिल हैं। यह आंकड़ा पिछले साल की तुलना में लगभग दोगुना बताया जा रहा है। सबसे अहम बात यह रही कि ED का conviction rate 94% तक पहुंच गया, जो एजेंसी के लिए बड़ी उपलब्धि मानी जा रही है। इससे यह संकेत मिलता है कि जांच अब पहले से ज्यादा मजबूत और साक्ष्यों पर आधारित हो रही है।
संपत्ति जब्ती के मामले में भी ED ने रिकॉर्ड बनाया है। पिछले वित्त वर्ष में एजेंसी ने करीब 81,422 करोड़ रुपये की संपत्तियां अटैच कीं, जबकि अब तक कुल जब्त संपत्ति का आंकड़ा 2,36,000 करोड़ रुपये से अधिक हो चुका है। ED का कहना है कि उसका मकसद सिर्फ जांच करना नहीं, बल्कि अपराध से कमाए गए पैसे को पूरी तरह खत्म करना है ताकि अपराधी उसे दोबारा गलत कामों में इस्तेमाल न कर सकें।
ED की कार्रवाई का एक बड़ा पहलू यह भी रहा कि उसने पीड़ितों को राहत दिलाने में अहम भूमिका निभाई है। एजेंसी के मुताबिक अब तक 63,142 करोड़ रुपये बैंकों, निवेशकों और होमबायर्स को वापस दिलाए जा चुके हैं। PACL जैसे बड़े मामलों में हजारों निवेशकों को उनका पैसा लौटाया गया, वहीं रियल एस्टेट मामलों में भी लोगों को उनकी संपत्ति वापस दिलाई गई। यह ED की जनता के हित में काम करने की छवि को मजबूत करता है।
हालांकि, एजेंसी ने यह भी स्वीकार किया है कि आर्थिक अपराधों का स्वरूप तेजी से बदल रहा है। पहले जहां बैंक फ्रॉड और रियल एस्टेट घोटाले ज्यादा होते थे, अब क्रिप्टोकरेंसी फ्रॉड, साइबर क्राइम, टेरर फंडिंग और ड्रग ट्रैफिकिंग जैसे हाईटेक अपराध तेजी से बढ़ रहे हैं। ED अब इन मामलों में मनी ट्रेल पकड़कर अपराधियों तक पहुंचने की रणनीति अपना रही है, जिससे जांच और भी प्रभावी हो रही है।
विदेश भागे आर्थिक अपराधियों पर भी ED का शिकंजा कसता जा रहा है। Fugitive Economic Offenders Act के तहत अब तक 50 से ज्यादा लोगों के खिलाफ कार्रवाई शुरू की जा चुकी है, जिनमें कई को भगोड़ा आर्थिक अपराधी घोषित किया गया है। इन मामलों में हजारों करोड़ रुपये की संपत्ति जब्त की गई है। यह दिखाता है कि अब अपराधियों के लिए विदेश भागना भी सुरक्षित विकल्प नहीं रह गया है।
टेक्नोलॉजी के इस्तेमाल ने ED की कार्यप्रणाली को और मजबूत किया है। अब समन जारी करने में QR कोड सिस्टम लागू किया गया है, जिससे फर्जी नोटिस और धोखाधड़ी को रोका जा सके। इससे पारदर्शिता बढ़ी है और जांच प्रक्रिया अधिक जवाबदेह बनी है।
अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी ED की भूमिका मजबूत होती दिख रही है। एजेंसी अब ग्लोबल एंटी-मनी लॉन्ड्रिंग नेटवर्क में सक्रिय है और BRICS जैसे मंचों पर भारत की भागीदारी बढ़ाने में योगदान दे रही है।
ED डायरेक्टर का कहना है कि आने वाले समय में आर्थिक अपराध और भी हाईटेक और जटिल होंगे, लेकिन एजेंसी भी उसी तेजी से खुद को अपडेट कर रही है। उनका साफ संदेश है कि असली लड़ाई अपराधियों के पैसों के खिलाफ है—अगर वही खत्म कर दिया जाए, तो अपराध अपने आप कम हो जाएंगे।
कुल मिलाकर, ED का यह 70वां रिपोर्ट कार्ड सिर्फ आंकड़ों का संग्रह नहीं है, बल्कि यह दर्शाता है कि भारत में आर्थिक अपराधों के खिलाफ सिस्टम और सख्त होता जा रहा है। आने वाले समय में यह देखना अहम होगा कि यह सख्ती किस हद तक अपराधियों पर लगाम लगा पाती है।