
Report By: Kiran Prakash Singh
चेक बाउंस मामले में सुप्रीम कोर्ट ने राजपाल यादव को दो हफ्ते का आखिरी मौका दिया है। कोर्ट ने उन्हें पासपोर्ट सरेंडर करने का निर्देश दिया और पिछला आचरण भी याद दिलाया।
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राजपाल यादव को सुप्रीम कोर्ट से दो हफ्ते का आखिरी मौका, पासपोर्ट भी करना होगा जमा
अभिनेता राजपाल यादव को चेक बाउंस मामले में सुप्रीम कोर्ट से फिलहाल राहत मिली है। 15 सितंबर को सुनवाई के दौरान जस्टिस सूर्यकांत की अगुवाई वाली बेंच ने उन्हें दो हफ्ते का आखिरी मौका दिया। कोर्ट ने टिप्पणी की कि मामले में उनका पिछला आचरण भरोसा जगाने वाला नहीं रहा है, लेकिन इसके बावजूद उन्हें एक और अवसर दिया जा रहा है।
सुनवाई के दौरान राजपाल यादव वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए कोर्ट से जुड़े हुए थे। हालांकि, बेंच ने उनसे सीधे कोई सवाल नहीं किया। उनके वकील की ओर से दिए गए आश्वासन के आधार पर कोर्ट ने फिलहाल अंतिम मौका दिया है। साथ ही उन्हें अपना पासपोर्ट सरेंडर करने का निर्देश दिया गया है।
मामले की अगली सुनवाई अब 5 अक्टूबर 2026 को होगी।
कोर्ट ने पिछले व्यवहार पर जताया भरोसे का संकट
सुनवाई के दौरान राजपाल यादव की ओर से उनके वकील ने बताया कि कुछ संपत्तियों की बिक्री के जरिए रकम जुटाने की प्रक्रिया चल रही है। वकील ने कोर्ट को आश्वासन दिया कि दो सप्ताह के भीतर कम से कम 2 करोड़ रुपये का ड्राफ्ट कोर्ट में पेश किया जाएगा।
इसके साथ ही बाकी रकम के भुगतान के लिए भी अंतिम शेड्यूल प्रस्तुत करने की बात कही गई।
कोर्ट ने हालांकि पिछले रिकॉर्ड को देखते हुए इस आश्वासन पर सवाल उठाया। सुनवाई के दौरान पीठ की ओर से राजपाल यादव के पिछले व्यवहार को लेकर टिप्पणी की गई और कहा गया कि ऐसे रिकॉर्ड को देखते हुए उन पर भरोसा करना आसान नहीं है।
2010 में शुरू हुआ था पूरा मामला
यह मामला करीब 16 साल पुराना है। वर्ष 2010 में राजपाल यादव की फिल्म ‘अता पता लापता’ के निर्माण से जुड़ा विवाद सामने आया था।
मुरली प्रोजेक्ट्स प्राइवेट लिमिटेड ने फिल्म के निर्माण के लिए राजपाल यादव, उनकी पत्नी और उनकी प्रोडक्शन कंपनी को करीब 5 करोड़ रुपये का लोन दिया था। फिल्म की रिलीज में देरी होने के बाद रकम वापस करने को लेकर दोनों पक्षों के बीच समझौता हुआ था।
इसके तहत भुगतान के लिए दिए गए सात चेक बाउंस हो गए। इसके बाद मुरली प्रोजेक्ट्स की ओर से नेगोशिएबल इंस्ट्रूमेंट्स एक्ट के तहत कानूनी मामला दर्ज कराया गया।
ट्रायल कोर्ट से हाई कोर्ट तक बरकरार रही सजा
मामले में अप्रैल 2018 में ट्रायल कोर्ट ने राजपाल यादव को दोषी ठहराया था। इसके बाद वर्ष 2024 में सेशंस कोर्ट ने भी दोषसिद्धि को बरकरार रखा।
इसके बाद मामला दिल्ली हाई कोर्ट पहुंचा। 10 जुलाई 2026 को दिल्ली हाई कोर्ट ने राजपाल यादव को तीन महीने की जेल और प्रत्येक मामले में 1.35 करोड़ रुपये जुर्माने की सजा बरकरार रखी।
राजपाल यादव ने हाई कोर्ट के इस फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी है। सुप्रीम कोर्ट में मामला लंबित रहने के दौरान उन्हें अंतरिम राहत मिली हुई है, जिसके चलते फिलहाल उन्हें जेल नहीं जाना होगा।
पिछले आदेश के तहत रकम जमा नहीं करने का आरोप
सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई की शुरुआत शिकायतकर्ता मुरली प्रोजेक्ट्स की ओर से पेश वरिष्ठ वकील अजित कुमार सिन्हा की दलील से हुई। उन्होंने कोर्ट को बताया कि राजपाल यादव ने पिछले आदेश का पालन नहीं किया है।
शिकायतकर्ता पक्ष के मुताबिक, कोर्ट ने राजपाल यादव को 9 सितंबर तक 5 करोड़ रुपये जमा करने का निर्देश दिया था, लेकिन तय समय तक कोई रकम जमा नहीं की गई।
इसी के बाद सुनवाई के दौरान भुगतान की व्यवस्था को लेकर राजपाल यादव के वकील की ओर से नई समयसीमा और रकम जमा करने का आश्वासन दिया गया।
5 अक्टूबर को होगी अगली सुनवाई
सुप्रीम कोर्ट ने फिलहाल राजपाल यादव को दो सप्ताह का अंतिम अवसर दिया है। अदालत ने उनके पासपोर्ट को भी सरेंडर करने का निर्देश दिया है। अब उनकी ओर से दिए गए आश्वासन के मुताबिक रकम जमा करने और भुगतान का शेड्यूल पेश करने पर नजर रहेगी।
इस मामले की अगली सुनवाई 5 अक्टूबर 2026 को होगी। उस दिन कोर्ट यह देख सकता है कि दिए गए आश्वासन के मुताबिक रकम जमा करने की प्रक्रिया कितनी आगे बढ़ी है।
फिलहाल सुप्रीम कोर्ट की अंतरिम राहत के कारण राजपाल यादव जेल से बाहर हैं। मामले में आगे की कार्रवाई अदालत के आगामी आदेशों पर निर्भर करेगी।
तारीख: 15 सितंबर 2026
digitallivenews.com