
Report By: Kiran Prakash Singh
पीएम नरेंद्र मोदी के क्रिटिकल मिनरल प्रोसेसिंग योजना वाले पोस्ट पर CJP नेता सौरव दास ने प्रतिक्रिया दी। उन्होंने प्रधानमंत्री के Gen-Z अंदाज वाली भाषा को असहज करने वाला बताया।
आज की तारीख: 5 नवंबर 2026
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पीएम मोदी की सोशल मीडिया भाषा पर सौरव दास ने उठाए सवाल, पोस्ट को बताया जरूरत से ज्यादा Gen-Z अंदाज
डिजिटल लाइव ब्यूरो
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के सोशल मीडिया पोस्ट करने के अंदाज को लेकर कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के नेता सौरव दास ने तंज कसा है। प्रधानमंत्री ने क्रिटिकल मिनरल प्रोसेसिंग योजना से जुड़ी जानकारी साझा करते हुए युवाओं के बीच लोकप्रिय अनौपचारिक भाषा और छोटे वाक्यों का इस्तेमाल किया था। इस पर सौरव दास ने प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि गंभीर पदों पर बैठे लोगों को सामान्य और जिम्मेदार भाषा में लिखना चाहिए।
सौरव दास की यह टिप्पणी प्रधानमंत्री की पोस्ट की भाषा और प्रस्तुति को लेकर है। उन्होंने योजना के तकनीकी प्रावधानों पर सवाल उठाने के बजाय सार्वजनिक संवाद के तरीके पर अपनी असहमति जाहिर की।
1. पीएम मोदी ने पोस्ट में क्या लिखा?
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने महत्वपूर्ण खनिजों के प्रसंस्करण में भारत की आत्मनिर्भरता को लेकर सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट किया था।
उन्होंने सवाल उठाया कि क्या भारत को अपनी भविष्य की तकनीकों को ताकत देने वाले महत्वपूर्ण खनिजों के प्रसंस्करण के लिए दूसरे देशों पर निर्भर रहना चाहिए? इसके जवाब में उन्होंने लिखा, ‘मैं तो बिल्कुल नहीं चाहता।’
प्रधानमंत्री ने लिथियम, निकल और कोबाल्ट जैसे खनिजों का जिक्र करते हुए बताया कि ये इलेक्ट्रिक वाहन (EV), बैटरी, इलेक्ट्रॉनिक्स और रक्षा क्षेत्र के लिए बेहद जरूरी हैं। उन्होंने कहा कि इन खनिजों के प्रसंस्करण में भारत की निर्भरता कम करने के लिए नई योजना को मंजूरी दी गई है।
2. सौरव दास ने पीएम मोदी को दी यह सलाह
प्रधानमंत्री की पोस्ट पर प्रतिक्रिया देते हुए सौरव दास ने एक्स पर लिखा, ‘यो, कृपया ऐसे ट्वीट लिखें जैसे गंभीर पदों पर बैठे सामान्य लोग लिखते हैं। यह जरूरत से ज्यादा जेन-जी बनने की कोशिश जैसा और सच कहूं तो काफी असहज करने वाला लगता है। नीतियां गंभीर हों या नहीं, कम से कम गंभीर लेखन को तो मत छोड़िए।’
सौरव दास ने अपनी टिप्पणी में प्रधानमंत्री के लिखने के तरीके को निशाने पर लिया। उनका कहना है कि महत्वपूर्ण संवैधानिक और सार्वजनिक पदों पर बैठे लोगों के संवाद में गंभीरता और सहजता होनी चाहिए।
3. क्या है क्रिटिकल मिनरल प्रोसेसिंग योजना?
केंद्र सरकार ने महत्वपूर्ण खनिजों के घरेलू प्रसंस्करण को बढ़ावा देने के लिए 2,814 करोड़ रुपये की पूंजीगत सहायता योजना को मंजूरी दी है।
यह योजना वित्त वर्ष 2026-27 से 2030-31 तक पांच वर्षों के लिए लागू होगी। इसका मुख्य उद्देश्य भारत में लिथियम और निकल जैसे महत्वपूर्ण खनिजों के प्रसंस्करण की क्षमता विकसित करना और दूसरे देशों पर निर्भरता कम करना है।
योजना के तहत कुल चार प्रसंस्करण संयंत्र स्थापित करने का प्रस्ताव है। इनमें लिथियम के दो और निकल के दो संयंत्र शामिल हैं।
4. निवेश पर मिलेगी 30 प्रतिशत पूंजीगत सब्सिडी
योजना के तहत पात्र निवेश पर सरकार 30 प्रतिशत पूंजीगत सब्सिडी देगी। प्रत्येक लिथियम संयंत्र के लिए अधिकतम 500 करोड़ रुपये और प्रत्येक निकल संयंत्र के लिए अधिकतम 900 करोड़ रुपये की सहायता निर्धारित की गई है।
संयंत्रों की न्यूनतम क्षमता इस प्रकार तय की गई है:
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लिथियम: प्रत्येक संयंत्र की न्यूनतम क्षमता 30 हजार टन।
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निकल: प्रत्येक संयंत्र की न्यूनतम क्षमता 50 हजार टन।
लाभार्थियों का चयन दो चरणों में किया जाएगा। पहले तकनीकी योग्यता का आकलन होगा और उसके बाद वित्तीय बोली के आधार पर चयन किया जाएगा। सब्सिडी का भुगतान निर्धारित लक्ष्यों और उपलब्धियों के अनुसार तीन किस्तों में किया जाएगा।
5. EV, बैटरी और रक्षा क्षेत्र को मिलेगा फायदा
क्रिटिकल मिनरल प्रोसेसिंग योजना से इलेक्ट्रिक वाहन, बैटरी ऊर्जा भंडारण, इलेक्ट्रॉनिक्स, रक्षा और विशेष इस्पात जैसे क्षेत्रों को फायदा मिलने की उम्मीद है।
लिथियम, निकल और कोबाल्ट जैसे खनिज आधुनिक तकनीक और उद्योगों के लिए महत्वपूर्ण हैं। इनका प्रसंस्करण कुछ चुनिंदा देशों में केंद्रित होने के कारण अंतरराष्ट्रीय तनाव और आपूर्ति में बाधा का असर भारत पर भी पड़ सकता है।
सरकार का उद्देश्य देश में प्रसंस्करण क्षमता बढ़ाकर आयात पर निर्भरता कम करना और महत्वपूर्ण खनिजों की आपूर्ति शृंखला को मजबूत करना है।
इस बीच, योजना की घोषणा के साथ ही प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सोशल मीडिया भाषा को लेकर सौरव दास की टिप्पणी भी चर्चा में आ गई है।
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