SIR पर पवन खेड़ा का हमला, Form 6 और ECINet पर सवाल

Report By: Kiran Prakash Singh

पवन खेड़ा ने SIR और Form 6 को लेकर चुनाव आयोग पर सवाल उठाए। उन्होंने ECINet, मतदाता सूची और आयोग की कार्यप्रणाली पर भी आपत्ति जताई।

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SIR और Form 6 पर पवन खेड़ा के सवाल, चुनाव आयोग के जवाब के बाद भी जारी विवाद

Digital Live News | 27 सितंबर 2026 | digitallivenews.com

कांग्रेस नेता पवन खेड़ा ने विशेष गहन पुनरीक्षण यानी SIR को लेकर चुनाव आयोग के हालिया स्पष्टीकरण पर सवाल उठाए हैं। खेड़ा ने खास तौर पर Form 6, ECINet और मतदाता सूची में नाम जोड़ने की प्रक्रिया को लेकर अपनी आपत्तियां सामने रखीं। उनका कहना है कि आयोग के स्पष्टीकरण से उन सवालों का पूरी तरह जवाब नहीं मिलता, जो हाल में चुनाव आयोग की आंतरिक कार्यप्रणाली और Form 6 से जुड़े विवाद को लेकर उठे हैं।

1. Form 6 को लेकर पवन खेड़ा के सवाल

पवन खेड़ा ने कहा कि Form 6 नए मतदाताओं के पंजीकरण के लिए इस्तेमाल होने वाला महत्वपूर्ण फॉर्म है। उन्होंने सवाल उठाया कि इसमें SIR से संबंधित अतिरिक्त घोषणा को किस प्रक्रिया के तहत जोड़ा गया और इसको लेकर चुनाव आयोग के भीतर उठाई गई आपत्तियों का क्या जवाब है।

इससे पहले रिपोर्टों में दावा किया गया था कि चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी ने Form 6 से जुड़े बदलावों पर आपत्ति जताई थी। चुनाव आयोग ने हालांकि स्पष्ट किया है कि मूल Form 6 में कोई बदलाव नहीं किया गया था और SIR से जुड़ी घोषणा अलग से जोड़ी गई थी।

2. चुनाव आयोग ने क्या कहा?

चुनाव आयोग ने 26 सितंबर की बैठक के बाद कहा कि SIR से जुड़े फैसले सर्वसम्मति से लिए गए। आयोग ने यह भी कहा कि SIR के दौरान Form 6 के साथ लगाई गई घोषणा को सुप्रीम कोर्ट की ओर से बरकरार रखा गया है।

आयोग के अनुसार, गैर-SIR अवधि में मतदाता पंजीकरण के लिए Registration of Electors Rules, 1960 के तहत निर्धारित फॉर्म ही इस्तेमाल किए जाएंगे। इस स्पष्टीकरण के बाद कांग्रेस ने आयोग के जवाब को लेकर अपनी आपत्तियां दोहराईं।

3. ECINet को लेकर भी सवाल

पवन खेड़ा ने ECINet प्लेटफॉर्म की कार्यप्रणाली को लेकर भी सवाल उठाए। उनका कहना है कि मतदाता सूची से जुड़े काम में स्थानीय स्तर पर निर्वाचन पंजीकरण अधिकारियों यानी ERO की भूमिका महत्वपूर्ण रही है।

खेड़ा ने सवाल किया कि यदि ECINet की निगरानी और समीक्षा के लिए पहले से व्यवस्थाएं मौजूद हैं, तो नई समिति बनाने की जरूरत क्यों पड़ी। दूसरी ओर, चुनाव आयोग ने कहा है कि फील्ड अधिकारियों को उनकी वैधानिक शक्तियों के अनुसार ECINet में role-based access दिया गया है। आयोग ने पोर्टल की समीक्षा के लिए वरिष्ठ उप चुनाव आयुक्त की अध्यक्षता में एक समिति बनाने की जानकारी भी दी है, जिसमें IIT/IIIT का स्वतंत्र विशेषज्ञ शामिल होगा।

4. मतदाता सूची और अधिकारियों की भूमिका पर बहस

खेड़ा ने मतदाता सूची में नाम जोड़ने और हटाने की प्रक्रिया में स्थानीय अधिकारियों की भूमिका का मुद्दा भी उठाया। उनका तर्क है कि ERO और स्थानीय स्तर के अधिकारी अपने क्षेत्र की परिस्थितियों से परिचित होते हैं और मतदाता से जुड़े मामलों में स्थानीय जानकारी महत्वपूर्ण होती है।

चुनाव आयोग ने अपने हालिया फैसलों में कहा है कि जिन मतदाताओं को SIR के दौरान अनमैप्ड या तार्किक विसंगतियों को लेकर नोटिस मिले हैं, उनके मामलों में BLO घर जाकर दस्तावेज जुटा सकते हैं। इन दस्तावेजों को ECINet पर अपलोड किया जाएगा और अंतिम निर्णय ERO करेगा। इससे ऐसे मतदाताओं को हर मामले में ERO/AERO कार्यालय में व्यक्तिगत सुनवाई के लिए बुलाने की जरूरत नहीं होगी।

5. राजनीतिक आरोपों के बीच जारी है SIR पर बहस

SIR और मतदाता पंजीकरण को लेकर चुनाव आयोग और विपक्षी दलों के बीच राजनीतिक बहस लगातार तेज है। कांग्रेस ने आयोग के स्पष्टीकरण को अपर्याप्त बताते हुए Form 6 और ECINet से जुड़े सवाल दोहराए हैं। पवन खेड़ा ने भी अपने बयान में आयोग पर कई आरोप लगाए और CEC ज्ञानेश कुमार के खिलाफ अपनी राजनीतिक मांग दोहराई।

वहीं चुनाव आयोग का कहना है कि SIR से जुड़े फैसले सर्वसम्मति से लिए गए हैं और Form 6 के SIR संबंधी अतिरिक्त घोषणा को लेकर उसकी स्थिति स्पष्ट है। आयोग ने साथ ही ECINet की समीक्षा और मतदाताओं की सुविधा के लिए कई प्रक्रियात्मक बदलावों की घोषणा की है।

इस पूरे विवाद में Form 6, SIR, ECINet और मतदाता सूची की प्रक्रिया मुख्य मुद्दे बने हुए हैं। आने वाले दिनों में आयोग की ओर से उठाए गए कदम और राजनीतिक दलों की प्रतिक्रियाएं इस बहस को आगे बढ़ा सकती हैं।

दिनांक: 27 सितंबर 2026
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