
Report By: Kiran Prakash Singh
टूंडला में देर रात कूड़े के ढेर में लगी भीषण आग ने विकराल रूप ले लिया। लपटें नगर पालिका तक पहुंचीं, गाड़ियां जलीं, घंटों की मशक्कत के बाद आग पर काबू पाया गया।
कूड़े के ढेर से उठी लपटें, नगर पालिका तक पहुंचा खौफ
DigitalLiveNews.com | 28 अप्रैल 2026
🔴 रात 3 बजे—जब नींद टूटी और डर जाग गया
टूंडला की वो रात आम नहीं थी।
घड़ी ने जैसे ही 3 बजने का संकेत दिया, अचानक आसमान में लाल चमक दिखने लगी।
लोगों ने खिड़कियां खोलीं… और सामने था — आग का विकराल रूप।
नगर पालिका परिसर के पास पड़े कूड़े के ढेर से उठती लपटें
अब सिर्फ आग नहीं थीं… वो खतरे का संकेत थीं।
🔥 छोटी चिंगारी से बना ‘आग का पहाड़’
शुरुआत सिर्फ धुएं से हुई थी…
लेकिन कुछ ही मिनटों में कूड़े का ढेर जलते पहाड़ में बदल गया।
प्लास्टिक, रबर और सड़े कचरे ने आग को ऐसा ईंधन दिया
कि लपटें तेजी से नगर पालिका परिसर की ओर बढ़ने लगीं।
ऐसी घटनाएं अक्सर कूड़े में बनने वाली गैसों की वजह से होती हैं,
जो अचानक आग पकड़ लेती हैं और तेजी से फैलती हैं।
🚗गाड़ियां बनीं आग की शिकार
आग ने सिर्फ कूड़े को नहीं जलाया…
उसने आसपास खड़ी गाड़ियों को भी अपनी चपेट में ले लिया।
नगर पालिका का वाटर टैंकर भी नहीं बच सका —
उसके टायर जलकर राख हो गए।
आसपास खड़े लोग सिर्फ देख सकते थे…
क्योंकि आग के सामने सब बेबस थे।
🚒 दमकल बनाम आग—घंटों चली जंग
कुछ ही देर में मौके पर फायर ब्रिगेड पहुंची।
लेकिन ये कोई सामान्य आग नहीं थी।
कूड़े में छिपे ज्वलनशील पदार्थ आग को बार-बार भड़का रहे थे।
दमकल कर्मियों को घंटों तक लगातार पानी डालना पड़ा,
तब जाकर आग धीरे-धीरे काबू में आई।
देश के कई शहरों में भी कूड़े की आग लंबे समय तक सुलगती रहती है
और आसपास के लोगों के लिए गंभीर खतरा बन जाती है।
हादसा टला… लेकिन सवाल जिंदा हैं
गनीमत रही — कोई जान नहीं गई।
लेकिन सवाल यही है…
👉 अगर आग थोड़ी और फैलती तो?
👉 अगर ये लपटें घरों तक पहुंच जातीं तो?
पहले भी यूपी के कई इलाकों में कूड़े की आग से
बड़ा हादसा होते-होते टला है।
🧠 पूरी कहानी का सच
यह सिर्फ एक आग नहीं थी…
यह एक सिस्टम की कमजोरी की कहानी है।
- कूड़े का समय पर न उठना
- खुले में डंपिंग
- ज्वलनशील कचरे का ढेर
यही वजह बनती है ऐसी आग की।
और जब ये आग लगती है…
तो सिर्फ कूड़ा नहीं जलता —
पूरा शहर खतरे में आ जाता है।
📢 आखिरी सवाल
“टूंडला बच गया… लेकिन कब तक?”
क्या अगली बार भी किस्मत साथ देगी?
या फिर यही कूड़ा… किसी दिन त्रासदी बन जाएगा?