
Report By: Kiran Prakash Singh
प्रयागराज,(digitallivenews)13/09/2025|
यह खबर दिल दहला देने वाली और कई स्तरों पर सोचने पर मजबूर करने वाली है। इसमें एक व्यक्ति की गहरी मानसिक पीड़ा, समाज की अनभिज्ञता और हमारे स्वास्थ्य तंत्र की खामियों की झलक साफ़ तौर पर दिखती है। आइए इस पूरे मामले को संवेदनशीलता और समझदारी से टुकड़ों में समझें:
IAS बनने भेजा था बेटा, लेकिन खुद ही कर लिया सेक्स चेंज ऑपरेशन, प्रयागराज से आया हैरान कर देने वाला मामला:
अमेठी से प्रयागराज पढ़ाई और प्रतियोगी परीक्षा की तैयारी के लिए भेजे गए युवक ने ऐसा कदम उठाया, जिससे घरवाले और डॉक्टर तक हैरान रह गए। सिविल लाइंस क्षेत्र में किराए पर कमरा लेकर रह रहे युवक ने खुद ही अपना प्राइवेट पार्ट काट लिया। युवक लड़की बनना चाहता था और एक झोलाछाप के परामर्श पर उसने दर्द निवारक इंजेक्शन लगाने के बाद खुद पर ही ऑपरेशन कर डाला। ऑपरेशन के बाद दर्द असहनीय होने पर युवक चिल्लाने लगा। मकान मालिक ने उसकी हालत देख तुरंत उसे बेली अस्पताल पहुंचाया। वहां से गंभीर स्थिति होने पर स्वरूप रानी नेहरू (एसआरएन) अस्पताल रेफर कर दिया गया। फिलहाल युवक की हालत नाजुक बनी हुई है।
हाईस्कूल से ही लड़की बनने की इच्छा:
एसआरएन अस्पताल के डॉक्टर संतोष के मुताबिक, युवक ने बताया कि जब वह हाईस्कूल में पढ़ता था तभी से उसके अंदर लड़की बनने की इच्छा जागी थी। वह लगातार इंटरनेट पर सेक्स चेंज से जुड़ी जानकारी देखता था। इसी दौरान उसने एक झोलाछाप चिकित्सक से सलाह ली। चिकित्सक ने उसे खुद ही ऑपरेशन करने की सलाह दी।
खुद किया ऑपरेशन, फिर बिगड़ी हालत:
युवक ने सुन्न करने वाला इंजेक्शन लगाकर प्राइवेट पार्ट काट दिया और खुद ही मरहम पट्टी भी कर ली। लेकिन दर्द बढ़ने पर वह तड़पने लगा। उसके चिल्लाने पर मकान मालिक कमरे में पहुंचा और पूरा माजरा देखकर दंग रह गया।
परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल:
युवक अमेठी के एक किसान का इकलौता बेटा है। परिजन उसे IAS बनाने का सपना देख रहे थे और इसी उद्देश्य से प्रयागराज भेजा था। लेकिन युवक की हरकत ने घरवालों को सकते में डाल दिया। अस्पताल पहुंचे परिजन रोते हुए कहते रहे कि “IAS बनाने भेजा था, लेकिन सब कुछ बर्बाद हो गया।”
जेंडर आइडेंटिटी डिसऑर्डर का है मामला:
डॉ. संतोष ने कहा कि यह जेंडर आइडेंटिटी डिसऑर्डर का मामला है, जहां व्यक्ति को अपने जन्म से मिले शरीर से नफरत होने लगती है। वहीं एसआरएन चौकी इंचार्ज आनंद सिंह ने बताया कि मामला संज्ञान में है, लेकिन अभी तक किसी ने तहरीर नहीं दी है।
🧠 जेंडर आइडेंटिटी डिसऑर्डर या ट्रांसजेंडर पहचान
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युवक ने बताया कि हाईस्कूल से ही वह खुद को लड़की महसूस करता था — यह जेंडर डिस्फोरिया (Gender Dysphoria) का संकेत है।
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यह कोई बीमारी नहीं, बल्कि एक मानसिक स्थिति है जिसमें व्यक्ति की मानसिक पहचान उसके जैविक लिंग से मेल नहीं खाती।
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दुर्भाग्यवश, भारत में अभी भी ट्रांसजेंडर लोगों को समाजिक तौर पर बहुत कम स्वीकृति मिलती है, जिससे वे कई बार गुप्त रूप से या खतरनाक तरीके से कदम उठा लेते हैं।
⚠️ खतरनाक आत्म-ऑपरेशन
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युवक ने इंटरनेट और एक झोलाछाप डॉक्टर की सलाह पर खुद पर सर्जरी की, जो अत्यंत खतरनाक और जानलेवा साबित हो सकता था।
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यह दर्शाता है कि वह कितना अकेला, हताश और असहाय महसूस कर रहा था, कि उसने इतना बड़ा कदम बिना किसी प्रोफेशनल मेडिकल सहायता के उठाया।
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यह हमारे हेल्थ सिस्टम और मानसिक स्वास्थ्य सपोर्ट की कमी को उजागर करता है।
👪 परिवार की स्थिति
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युवक के माता-पिता उसे IAS बनाना चाहते थे, लेकिन उन्हें शायद उसके जेंडर संघर्ष के बारे में कोई जानकारी नहीं थी।
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यह दर्शाता है कि संवाद की कमी और जबरदस्ती की उम्मीदें कितनी खतरनाक हो सकती हैं।
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परिजनों की प्रतिक्रिया (“सब कुछ बर्बाद हो गया”) यह भी दिखाती है कि अभी जेंडर पहचान को लेकर सामाजिक समझ और सहानुभूति कितनी सीमित है।
🏥 समाज और सिस्टम की विफलता
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यदि स्कूल, परिवार या समाज में कहीं उसे सही समय पर काउंसलिंग और समर्थन मिलता, तो यह स्थिति टाली जा सकती थी।
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झोलाछाप डॉक्टर का इस मामले में शामिल होना कानूनी और नैतिक रूप से बेहद गंभीर मामला है।
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सेक्स चेंज एक अत्यंत संवेदनशील और जटिल मेडिकल प्रक्रिया है, जिसे प्रोफेशनल डॉक्टर, साइकोलॉजिस्ट, एंडोक्राइनोलॉजिस्ट की देखरेख में किया जाना चाहिए।
📝 निष्कर्ष / सबक
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जेंडर पहचान को समझने और स्वीकार करने की ज़रूरत है।
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मानसिक स्वास्थ्य को प्राथमिकता देनी चाहिए।
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संवाद, सहानुभूति और सही मेडिकल सहायता से जीवन बच सकता है।
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ऐसे मामलों में मीडिया को भी संवेदनशीलता बरतनी चाहिए, ताकि व्यक्ति की पहचान और मानसिक स्थिति को नुकसान न पहुँचे।