
Report By: Kiran Prakash Singh
बाबा सिद्दीकी हत्याकांड में बेटी शहज़ीन सिद्दीकी ने कोर्ट में याचिका दायर कर जांच पर सवाल उठाए और अनमोल बिश्नोई की कस्टडी लेकर पूछताछ की मांग की।
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📅 दिनांक: 04 जुलाई 2026
बाबा सिद्दीकी हत्याकांड: बेटी ने जांच पर उठाए सवाल, अनमोल बिश्नोई की कस्टडी की मांग
एनसीपी नेता और पूर्व मंत्री बाबा सिद्दीकी हत्याकांड में एक नया कानूनी घटनाक्रम सामने आया है। दिवंगत नेता की बेटी शहज़ीन ज़ियाउद्दीन सिद्दीकी ने विशेष अदालत में याचिका दाखिल कर मुंबई क्राइम ब्रांच की जांच पर गंभीर सवाल उठाए हैं। याचिका में अदालत से अनुरोध किया गया है कि जांच एजेंसी को अनमोल बिश्नोई की कस्टडी लेकर उससे पूछताछ करने और उसे अन्य आरोपियों के साथ ट्रायल में पेश करने का निर्देश दिया जाए। फिलहाल अदालत ने इन आरोपों पर कोई अंतिम निष्कर्ष नहीं दिया है।
जांच एजेंसी की कार्रवाई पर उठाए सवाल
याचिका में कहा गया है कि मुंबई क्राइम ब्रांच द्वारा दाखिल चार्जशीट में अनमोल बिश्नोई को इस हत्याकांड का मुख्य वांछित आरोपी बताया गया है। इसके बावजूद, शहज़ीन का आरोप है कि जांच एजेंसी ने उसकी कस्टडी लेने या उससे पूछताछ करने के लिए पर्याप्त और प्रभावी प्रयास नहीं किए। उनका कहना है कि मुख्य आरोपी से पूछताछ के बिना जांच को पूरी तरह निष्पक्ष और पूर्ण नहीं माना जा सकता।
परिवार ने जुटाई थी अनमोल की जानकारी
याचिका के अनुसार, परिवार ने अपने स्तर पर जानकारी जुटाई थी कि अनमोल बिश्नोई अमेरिका के आयोवा राज्य में डिपार्टमेंट ऑफ होमलैंड सिक्योरिटी (DHS) की हिरासत में था। शहज़ीन का दावा है कि यह जानकारी जांच अधिकारियों को भी उपलब्ध कराई गई थी। इसके बावजूद, परिवार के अनुसार उसे भारत लाने या उसकी कस्टडी लेने की दिशा में अपेक्षित गंभीरता नहीं दिखाई गई।
गवाहों और अन्य पहलुओं की जांच पर भी सवाल
शहज़ीन सिद्दीकी ने अपनी याचिका में यह भी कहा है कि उनके भाई जीशान सिद्दीकी, जो इस मामले के गवाह हैं, ने अपने बयान में कुछ लोगों के नाम बताए थे जिनसे पूछताछ की जानी चाहिए थी। उनका आरोप है कि उन व्यक्तियों से पूछताछ नहीं की गई और न ही उन सुरागों पर आगे जांच बढ़ाई गई। याचिका में यह भी दावा किया गया है कि जांच केवल सीमित दायरे तक ही रही और कथित साजिश के व्यापक पहलुओं तक नहीं पहुंची।
RTI और NIA का भी किया गया उल्लेख
याचिका में कहा गया है कि परिवार ने सूचना का अधिकार (RTI) के तहत भी अनमोल बिश्नोई से संबंधित जानकारी मांगी थी, लेकिन जांच अधिकारी ने गोपनीयता का हवाला देकर जानकारी देने से इनकार कर दिया। बाद में राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) की हिरासत का भी उल्लेख किया गया है। शहज़ीन का कहना है कि यदि उस समय मुंबई क्राइम ब्रांच उसकी कस्टडी लेकर पूछताछ करती, तो मामले के कई अहम तथ्य सामने आ सकते थे।
अब अदालत के फैसले पर टिकी हैं निगाहें
याचिका में यह भी कहा गया है कि यदि भविष्य में अनमोल बिश्नोई की गिरफ्तारी के बाद अलग से ट्रायल चलाना पड़ा, तो न्यायिक समय और सरकारी संसाधनों की अतिरिक्त खपत हो सकती है। इसलिए परिवार ने अदालत से आग्रह किया है कि जांच एजेंसी को उसकी कस्टडी लेकर मौजूदा ट्रायल में शामिल करने का निर्देश दिया जाए। फिलहाल यह सभी दावे याचिकाकर्ता की ओर से अदालत के समक्ष रखे गए हैं और इन पर अदालत का अंतिम निर्णय आना बाकी है। अब इस मामले की अगली सुनवाई और अदालत के आदेश पर सभी की नजरें टिकी हुई हैं।
नोट: इस रिपोर्ट में वर्णित आरोप और मांगें अदालत में दायर याचिका पर आधारित हैं। इन पर अदालत का अंतिम फैसला अभी आना बाकी है तथा संबंधित पक्षों के आरोपों की न्यायिक प्रक्रिया जारी है।
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