
Report By: Kiran Prakash Singh
थिएटर से सिनेमा तक: कैसे बना ‘फिर हेरा फेरी’ का आइकॉनिक कचरा सेठ
जानिए कैसे थिएटर से निकलकर मनोज जोशी बने ‘फिर हेरा फेरी’ के आइकॉनिक कचरा सेठ और क्यों यह किरदार आज भी दर्शकों के दिलों में जिंदा है।
मुंबई (Digital Live News):
साल 2006 में रिलीज़ हुई सुपरहिट कॉमेडी फिल्म ‘फिर हेरा फेरी’ ने कई यादगार किरदार दिए, लेकिन उनमें सबसे अलग और आज भी दर्शकों के दिलों में जिंदा है मनोज जोशी का कचरा सेठ। उनके बोले गए हर डायलॉग और हाव-भाव ने इस किरदार को देखते ही देखते आइकॉनिक बना दिया।
हालांकि बहुत कम लोग जानते हैं कि कचरा सेठ अचानक पर्दे पर नहीं आया, बल्कि इसकी नींव थिएटर में रखी गई थी। फिल्म मिलने से पहले मनोज जोशी एक नाटक कर रहे थे, जिसे देखने पहुंचे उनके करीबी दोस्त और मशहूर लेखक-निर्देशक नीरज वोरा। मंच पर मनोज की लंबी कद-काठी, अनोखा बोलने का अंदाज़ और जबरदस्त कॉमिक टाइमिंग ने नीरज वोरा को इतना प्रभावित किया कि उन्होंने उसी झलक को बड़े पर्दे पर उतारने का फैसला कर लिया।
फिल्म के लिए मनोज जोशी के लुक में कुछ बदलाव जरूर किए गए। उन्हें अलग तरह का चश्मा पहनाया गया, दांतों का लुक बदला गया और कुर्ता-पजामा पहनाकर किरदार को और मज़बूत बनाया गया। लेकिन उनका बोलने का लहजा और एक्सप्रेशन वही रखा गया, जो उन्होंने थिएटर के दौरान अपनाया था। यही वजह रही कि कचरा सेठ का किरदार बेहद नैचुरल लगा और दर्शकों से तुरंत जुड़ गया।
मनोज जोशी खुद कई इंटरव्यू में यह स्वीकार कर चुके हैं कि 2006 से 2024 तक कचरा सेठ उनके करियर की सबसे बड़ी पहचान बन गया। आज भी सोशल मीडिया पर इस किरदार के मीम्स देखकर उन्हें हैरानी के साथ खुशी भी होती है।
हालांकि मनोज जोशी का सफर सिर्फ कॉमेडी तक सीमित नहीं रहा। मराठी, गुजराती और हिंदी थिएटर से शुरुआत करने वाले इस कलाकार ने गंभीर और ऐतिहासिक भूमिकाओं में भी अपनी गहरी छाप छोड़ी है। टीवी सीरियल ‘एक महल हो सपनों का’ में अभिषेक पुरुषोत्तम नानावटी, ‘चक्रवर्ती सम्राट अशोक’ में चाणक्य और पुराने सीरियल ‘चाणक्य’ में मंत्री श्रीयाक जैसे किरदारों के जरिए उन्होंने अपने अभिनय का गंभीर पक्ष भी दर्शाया।
हिंदी सिनेमा में उन्हें असली पहचान फिल्म ‘हंगामा’ से मिली। इसके बाद ‘हलचल’, ‘धूम’, ‘भागम भाग’, ‘चुप चुप के’, ‘भूल भुलैया’ और ‘बिल्लो बार्बर’ जैसी फिल्मों में उनकी कॉमिक टाइमिंग ने दर्शकों को खूब हंसाया।
अब मनोज जोशी अपने करियर में एक नया और आध्यात्मिक मोड़ लेने जा रहे हैं। वह नीम करौली बाबा पर आधारित एक फिल्म की तैयारी कर रहे हैं, जो उनके अभिनय सफर का एक और दिलचस्प अध्याय साबित हो सकती है।
कचरा सेठ जैसे कॉमिक रोल से लेकर चाणक्य जैसे ऐतिहासिक किरदारों तक, मनोज जोशी उन कलाकारों में शामिल हैं जिन्होंने सीमित स्क्रीन टाइम में भी अमिट छाप छोड़ी है। यही वजह है कि उनके निभाए किरदार आज भी दर्शकों की यादों और सोशल मीडिया मीम्स में पूरी तरह जिंदा हैं।