
Report By: Kiran Prakash Singh
🎬 “थिएटर का अनुभव आज भी खास है” — किरण राव ने इंडिपेंडेंट सिनेमा और दर्शकों पर साझा किए विचार
किरण राव ने इंडिपेंडेंट फिल्मों और थिएटर अनुभव पर विचार साझा किए। कहा — दर्शकों का समर्थन जरूरी, डिजिटल युग में भी थिएटर का अनुभव खास।
मुंबई, Digital Live News।
फिल्ममेकर किरण राव ने हाल ही में 14वें धर्मशाला इंटरनेशनल फिल्म फेस्टिवल में इंडिपेंडेंट सिनेमा और डिजिटल प्लेटफॉर्म्स के बदलते दौर पर अपनी बात रखी। किरण राव ने कहा कि डिजिटल प्लेटफॉर्म्स ने फिल्मों की पहुंच बढ़ा दी है, लेकिन थिएटर का अनुभव आज भी दर्शकों के लिए अलग और खास है।
🎥 इंडिपेंडेंट फिल्मों के लिए चुनौतियां
किरण राव ने बताया कि इंडिपेंडेंट फिल्ममेकर्स अब भी डिस्ट्रिब्यूशन और दर्शक समर्थन जैसी चुनौतियों का सामना कर रहे हैं। उन्होंने भारत की ऑस्कर प्रविष्टि फिल्म होमबाउंड का उदाहरण देते हुए कहा:
“पहले लोग केवल बड़े सितारों वाली फिल्में पसंद करते थे, लेकिन अब दर्शक नई कहानियों, नए चेहरे और अनोखे विषयों की ओर आकर्षित हो रहे हैं। इसका बड़ा श्रेय ओटीटी प्लेटफॉर्म्स को जाता है। लेकिन क्या दर्शक इंडिपेंडेंट फिल्मों के लिए पैसे देने को तैयार हैं?”
किरण राव ने सवाल उठाया कि अगर दर्शक थिएटर तक नहीं आएंगे, तो इतनी मेहनत, समय और संसाधन लगाने का क्या मतलब रह जाएगा।
🌟 इंडिपेंडेंट सिनेमा — भारतीय फिल्म इंडस्ट्री की रचनात्मक आत्मा
राव ने आगे कहा:
“इंडिपेंडेंट सिनेमा भारतीय फिल्म इंडस्ट्री की रचनात्मक आत्मा है। अगर हम चाहते हैं कि विविधता भरी कहानियां कही जाएं, तो दर्शकों को भी इन्हें देखने और समर्थन देने की आदत डालनी होगी।”
उनका मानना है कि इंडिपेंडेंट फिल्मों की सबसे बड़ी चुनौती सही मंच तक उनकी पहुंच है।
“फिल्में बन जाती हैं, लेकिन उन्हें थिएटर स्क्रीन या प्रमुख प्लेटफॉर्म्स पर जगह दिलाना आज भी मुश्किल है।”
💡 दर्शकों की जिम्मेदारी भी जरूरी
किरण राव का यह संदेश साफ है: इंडिपेंडेंट सिनेमा को बचाने और बढ़ावा देने के लिए दर्शकों का सहयोग बेहद जरूरी है। उनके अनुसार, डिजिटल युग में भी थिएटर का जादू और अनुभव अलग ही मायने रखता है, और नई कहानियों को देखना और समर्थन करना हर फिल्म प्रेमी की जिम्मेदारी बनता है।
🗓️ संवाददाता: Digital Live Entertainment Desk, मुंबई
प्रकाशन तिथि: 6 नवंबर 2025