ममता के जिद्दी रुख पर क्यों हो रही ज्योतिषीय चर्चा

Report By: Kiran Prakash Singh

ममता बनर्जी के इस्तीफा न देने वाले रुख पर राजनीतिक बहस तेज, ज्योतिषाचार्यों ने मंगल, शनि, राहु और केतु के प्रभाव बताए।

ममता के जिद्दी रुख पर चर्चा, ज्योतिष में क्या कहते हैं ग्रह?

हार के बाद भी इस्तीफा देने को तैयार नहीं थीं ममता

Mamata Banerjee एक बार फिर राजनीतिक और सामाजिक चर्चा के केंद्र में हैं। West Bengal विधानसभा चुनाव 2026 में तृणमूल कांग्रेस को हार का सामना करना पड़ा, जबकि बीजेपी ने बहुमत हासिल कर सरकार बनाने का दावा पेश किया। चुनावी नतीजों के बाद सबसे ज्यादा चर्चा ममता बनर्जी के उस बयान की हुई, जिसमें उन्होंने मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा देने से इनकार कर दिया था।

ममता बनर्जी का कहना था कि चुनाव प्रक्रिया में धांधली हुई और वोट जबरदस्ती लूटे गए। इसी वजह से उन्होंने हार स्वीकार करने से इनकार किया और मुख्यमंत्री पद छोड़ने को लेकर सख्त रुख अपनाया।

राज्यपाल ने भंग की विधानसभा

इस पूरे घटनाक्रम के बीच पश्चिम बंगाल के राज्यपाल R. N. Ravi ने 17वीं विधानसभा को भंग करने की घोषणा कर दी। विधानसभा का कार्यकाल 7 मई 2026 को पूरा हो चुका था। संविधान के अनुच्छेद 174 (2)(बी) के तहत यह फैसला लिया गया ताकि किसी प्रकार का संवैधानिक संकट उत्पन्न न हो।

इसके बाद राजनीतिक तौर पर ममता बनर्जी के इस्तीफा देने या न देने का मुद्दा लगभग अप्रासंगिक हो गया। हालांकि उनका जिद्दी रुख और बयानबाजी लगातार चर्चा में बना हुआ है।

राजनीति से ज्योतिष तक पहुंची चर्चा

ममता बनर्जी के व्यवहार और फैसलों को लेकर अब ज्योतिषीय दृष्टिकोण से भी चर्चाएं शुरू हो गई हैं। ज्योतिष शास्त्र के अनुसार व्यक्ति के स्वभाव, भावनाओं और व्यवहार पर ग्रहों का गहरा प्रभाव माना जाता है।

जयपुर-जोधपुर के पाल बालाजी ज्योतिष संस्थान के निदेशक और ज्योतिषाचार्य Dr. Aneesh Vyas के अनुसार कुछ ग्रहों की अशुभ स्थिति व्यक्ति को अत्यधिक जिद्दी, क्रोधी और कठोर स्वभाव वाला बना सकती है।

मंगल ग्रह से बढ़ता है आक्रोश

ज्योतिष के अनुसार अगर कुंडली में Mars यानी मंगल ग्रह अशुभ स्थिति में हो तो व्यक्ति में अत्यधिक गुस्सा, आवेग और आक्रामकता बढ़ सकती है। ऐसे लोग अपने फैसलों पर अड़े रहते हैं और जल्दी झुकना पसंद नहीं करते।

मंगल के दुष्प्रभाव से संबंधों में तनाव और व्यवहार में कठोरता भी देखने को मिल सकती है। ज्योतिषाचार्यों का मानना है कि यह ग्रह व्यक्ति को संघर्षशील तो बनाता है, लेकिन कई बार यही जिद और उग्रता विवाद का कारण भी बन जाती है।

शनि, राहु और केतु का भी असर

Saturn यानी शनि की अशुभ स्थिति व्यक्ति में भय, अविश्वास, अकेलापन और अवसाद जैसी भावनाएं पैदा कर सकती है। वहीं Rahu भ्रम, माया और गलत फैसलों की स्थिति बना सकता है।

इसके अलावा Ketu व्यक्ति को असंतोष, भावनात्मक दूरी और एकाकीपन की ओर ले जाता है। ज्योतिषीय मान्यताओं के अनुसार इन ग्रहों का संयुक्त प्रभाव व्यक्ति के व्यवहार को काफी हद तक प्रभावित कर सकता है।

जिद या आत्मविश्वास? जारी है बहस

ममता बनर्जी के इस्तीफा न देने वाले रुख को लेकर राजनीतिक और सामाजिक स्तर पर बहस जारी है। कुछ लोग इसे आत्मविश्वास और राजनीतिक संघर्ष की भावना मान रहे हैं, जबकि कुछ इसे जिद्दी रवैया बता रहे हैं।

हालांकि विशेषज्ञों का कहना है कि किसी भी व्यक्ति के स्वभाव को केवल ज्योतिष या राजनीति के आधार पर तय नहीं किया जा सकता। परिस्थितियां, अनुभव और मानसिक स्थिति भी इंसान के व्यवहार को प्रभावित करती हैं।

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