“AI से आईटी सेक्टर में छंटनी की लहर”

Report By: Kiran Prakash Singh

AI की दस्तक से बदल रहा है IT सेक्टर: अमेरिका से भारत तक छंटनी की लहर

📍 नई दिल्ली / बेंगलुरु —(digitallivenews) |
कभी जिस आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) को टेक्नोलॉजी की अगली क्रांति कहा जा रहा था, अब वही क्रांति हजारों आईटी प्रोफेशनल्स की नौकरियों पर संकट बनकर मंडरा रही है। अमेरिका की बड़ी टेक कंपनियों के बाद अब भारत की टॉप आईटी कंपनियों — जैसे कि TCS, इन्फोसिस, और विप्रो — में भी “साइलेंट लेऑफ” यानी चुपचाप छंटनी का दौर शुरू हो चुका है।


🔁 री-स्ट्रक्चरिंग के नाम पर छंटनी का खेल

AI की वजह से अब सालों का काम हफ्तों और कभी-कभी दिनों में पूरा हो रहा है। इससे कंपनियों की लागत में भारी कटौती हो रही है, लेकिन इसकी सबसे बड़ी कीमत चुका रहे हैं वो इंजीनियर्स जिन्होंने इन कंपनियों में 5, 10 या उससे भी ज्यादा साल दिए हैं।

  • 10 साल से अधिक सेवा वाले कर्मचारियों को अब स्वैच्छिक इस्तीफ़ा देने और बदले में 18 महीने की सैलरी लेने का ऑफर दिया जा रहा है।

  • वहीं, 10 साल से कम अनुभव वालों को सीधे 3 महीने का वेतन देकर बाहर किया जा रहा है

  • इस पूरे प्रोसेस को कंपनियां “सॉफ्ट एग्ज़िट” का नाम दे रही हैं।


🎯 TCS में एआई स्किल्स अनिवार्य

देश की सबसे बड़ी आईटी कंपनी TCS ने अपने सभी इंजीनियरों को AI ट्रेनिंग देने की पहल शुरू की है। लेकिन यहाँ भी एक कड़ा नियम है:

  • ट्रेनिंग में फेल होने वाले कर्मचारियों को बेंच पर डाल दिया जाता है, यानी उन्हें कोई प्रोजेक्ट नहीं दिया जाता।

  • यदि वे नए AI-फोकस्ड इंटरव्यू पास नहीं कर पाते, तो उन्हें खुद इस्तीफा देने के लिए कहा जाता है।

हालांकि कंपनी दावा कर रही है कि वह 18,000 नए एआई-स्किल्ड प्रोफेशनल्स को भर्ती कर रही है, लेकिन सूत्रों की मानें तो पिछले कुछ महीनों में 20,000 से अधिक इंजीनियर्स को बाहर निकाला जा चुका है।


📉 बेंगलुरु, पुणे और चेन्नई में असर दिखने लगा

विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले 2 वर्षों में यह लहर और तेज़ होगी। खासकर टेक्नोलॉजी हब जैसे कि:

  • बेंगलुरु

  • पुणे

  • चेन्नई

यह शहर बड़े पैमाने पर छंटनी से प्रभावित हो सकते हैं, जिसका असर सिर्फ आईटी इंडस्ट्री पर नहीं बल्कि:

  • रियल एस्टेट

  • लोकल बिज़नेस

  • और सर्विस सेक्टर

पर भी पड़ सकता है।


🚀 आने वाला समय किसका होगा?

अब कंपनियाँ केवल अनुभव नहीं, बल्कि एआई को अपनाने की क्षमता को देख रही हैं। यानी जो इंजीनियर्स AI टूल्स, ऑटोमेशन, डेटा एनालिटिक्स जैसे स्किल्स में माहिर होंगे, वही भविष्य में इस इंडस्ट्री में टिक पाएंगे।


निष्कर्ष: बदलाव अपरिहार्य है

AI अब केवल एक तकनीक नहीं, बल्कि एक सर्वाइवल स्किल बन चुकी है। जो वक्त के साथ नहीं बदलेगा, वह पीछे छूट जाएगा।


✍️ लेखक: [आपका नाम]
📅 प्रकाशित: 13 अक्टूबर 2025
📌 श्रेणी: टेक न्यूज़ | रोजगार | आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस


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