लाठीचार्ज से आंसू गैस तक, पुलिस कब क्या एक्शन ले सकती है?

Report By: Kiran Prakash Singh

CJP के जंतर-मंतर प्रदर्शन के बीच जानिए पुलिस किन परिस्थितियों में चेतावनी, बैरिकेडिंग, वॉटर कैनन, आंसू गैस और लाठीचार्ज का इस्तेमाल कर सकती है। समझिए कानून और कम से कम बल प्रयोग का सिद्धांत।

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जंतर-मंतर प्रदर्शन के बीच चर्चा में पुलिस की कार्रवाई, जानिए क्या हैं नियम

Digital Live News | 10 अक्टूबर 2026 | digitallivenews.com

दिल्ली के जंतर-मंतर पर कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के प्रस्तावित विरोध प्रदर्शन के बीच पुलिस की कार्रवाई और भीड़ नियंत्रण के कानूनी नियम चर्चा में हैं। पार्टी मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे और मतदाता सूची की विशेष गहन पुनरीक्षण यानी SIR प्रक्रिया को लेकर प्रदर्शन करना चाहती थी। इसी बीच CJP के संस्थापक अभिजीत दिपके और नेताओं सौरव दास व आशुतोष रांका को दिल्ली एयरपोर्ट पर हिरासत में लिए जाने की खबर सामने आई। दिल्ली पुलिस ने प्रदर्शन की अनुमति नहीं दी थी।

ऐसे मामलों में सवाल उठता है कि पुलिस भीड़ को नियंत्रित करने के लिए कौन-कौन से कदम उठा सकती है? क्या वह सीधे लाठीचार्ज या आंसू गैस का इस्तेमाल कर सकती है? कानून के मुताबिक, इसका जवाब परिस्थितियों, खतरे की गंभीरता और लागू नियमों पर निर्भर करता है।

1. सबसे पहले चेतावनी और बातचीत का विकल्प

भीड़ को नियंत्रित करने के लिए पुलिस का पहला कदम बातचीत, चेतावनी और स्थिति को शांत करने का प्रयास हो सकता है। अधिकारी लाउडस्पीकर के जरिए लोगों को निर्देश दे सकते हैं और कानूनी आदेश लागू होने पर जमावड़े को तितर-बितर होने के लिए कह सकते हैं।

संवेदनशील स्थानों की सुरक्षा और आवाजाही नियंत्रित करने के लिए बैरिकेडिंग भी की जा सकती है। हालांकि, केवल किसी प्रदर्शन के असुविधाजनक होने या सरकार की आलोचना किए जाने से बल प्रयोग अपने-आप उचित नहीं हो जाता।

2. गैरकानूनी जमावड़े पर क्या कहता है कानून?

भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS), 2023 की धारा 148 गैरकानूनी जमावड़े को नागरिक बल की सहायता से तितर-बितर करने से संबंधित है। वहीं धारा 163 कुछ परिस्थितियों में तत्काल निवारक आदेश जारी करने का प्रावधान करती है, जब मानव जीवन, सुरक्षा या सार्वजनिक शांति को खतरा होने की आशंका हो।

इन प्रावधानों का इस्तेमाल संबंधित कानूनी शर्तों के अधीन किया जाता है। किसी सभा पर प्रतिबंध या पुलिस का आदेश होने की स्थिति में भी कार्रवाई का आधार और उसका तरीका लागू कानून के अनुरूप होना चाहिए।

3. वॉटर कैनन और आंसू गैस का इस्तेमाल कब?

अगर भीड़ को शांतिपूर्वक हटाने के प्रयास सफल नहीं होते और हालात बिगड़ने का खतरा होता है, तो पुलिस परिस्थितियों के अनुसार अतिरिक्त उपायों पर विचार कर सकती है। इनमें वॉटर कैनन और आंसू गैस जैसे साधन शामिल हो सकते हैं।

लेकिन इन उपायों को पूरी तरह सुरक्षित नहीं माना जा सकता। इनसे भी चोट या स्वास्थ्य संबंधी परेशानी हो सकती है। इसलिए पुलिस को आसपास मौजूद लोगों, बच्चों, बुजुर्गों और ऐसे व्यक्तियों के जोखिम पर ध्यान देना चाहिए, जिन्हें वहां से निकलने में कठिनाई हो सकती है।

किसी उपाय का इस्तेमाल केवल इसलिए उचित नहीं हो जाता कि भीड़ बड़ी है। उसकी आवश्यकता, संभावित नुकसान और उपलब्ध दूसरे विकल्पों पर भी विचार करना जरूरी है।

4. पुलिस लाठीचार्ज कब कर सकती है?

लाठीचार्ज एक गंभीर बल प्रयोग है, जिसे प्रदर्शनकारियों को सजा देने के साधन के रूप में इस्तेमाल नहीं किया जाना चाहिए। हालात में हिंसा या लोगों की सुरक्षा के लिए गंभीर खतरा पैदा होने पर पुलिस लागू कानून और निर्धारित प्रक्रियाओं के अनुसार बल प्रयोग पर विचार कर सकती है।

ऐसी कार्रवाई में बल की मात्रा परिस्थिति के अनुरूप होनी चाहिए। अधिकारियों को अनावश्यक या अत्यधिक बल से बचना चाहिए और स्थिति नियंत्रण में आने पर बल प्रयोग रोक देना चाहिए। साथ ही, लोगों को सुरक्षित तरीके से वहां से निकलने का अवसर देना भी महत्वपूर्ण है।

5. रबर की गोलियों और असली गोली के इस्तेमाल पर क्या नियम हैं?

किसी भी प्रकार के कम घातक हथियार को जोखिम-मुक्त नहीं माना जा सकता। इनके इस्तेमाल से गंभीर चोट लगने की आशंका रहती है। इसलिए इनका प्रयोग केवल लागू कानूनी प्रावधानों, अधिकृत प्रक्रियाओं और परिस्थितियों के अनुरूप ही किया जा सकता है।

असली गोली चलाना बल प्रयोग का अत्यंत गंभीर रूप है। इसे सामान्य भीड़ नियंत्रण का विकल्प नहीं माना जा सकता। ऐसी स्थिति में जीवन की रक्षा, खतरे की गंभीरता और लागू कानूनी शर्तों का विशेष महत्व होता है। हवा में गोली चलाने या किसी खास हिस्से को निशाना बनाने से नुकसान न होने की गारंटी नहीं दी जा सकती।

क्या है कम से कम बल प्रयोग का सिद्धांत?

पुलिस कार्रवाई में आवश्यकता, आनुपातिकता और न्यूनतम बल के सिद्धांत महत्वपूर्ण हैं। इसका अर्थ है कि कार्रवाई वास्तविक खतरे के अनुरूप होनी चाहिए और उद्देश्य पूरा करने के लिए जितना बल आवश्यक हो, उससे अधिक का इस्तेमाल नहीं किया जाना चाहिए।

जंतर-मंतर पर CJP के प्रस्तावित प्रदर्शन के दौरान सुरक्षा व्यवस्था और हिरासत की कार्रवाई ने विरोध प्रदर्शन के अधिकार तथा कानून-व्यवस्था बनाए रखने की जिम्मेदारी पर चर्चा को फिर सामने ला दिया है। किसी विशेष कार्रवाई की वैधता का आकलन उसके वास्तविक तथ्यों, पुलिस के आदेशों और लागू कानून के आधार पर ही किया जा सकता है।

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