“खुशवंत सिंह: जब सिद्धांतों के लिए लौटाया पद्मभूषण”

Report By: Kiran Prakash Singh

खुशवंत सिंह: लेखक, इतिहासकार और सिद्धांतों के लिए पद्मभूषण लौटाने वाले साहसी विचारक

नई दिल्ली (Digital Live News)।
भारत के विभाजन और सिख इतिहास पर गहराई से लिखने वाले मशहूर लेखक खुशवंत सिंह सिर्फ साहित्यकार ही नहीं, बल्कि सिद्धांतों के लिए खड़े होने वाले एक साहसी विचारक भी थे। उनकी पहचान लेखक, पत्रकार, सांसद और समाज के गहरे चिंतक के रूप में रही है।


पद्मभूषण लौटाने का ऐतिहासिक फैसला

1974 में इंदिरा गांधी सरकार द्वारा खुशवंत सिंह को पद्मभूषण से सम्मानित किया गया था। लेकिन 1984 में ऑपरेशन ब्लू स्टार के बाद उन्होंने सरकार की कार्रवाई का विरोध करते हुए यह सम्मान लौटा दिया।

इस ऐतिहासिक घटना को याद करते हुए सिख इतिहास के जानकार सरदार तरलोचन सिंह ने बताया:

“खुशवंत सिंह ने मुझे बुलाया और अपने घर के बाहर आकर पद्मभूषण मुझे थमा दिया। वह बहुत आहत थे स्वर्ण मंदिर में हुई कार्रवाई से।”

हालांकि बाद में 2007 में कांग्रेस सरकार ने उन्हें पद्मविभूषण से भी सम्मानित किया, जिसे उन्होंने स्वीकार किया।


सिख इतिहास और खुशवंत सिंह का योगदान

खुशवंत सिंह का सिख इतिहास पर लिखा गया साहित्य आज भी प्रामाणिक और संदर्भनीय माना जाता है। तरलोचन सिंह कहते हैं:

“उन्होंने दुनिया को बताया कि सिख कौन हैं और उनका योगदान क्या है। उन्होंने कई लेख और किताबें लिखीं, जो आज भी ऐतिहासिक संदर्भ बन चुकी हैं।”


दिल्ली के निर्माण में सिखों का योगदान

सिर्फ खुशवंत सिंह ही नहीं, उनके पिता सरदार सोभा सिंह भी इतिहास में अमिट नाम हैं। उन्होंने ब्रिटिश काल में नई दिल्ली के निर्माण में अहम भूमिका निभाई। तरलोचन सिंह ने बताया कि:

“1911 में जब दिल्ली को राजधानी घोषित किया गया, उसके बाद नई दिल्ली का निर्माण जिन पांच ठेकेदारों ने किया, वे सभी सिख थे – सर सोभा सिंह, बिशाखा सिंह, सरदार मोहन सिंह, राय बहादुर रंजीत सिंह आदि।”

उन्होंने यह भी खुलासा किया कि मोहम्मद अली जिन्ना दिल्ली में जिस कोठी में रहते थे, वह बिशाखा सिंह की थी।


इंदिरा गांधी की नाराज़गी और जानबूझकर की गई छुट्टी

तरलोचन सिंह ने बताया कि जब गोल्डन टेंपल पर कार्रवाई हुई तो खुशवंत सिंह ने उनसे बात की और दुनिया को सच्चाई बताई। इस पर तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी नाराज़ हो गईं और उन्हें ज्ञानी जैल सिंह ने 15 दिनों की जबरन छुट्टी पर भेज दिया।

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