
Report By: Kiran Prakash Singh
पुडुचेरी का मनकुला विनायागर मंदिर बना अंतरराष्ट्रीय आस्था का केंद्र, ब्रह्मोत्सव में जुटे देश-विदेश के श्रद्धालु
📍 नई दिल्ली | पुडुचेरी
🗓️ 01 सितंबर 2025
✍️ Digital Live News Desk
मुख्य आकर्षण:
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भव्य ब्रह्मोत्सव में उमड़े हजारों श्रद्धालु
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गणेश चतुर्थी से विजयादशमी तक चलता है 24 दिन लंबा उत्सव
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58 अनूठी गणेश मूर्तियों का संग्रह, मंदिर को दिलाता है सांस्कृतिक धरोहर का दर्जा
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वियतनाम, सिंगापुर, नेपाल जैसे देशों से भी पहुंच रहे विदेशी भक्त
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7.5 किलो सोने से जड़ा रथ, विजयादशमी पर होता है नगर भ्रमण
मनकुला विनायागर मंदिर: भक्ति, कला और विरासत का संगम
पुडुचेरी स्थित मनकुला विनायागर मंदिर आज न केवल भारत बल्कि विदेशों में बसे भक्तों के लिए भी आस्था और संस्कृति का प्रमुख केंद्र बन गया है।
इन दिनों यहां चल रहे सालाना ब्रह्मोत्सव ने इस मंदिर को अंतरराष्ट्रीय श्रद्धालुओं की नजर में ला दिया है।
यह उत्सव हर वर्ष गणेश चतुर्थी से शुरू होकर विजयादशमी तक चलता है और इसकी अवधि 24 दिन होती है।
इस दौरान वियतनाम, इंडोनेशिया, सिंगापुर, नेपाल जैसे देशों से भी बड़ी संख्या में भक्त यहां दर्शन के लिए आते हैं।
58 विशेष मूर्तियां: कला और आध्यात्म का अद्भुत मेल
मंदिर की सबसे खास बात है – भगवान गणेश की 58 विशिष्ट मूर्तियां, जिन्हें देश के प्रसिद्ध चित्रकारों ने सजाया है।
इन मूर्तियों में:
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भगवान गणेश के जीवन से जुड़े प्रसंग
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विभिन्न मुद्राओं और भावों की कलात्मक प्रस्तुति
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ऐतिहासिक और पौराणिक कथाओं का चित्रण
ये सब मिलकर मंदिर को एक सांस्कृतिक संग्रहालय जैसा अनुभव देते हैं।
500 साल पुराना इतिहास, फ्रांसीसी डायरी में उल्लेख
इतिहासकारों के अनुसार, इस मंदिर का दस्तावेजी इतिहास लगभग 500 वर्ष पुराना है।
फ्रेंच शासन के दौरान प्रसिद्ध व्यापारी आनंद रंग पिल्लई की डायरी में भी इसका उल्लेख मिलता है।
स्थानीय समाजसेवी हरिहरन के अनुसार, यह मंदिर न केवल तमिल समुदाय बल्कि फ्रेंच नागरिकों के बीच भी आस्था का केंद्र बन चुका है।
विदेशी श्रद्धालुओं की सहभागिता और आस्था
आज यह मंदिर भारत से बाहर बसे तमिल मूल के लोगों के लिए भी भक्ति का केंद्र बन गया है।
वहां से आने वाले श्रद्धालु अक्सर:
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पारिवारिक अनुष्ठान करवाते हैं
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मनोकामना पूर्ति के लिए विशेष पूजा करते हैं
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ब्रह्मोत्सव के आयोजनों में सक्रिय रूप से भाग लेते हैं
ब्रह्मोत्सव की भव्यता: स्वर्ण प्रतिमा और रथ यात्रा
मंदिर की सबसे बड़ी धरोहर है भगवान विनायागर की स्वर्ण मंडित प्रतिमा, जिसे हर वर्ष विजयादशमी पर विशेष रथ पर नगर भ्रमण के लिए ले जाया जाता है।
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रथ की ऊंचाई: 10 फीट
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सोने की मात्रा: लगभग 7.5 किलोग्राम
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आकर्षण: हजारों की भीड़, भक्ति गीत, ढोल-नगाड़े, पुष्पवर्षा
यह यात्रा मंदिर के परंपरा, गौरव और धार्मिक आस्था को जीवंत कर देती है।
हर गुरुवार को भक्तों की भीड़
मंदिर प्रशासन के सीईओ पननीयन के अनुसार, हर गुरुवार को मंदिर में दूर-दराज से श्रद्धालु दर्शन के लिए आते हैं।
पूरे ब्रह्मोत्सव के दौरान यहां का वातावरण पूरी तरह धार्मिक ऊर्जा और सांस्कृतिक भव्यता से भर जाता है।
✨ निष्कर्ष:
मनकुला विनायागर मंदिर न केवल दक्षिण भारत का एक प्रसिद्ध तीर्थस्थल है, बल्कि यह भारतीय संस्कृति और धर्म की अंतरराष्ट्रीय पहचान बन चुका है।
हर वर्ष यहां होने वाला ब्रह्मोत्सव भक्ति, कला और परंपरा का जीवंत उदाहरण है।