
Report By: Kiran Prakash Singh
FSSAI CEO के दो वक्त भोजन वाले बयान के बाद प्राचीन भारतीय परंपराओं और आधुनिक विज्ञान की चर्चा तेज है। जानें क्या सच में तीन वक्त खाना जरूरी है।
4 सितंबर 2026 | digitallivenews.com
FSSAI के बयान से सवाल: क्या भारतीय परंपरा में दो वक्त ही भोजन था?
सुबह नाश्ता, दोपहर का खाना और रात का डिनर आज हमारी रोजमर्रा की जिंदगी का सामान्य हिस्सा बन चुका है। लेकिन दो वक्त भोजन करने की भारतीय परंपरा को लेकर अब एक बार फिर चर्चा शुरू हो गई है। FSSAI के CEO राजित पुन्हानी ने 2 सितंबर 2026 को दिए एक इंटरव्यू में कहा कि पारंपरिक भारतीय खान-पान में तीन निश्चित भोजन का चलन नहीं था और दो बार भोजन करना अधिक पारंपरिक पैटर्न माना जाता था।
उनके बयान के बाद यह सवाल उठ रहा है कि क्या वास्तव में प्राचीन भारतीय ग्रंथों में दिन में दो बार भोजन करने की बात कही गई है और क्या आधुनिक विज्ञान भी इसे सही मानता है?
FSSAI CEO ने क्या कहा?
FSSAI CEO राजित पुन्हानी के अनुसार, पारंपरिक भारतीय जीवनशैली में ब्रेकफास्ट, लंच और डिनर जैसी तीन निश्चित भोजन व्यवस्था आज की तरह सामान्य नहीं थी। उन्होंने पैकेज्ड और प्रोसेस्ड फूड की बढ़ती खपत पर भी चिंता जताई।
FSSAI की ‘ईट राइट थाली’ पहल में स्थानीय और पारंपरिक खाद्य पदार्थों को प्राथमिकता देने की बात कही जाती है। FSSAI ने 2025 में भारतीय राज्यों की पारंपरिक थालियों पर आधारित एक पुस्तक भी जारी की थी, जिसमें अलग-अलग क्षेत्रों के पारंपरिक भोजन को शामिल किया गया।
हालांकि, किसी संस्था के अधिकारी का बयान अपने आप में यह साबित नहीं करता कि दो वक्त खाना हर व्यक्ति के लिए स्वास्थ्य की दृष्टि से बेहतर है।
प्राचीन ग्रंथों में भोजन को लेकर क्या कहा गया?
भारतीय धार्मिक और आयुर्वेदिक साहित्य में भोजन के समय, मात्रा और दिनचर्या को लेकर कई तरह के नियम मिलते हैं। कुछ ग्रंथों और परंपरागत व्याख्याओं में दिन में दो मुख्य भोजन का उल्लेख किया जाता है।
धर्मसूत्रों और अन्य प्राचीन ग्रंथों में भी भोजन के बीच अंतर रखने की बातें मिलती हैं। महाभारत के शांति पर्व से जुड़ी व्याख्याओं में भी सुबह और शाम भोजन के संदर्भ का उल्लेख किया जाता है।
वहीं आयुर्वेदिक ग्रंथों में भोजन का समय व्यक्ति की पाचन क्षमता, दिनचर्या और परिस्थितियों के अनुसार तय करने पर जोर दिया गया है। इसलिए इन प्राचीन नियमों को आधुनिक समय में सभी लोगों पर एक समान लागू करना उचित नहीं माना जा सकता।
दो वक्त खाने के पीछे क्या है तर्क?
दो भोजन के बीच पर्याप्त अंतर रखने के पीछे मुख्य तर्क यह है कि शरीर को भोजन पचाने के लिए समय मिले। इसी विचार से आधुनिक समय में इंटरमिटेंट फास्टिंग जैसी खान-पान की पद्धतियां लोकप्रिय हुई हैं।
इंटरमिटेंट फास्टिंग में खाने और उपवास के लिए निश्चित समय तय किया जाता है। हालांकि, इसका मतलब यह नहीं है कि हर व्यक्ति को दिन में केवल दो बार ही खाना चाहिए।
व्यक्ति की उम्र, गतिविधि, दिनचर्या और पोषण संबंधी जरूरतों के अनुसार भोजन की आवश्यकता अलग हो सकती है। इसलिए भोजन की संख्या से ज्यादा महत्वपूर्ण संतुलित आहार और पर्याप्त पोषण है।
तीन वक्त खाने का चलन कैसे बढ़ा?
आज तीन वक्त खाना इतना सामान्य है कि इसके पीछे की ऐतिहासिक वजहों पर कम ही चर्चा होती है। औद्योगीकरण, दफ्तरों की निश्चित समय-सारणी और पश्चिमी खान-पान के प्रभाव ने आधुनिक भोजन व्यवस्था को प्रभावित किया।
सुबह नाश्ता, दोपहर में लंच ब्रेक और शाम-रात का भोजन कामकाजी जीवन के हिसाब से सुविधाजनक व्यवस्था बन गया। इसके साथ ही पैकेज्ड फूड और रेडी-टू-ईट उत्पादों की उपलब्धता ने नाश्ते और बीच-बीच में खाने की आदत को भी बढ़ावा दिया।
हालांकि, तीन वक्त खाने को सिर्फ पश्चिमी प्रभाव का परिणाम मानना भी अत्यधिक सरल निष्कर्ष होगा, क्योंकि भारत में अलग-अलग क्षेत्रों और समुदायों में भोजन की परंपराएं हमेशा अलग रही हैं।
क्या हर व्यक्ति के लिए दो वक्त खाना सही है?
सबसे जरूरी बात यह है कि दो वक्त भोजन करना हर व्यक्ति के लिए अनिवार्य नहीं है। बच्चों और किशोरों के विकास के दौरान पर्याप्त ऊर्जा और पोषक तत्वों की जरूरत होती है। इसी तरह बहुत अधिक शारीरिक मेहनत करने वाले लोगों की जरूरतें अलग हो सकती हैं।
गर्भावस्था, स्तनपान या किसी बीमारी जैसी स्थितियों में भी भोजन का पैटर्न डॉक्टर या योग्य स्वास्थ्य विशेषज्ञ की सलाह के अनुसार होना चाहिए।
इसलिए FSSAI CEO के बयान को भारतीय पारंपरिक खान-पान की एक चर्चा के रूप में देखा जा सकता है, लेकिन इसे यह निष्कर्ष नहीं माना जाना चाहिए कि तीन बार खाना गलत और दो बार खाना ही सही है।
स्वस्थ रहने के लिए भोजन की संख्या से ज्यादा जरूरी है कि आहार संतुलित हो, पर्याप्त पोषण दे और व्यक्ति की उम्र व जरूरत के मुताबिक हो। किसी भी तरह की फास्टिंग या भोजन में बड़ा बदलाव करने से पहले योग्य स्वास्थ्य विशेषज्ञ से सलाह लेना बेहतर है।
Digital Live News | 4 सितंबर 2026
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