
Report By: Kiran Prakash Singh
⚠️ ज़हरीले कफ सिरप से बच्चों की मौत, WHO की चेतावनी से देश में मचा हड़कंप
3 कंपनियों के सिरप में मिला जानलेवा ज़हर, WHO ने जारी की ग्लोबल हेल्थ अलर्ट
नई दिल्ली (Digitalive News) – भारत में बच्चों के लिए इस्तेमाल किए जाने वाले कुछ कफ सिरप से जुड़ी एक गंभीर और चिंताजनक जानकारी सामने आई है। देश के कई राज्यों से ऐसी खबरें आई हैं कि जहरीले कफ सिरप के कारण दो दर्जन से अधिक बच्चों की मौतें हो चुकी हैं। इस पर विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) ने चेतावनी जारी करते हुए तीन भारतीय सिरप ब्रांड्स को लेकर अंतरराष्ट्रीय अलर्ट जारी किया है।
इस घटनाक्रम ने पूरे देश के स्वास्थ्य तंत्र और औषधि नियामकों को सतर्क कर दिया है।
🧪 कौन-कौन से सिरप हैं खतरे में?
WHO की जांच में जिन तीन कफ सिरपों को जहरीला पाया गया है, वे निम्नलिखित हैं:
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कोल्ड्रिफ सिरप – निर्माता: श्रीसन फार्मा, तमिलनाडु
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रेस्पिफ्रेश टीआर सिरप – निर्माता: रेडनेक्स फार्मा, गुजरात
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रिलाइफ सिरप – निर्माता: शेप फार्मा, गुजरात
इन सभी सिरपों के कुछ विशेष बैच ऐसे पाए गए हैं जिनमें डायथिलीन ग्लाइकोल (Diethylene Glycol – DEG) की मात्रा बेहद खतरनाक स्तर तक पाई गई है।
🧬 DEG: एक ज़हरीला रसायन
डायथिलीन ग्लाइकोल (DEG) एक रंगहीन, गंधहीन रसायन होता है जिसे कभी-कभी दवाओं में मीठा स्वाद लाने के लिए इस्तेमाल किया जाता है, लेकिन यह मानव शरीर के लिए अत्यंत विषैला होता है। इसका सेवन करने पर यह किडनी फेलियर, ब्रेन डैमेज, और यहां तक कि मौत का कारण बन सकता है।
WHO के मुताबिक DEG की अधिकतम स्वीकार्य सीमा: 0.1%
लेकिन जांच में मिला:
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कोल्ड्रिफ सिरप में DEG की मात्रा: 48.6%
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रेस्पिफ्रेश टीआर में: 1.342%
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रिलाइफ सिरप में: 0.616%
यह सीमा WHO और भारत सरकार द्वारा निर्धारित सुरक्षित मानक से कई गुना अधिक है।
🧒 मौत का कारण: बच्चों को दिया गया जहरीला सिरप
WHO के अनुसार, इन सिरपों के सेवन से मध्य प्रदेश के छिंदवाड़ा, और अन्य राज्यों में कई बच्चों की मौत हो चुकी है। यह एक मानव निर्मित त्रासदी है जिसे रोका जा सकता था।
WHO ने अपने अलर्ट में कहा:
“यदि किसी देश, राज्य या चिकित्सा संस्थान में यह सिरप पाया जाए, तो तुरंत हेल्थ अथॉरिटी को सूचित किया जाए।”
🛑 भारत सरकार की कार्रवाई
इस खतरनाक खुलासे के बाद भारत सरकार के केंद्रीय औषधि मानक नियंत्रण संगठन (CDSCO) ने तत्काल प्रभाव से तीनों कफ सिरप को बैन कर दिया है। इसके साथ ही:
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सभी मेडिकल स्टोर्स से सिरप वापस मंगवाने का आदेश
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निर्माता कंपनियों को उत्पादन रोकने के निर्देश
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राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों को एडवाइजरी जारी
सरकार ने डॉक्टरों को भी निर्देश दिया है कि:
“कोई भी खांसी का सिरप, जो सामान्यतः 5 साल तक के बच्चों के लिए प्रिस्क्राइब नहीं किया जाता, 2 साल से कम उम्र के बच्चों को न दिया जाए।”
🌍 अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारत की छवि को झटका
यह कोई पहली घटना नहीं है। इससे पहले भी भारत में बनी दवाओं को लेकर अंतरराष्ट्रीय मंच पर सवाल उठते रहे हैं। WHO की यह चेतावनी न केवल भारत की फार्मा इंडस्ट्री की साख पर सवाल उठाती है, बल्कि बच्चों के जीवन से खिलवाड़ को भी उजागर करती है।
🔍 निर्माताओं की जिम्मेदारी और नियामकों की जवाबदेही
सवाल यह भी उठ रहा है कि:
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इतने खतरनाक स्तर पर DEG की मौजूदगी परीक्षणों में कैसे नहीं पकड़ी गई?
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क्या फार्मा कंपनियों द्वारा सेफ्टी टेस्ट को नजरअंदाज किया गया?
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क्या मुनाफा कमाने की लालसा में जानबूझकर लापरवाही बरती गई?
ये सभी सवाल अब सरकारी एजेंसियों की जांच के दायरे में हैं।
👨⚕️ माता-पिता और डॉक्टरों के लिए जरूरी चेतावनी
WHO और भारत सरकार दोनों ने माता-पिता, डॉक्टरों और फार्मासिस्टों से अपील की है कि:
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सिरप खरीदने से पहले उसका निर्माता और बैच नंबर जांचें
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यदि किसी भी सिरप में असामान्य लक्षण दिखें तो तुरंत चिकित्सा सलाह लें
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जांच के बिना किसी भी सिरप को छोटे बच्चों को न दें
🧾 निष्कर्ष: बच्चों की जान से खिलवाड़ नहीं
यह घटना देश के स्वास्थ्य तंत्र के लिए एक जागरण की घंटी है। जब तक सख्त नियमन, गुणवत्ता परीक्षण और जवाबदेही नहीं होगी, तब तक इस तरह की घटनाएं दोहराई जाती रहेंगी।
देश को एक ऐसे फार्मा रेगुलेशन सिस्टम की जरूरत है जो सिर्फ कागज़ों तक सीमित न हो, बल्कि हर दवा की वास्तविक गुणवत्ता और सुरक्षा सुनिश्चित करे।
🖊️ रिपोर्ट: Digitalive News | संपादन: हेल्थ डेस्क टीम
🩺 बच्चों की दवाओं को लेकर सावधानी बरतें, जागरूक रहें, और लापरवाही की सूचना तुरंत स्वास्थ्य विभाग को दें।