AI डीपफेक पर हाई कोर्ट पहुंचीं प्रीति जिंटा, बड़ा आदेश जारी

Report By: Kiran Prakash Singh

प्रीति जिंटा ने AI डीपफेक और मॉर्फ्ड कंटेंट के खिलाफ बॉम्बे हाई कोर्ट में याचिका दायर की। अदालत ने आपत्तिजनक सामग्री हटाने के लिए टेकडाउन मैकेनिज्म बनाने का निर्देश दिया।

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📅 दिनांक: 04 जुलाई 2026

AI डीपफेक के खिलाफ प्रीति जिंटा की कानूनी लड़ाई, बॉम्बे हाई कोर्ट ने दिए अहम निर्देश

बॉलीवुड अभिनेत्री प्रीति जिंटा ने अपनी तस्वीरों और वीडियो के कथित AI डीपफेक और मॉर्फ्ड इस्तेमाल के खिलाफ बॉम्बे हाई कोर्ट का रुख किया है। अभिनेत्री ने आरोप लगाया कि सोशल मीडिया और कुछ वेबसाइटों पर उनकी पहचान और चेहरे का गलत तरीके से उपयोग किया जा रहा है। मामले की सुनवाई के दौरान अदालत ने इस मुद्दे को गंभीर मानते हुए आपत्तिजनक सामग्री हटाने के लिए एक व्यावहारिक “टेकडाउन मैकेनिज्म” विकसित करने की आवश्यकता पर जोर दिया।


AI डीपफेक के खिलाफ कोर्ट पहुंचीं प्रीति जिंटा

रिपोर्टों के अनुसार, प्रीति जिंटा ने Google, Meta, डोमेन रजिस्ट्रार और अन्य संबंधित पक्षों के खिलाफ याचिका दायर की है। याचिका में कहा गया कि सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स और कुछ वेबसाइटों पर उनके नाम, तस्वीरों और वीडियो का कथित रूप से AI तकनीक की मदद से गलत और भ्रामक तरीके से इस्तेमाल किया जा रहा है। अभिनेत्री का कहना है कि इससे उनकी सार्वजनिक छवि और व्यक्तिगत अधिकार प्रभावित हो रहे हैं।


‘असली और नकली में फर्क करना मुश्किल’

सुनवाई के दौरान अभिनेत्री की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता वेंकटेश धोंड ने अदालत को बताया कि आधुनिक AI डीपफेक तकनीक इतनी उन्नत हो चुकी है कि असली और नकली सामग्री के बीच अंतर करना आम लोगों के लिए कठिन हो गया है। उन्होंने कहा कि इस प्रकार की सामग्री अभिनेत्री के प्राइवेसी राइट्स, पर्सनैलिटी राइट्स और मोरल राइट्स का उल्लंघन कर सकती है। उन्होंने अदालत से आपत्तिजनक सामग्री हटाने के लिए प्रभावी व्यवस्था बनाने का अनुरोध किया।


Google और Meta ने क्या कहा?

मामले में Google और Meta की ओर से पेश वकीलों ने अदालत को बताया कि यदि संबंधित URL की पहचान कराई जाती है और सामग्री नियमों का उल्लंघन करती है, तो उसे हटाने की प्रक्रिया अपनाई जा सकती है। साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि ऐसा कोई व्यापक आदेश न दिया जाए जिससे वैध और कानून के अनुरूप मौजूद ऑनलाइन सामग्री पर अनावश्यक असर पड़े।


हाई कोर्ट ने दिए अहम निर्देश

सुनवाई के दौरान जस्टिस माधव ने कहा कि एक ऐसा व्यावहारिक टेकडाउन मैकेनिज्म तैयार किया जाना चाहिए, जिससे केवल वही सामग्री हटाई जाए जो आपत्तिजनक, भ्रामक या किसी व्यक्ति के अधिकारों का उल्लंघन करती हो। अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि इस प्रक्रिया का प्रभाव वैध और कानूनी ऑनलाइन कंटेंट पर नहीं पड़ना चाहिए। अदालत का उद्देश्य संतुलित व्यवस्था सुनिश्चित करना है।


डिजिटल युग में बढ़ती चुनौती

विशेषज्ञों का मानना है कि AI डीपफेक तकनीक के बढ़ते इस्तेमाल के साथ व्यक्तित्व अधिकार, निजता और डिजिटल सुरक्षा से जुड़े मामलों में कानूनी चुनौतियां भी बढ़ रही हैं। ऐसे मामलों में अदालतों द्वारा तय किए गए दिशा-निर्देश भविष्य में अन्य समान मामलों के लिए भी महत्वपूर्ण आधार बन सकते हैं। फिलहाल इस मामले में आगे की सुनवाई और अदालत के विस्तृत आदेश पर सभी की नजर बनी हुई है।

नोट: यह रिपोर्ट उपलब्ध न्यायिक कार्यवाही और सार्वजनिक रिपोर्टों पर आधारित है। मामले में अंतिम कानूनी निर्णय आना अभी बाकी है और संबंधित पक्षों की दलीलों पर अदालत आगे विचार करेगी।

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