
Report By: Kiran Prakash Singh
FBI ने भारतीय मूल के मंजीत सिंह बेदी को कथित SNAP फ्रॉड मामले में मोस्ट वॉन्टेड सूची में शामिल किया है। उसकी जानकारी पर 1.50 लाख डॉलर इनाम है।
नई दिल्ली | 4 सितंबर 2026 | digitallivenews.com
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FBI की मोस्ट वॉन्टेड लिस्ट में मंजीत बेदी, 1.5 लाख डॉलर इनाम
अमेरिकी जांच एजेंसी FBI ने भारतीय मूल के अमेरिकी नागरिक मंजीत सिंह बेदी को अपनी मोस्ट वॉन्टेड फ्रॉडस्टर्स सूची में शामिल किया है। अमेरिकी अधिकारियों के अनुसार, बेदी पर कथित तौर पर ऐसी धोखाधड़ी योजना में शामिल होने का आरोप है, जिससे अमेरिकी सरकार को कम से कम 6 लाख डॉलर का नुकसान हुआ। FBI का कहना है कि बेदी अमेरिका से निकलकर भारत पहुंच चुका है।
एजेंसी ने उसकी गिरफ्तारी और दोषसिद्धि तक पहुंचाने वाली जानकारी देने वाले व्यक्ति के लिए 1.50 लाख डॉलर के इनाम की घोषणा की है। मामले में वायर फ्रॉड और SNAP बेनिफिट्स फ्रॉड से जुड़े आरोप लगाए गए हैं।
अमेरिका में किराना स्टोर चलाता था बेदी
FBI के मुताबिक, मंजीत सिंह बेदी अमेरिका का नैचुरलाइज्ड नागरिक है और वॉशिंगटन राज्य के टैकोमा में Asian Grocery Store नाम से किराना कारोबार चलाता था।
अमेरिकी जांच एजेंसी का आरोप है कि बेदी SNAP योजना के लाभार्थियों को उनके EBT कार्ड के जरिए खाद्य सामग्री उपलब्ध कराने का काम करता था। हालांकि, आरोप के अनुसार उसने इस व्यवस्था का कथित रूप से गलत इस्तेमाल किया।
FBI का दावा है कि बेदी लाभार्थियों को खाद्य सामग्री देने के बजाय उनके EBT कार्ड स्वाइप करता था और बदले में उन्हें नकद रकम देता था। आरोप है कि इस लेनदेन से मिलने वाली रकम का एक हिस्सा वह अपने पास रखता था।
SNAP अमेरिका की सरकारी खाद्य सहायता योजना है। इसके तहत पात्र लोगों को EBT कार्ड के माध्यम से निर्धारित खाद्य सामग्री खरीदने के लिए सहायता दी जाती है।
कोर्ट के आदेश के बाद अमेरिका से हुआ फरार
FBI के अनुसार, बेदी के खिलाफ वायर फ्रॉड और SNAP बेनिफिट्स फ्रॉड के आरोप में अभियोग दायर किया गया था। इसके बाद उसे तत्काल हिरासत में लेने के बजाय अदालत में पेश होने की अनुमति दी गई थी।
अदालत ने उसे अपना पासपोर्ट जमा करने और वॉशिंगटन राज्य में रहने का आदेश दिया था। लेकिन अमेरिकी एजेंसी के मुताबिक, बेदी बाद में गाड़ी से अमेरिका-कनाडा सीमा पार कर कनाडा पहुंचा और वहां से भारत चला गया।
वेस्टर्न डिस्ट्रिक्ट ऑफ वॉशिंगटन की अमेरिकी जिला अदालत ने इस मामले में मई 2026 में संघीय गिरफ्तारी वारंट जारी किया था। इसके बाद से अमेरिकी एजेंसियां उसकी तलाश कर रही हैं।
गिरफ्तारी की सूचना पर 1.50 लाख डॉलर इनाम
FBI ने बेदी को अपनी मोस्ट वॉन्टेड फ्रॉडस्टर्स सूची में शामिल करते हुए उसकी गिरफ्तारी और दोषसिद्धि तक पहुंचाने वाली जानकारी के लिए 1,50,000 डॉलर का इनाम घोषित किया है।
एजेंसी के अनुसार, बेदी के भारत पहुंच जाने के कारण उसकी तलाश अब अमेरिका की सीमाओं से बाहर भी महत्वपूर्ण हो गई है। हालांकि, उपलब्ध जानकारी के मुताबिक FBI ने यह स्पष्ट नहीं किया है कि उसके मामले में भारतीय कानून प्रवर्तन एजेंसियों से औपचारिक सहयोग मांगा गया है या नहीं।
इनाम की घोषणा का उद्देश्य आम लोगों से ऐसी जानकारी हासिल करना है, जिससे जांच एजेंसियों को आरोपी तक पहुंचने में मदद मिल सके।
FBI ने क्यों बनाई मोस्ट वॉन्टेड सूची?
FBI ने इसी साल जून में मोस्ट वॉन्टेड फ्रॉडस्टर्स सूची शुरू की थी। इसका उद्देश्य ऐसे लोगों की पहचान और तलाश में मदद करना है, जिन पर अमेरिकी जनता या सरकारी कार्यक्रमों से जुड़ी धोखाधड़ी के गंभीर आरोप हैं।
अमेरिकी कृषि विभाग के इंस्पेक्टर जनरल जॉन वॉक के मुताबिक, ऐसी सूची जनता को जागरूक करने और भगोड़ों तक पहुंचने में मदद करने वाला महत्वपूर्ण माध्यम है।
FBI के अनुसार, सूची में फिलहाल मंजीत सिंह बेदी समेत कुल 12 लोग शामिल हैं। एजेंसी का कहना है कि सूची में पहले शामिल किए गए चार लोगों को गिरफ्तार किया जा चुका है और इसके बाद उन्हें सूची से हटा दिया गया।
भारत-अमेरिका सहयोग पर भी नजर
मंजीत सिंह बेदी के भारत पहुंचने की जानकारी के बाद यह मामला भारत-अमेरिका कानून प्रवर्तन सहयोग के लिहाज से भी महत्वपूर्ण हो गया है। FBI ने अभी यह स्पष्ट नहीं किया है कि बेदी की तलाश के लिए भारतीय एजेंसियों के साथ किस स्तर पर संपर्क हुआ है।
भारत और अमेरिका के बीच पिछले कुछ वर्षों में आतंकवाद और अंतरराष्ट्रीय संगठित अपराध समेत कई मामलों में कानून प्रवर्तन सहयोग बढ़ा है। भारतीय अधिकारियों की ओर से भी दोनों देशों की एजेंसियों के बीच सहयोग को महत्वपूर्ण बताया जाता रहा है।
अब मंजीत सिंह बेदी के मामले में अमेरिकी एजेंसियों की जांच और उसकी संभावित गिरफ्तारी पर नजर रहेगी। 1.50 लाख डॉलर के इनाम की घोषणा के बाद FBI को उम्मीद है कि उसे आरोपी तक पहुंचने में उपयोगी जानकारी मिल सकती है।
फिलहाल बेदी के खिलाफ लगाए गए आरोप अदालत में विचाराधीन हैं और किसी आरोपी को दोषी तब तक नहीं माना जाता, जब तक अदालत में आरोप साबित न हो जाएं।
दिनांक: 4 सितंबर 2026
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