डोनाल्ड ट्रंप को अदालत से बड़ा झटका

Report By: Kiran Prakash Singh

डोनाल्ड ट्रंप को झटका: अदालत ने ई. जीन कैरोल को दिए गए 693 करोड़ रुपये के हर्जाने को रद्द करने की अपील खारिज की

वॉशिंगटन | 9 सितंबर 2025:
टैरिफ वॉर और विवादास्पद बयानों के लिए सुर्खियों में रहे अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के लिए बुरे दिन खत्म होते नजर नहीं आ रहे हैं। ताजा घटनाक्रम में अमेरिकी अदालत ने ट्रंप को एक बड़ा झटका दिया है। अदालत ने ट्रंप की उस अपील को खारिज कर दिया है जिसमें उन्होंने पत्रकार और लेखिका ई. जीन कैरोल को दिए गए 83.3 मिलियन डॉलर (लगभग 693 करोड़ रुपये) के हर्जाने को रद्द करने की मांग की थी।

तीन न्यायाधीशों की पीठ ने अपने आदेश में कहा कि जूरी द्वारा दिया गया फैसला इस मामले की “असाधारण और गंभीर परिस्थितियों” को देखते हुए पूरी तरह उचित है। कोर्ट ने साफ कर दिया कि ट्रंप इस मामले में राष्ट्रपति पद की इम्युनिटी (छूट) का दावा नहीं कर सकते।


क्या है पूरा मामला?

81 वर्षीय ई. जीन कैरोल, जो Elle मैगजीन की पूर्व कॉलमिस्ट रही हैं, उन्होंने आरोप लगाया था कि 1990 के दशक में डोनाल्ड ट्रंप ने न्यूयॉर्क के एक डिपार्टमेंट स्टोर के ड्रेसिंग रूम में उनका यौन शोषण (रेप) किया था।

2019 में जब यह आरोप सार्वजनिक हुआ, ट्रंप ने इसे खारिज करते हुए कहा कि, “वो मेरे टाइप की नहीं हैं” और उन्होंने अपनी किताब बेचने के लिए यह कहानी गढ़ी है।

इसके बाद कैरोल ने मानहानि का मुकदमा दायर किया और कोर्ट की प्रक्रिया शुरू हुई।


दो बड़े फैसले ट्रंप के खिलाफ

  • मई 2023 में एक जूरी ने ट्रंप को 5 मिलियन डॉलर (लगभग 42 करोड़ रुपये) का हर्जाना देने का आदेश दिया था।

  • जनवरी 2024 में कोर्ट ने एक और बड़ा फैसला सुनाया, जिसमें ट्रंप को 83.3 मिलियन डॉलर का हर्जाना देने का आदेश मिला। इसमें:

    • 18.3 मिलियन डॉलर – भावनात्मक और सामाजिक क्षति के लिए

    • 65 मिलियन डॉलर – दंडात्मक हर्जाने के रूप में थे

जून 2024 में दूसरे सर्किट कोर्ट ने भी इस फैसले को बरकरार रखा।


इम्युनिटी का दावा खारिज

ट्रंप के वकीलों ने तर्क दिया था कि अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट का 2024 का फैसला उन्हें व्यापक आपराधिक इम्युनिटी देता है, जो इस सिविल केस पर भी लागू होनी चाहिए।
उन्होंने यह भी कहा कि 2019 में दिए गए उनके बयान राष्ट्रपति के आधिकारिक कर्तव्यों का हिस्सा थे।

हालांकि, कोर्ट ने इस दलील को यह कहते हुए खारिज कर दिया कि ऐसे बयानों पर इम्युनिटी नहीं मिल सकती, और ऐसा करने से कार्यपालिका की जवाबदेही समाप्त हो जाएगी।


निष्कर्ष

डोनाल्ड ट्रंप के लिए यह फैसला एक बड़ा कानूनी और राजनीतिक झटका माना जा रहा है, खासकर उस समय जब वे फिर से राष्ट्रपति पद की दौड़ में शामिल हैं। लगातार अदालतों में मिल रही हारें उनके राजनीतिक भविष्य पर भी असर डाल सकती हैं।

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