
🔍 लालू यादव, राबड़ी देवी और तेजस्वी पर तय हुए आरोप, अब चलेगा केस – आईआरसीटीसी घोटाले में अगला अध्याय शुरू
📍 नई दिल्ली (digitallivenews) —
बिहार की राजनीति में एक बार फिर बड़ा मोड़ आया है। राष्ट्रीय जनता दल (राजद) के प्रमुख और बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री लालू प्रसाद यादव, पूर्व मुख्यमंत्री राबड़ी देवी, और नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव की मुश्किलें बढ़ गई हैं।
आईआरसीटीसी घोटाले और ‘लैंड फॉर जॉब’ केस में दिल्ली की राउज एवेन्यू स्थित विशेष सीबीआई अदालत ने सोमवार को इन तीनों नेताओं के खिलाफ आरोप तय कर दिए हैं। इसका मतलब है कि अब मामले की नियमित सुनवाई शुरू होगी।
⚖️ क्या कहा कोर्ट ने?
विशेष न्यायाधीश विशाल गोगने की अदालत ने स्पष्ट रूप से कहा कि लालू प्रसाद यादव ने केंद्रीय रेल मंत्री के रूप में अपने पद का दुरुपयोग किया।
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टेंडर प्रक्रिया में जानबूझकर बदलाव कराया गया ताकि कुछ खास कंपनियों को फायदा हो सके।
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इसके बदले में कीमती जमीनें राबड़ी देवी और तेजस्वी यादव के नाम पर ट्रांसफर कराई गईं।
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अदालत ने माना कि यह सब कुछ सुनियोजित साजिश के तहत किया गया।
कोर्ट ने इन नेताओं के खिलाफ भारतीय दंड संहिता की धारा 120बी (आपराधिक साजिश), 420 (धोखाधड़ी) और भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम, 1988 की धाराओं के तहत आरोप तय किए हैं।
🧾 चार्जशीट में क्या है?
इस केस में सीबीआई ने चार्जशीट दायर की थी, जिसमें आरोप लगाया गया था कि:
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जब लालू यादव रेल मंत्री थे, उस समय रांची और पुरी के बीएनआर होटल्स के टेंडर में गड़बड़ियां की गईं।
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इन गड़बड़ियों के बदले में पटना में कीमती जमीनें यादव परिवार के नाम कराई गईं।
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यह सौदा सरकारी पद के दुरुपयोग के तहत आता है, जो स्पष्ट रूप से भ्रष्टाचार का मामला बनता है।
अदालत ने इससे पहले 25 अगस्त को आरोप तय करने का निर्णय सुरक्षित रख लिया था, जिसे अब सार्वजनिक कर दिया गया है।
👩⚖️ कोर्ट में कैसे पेश हुए आरोपी?
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लालू प्रसाद यादव व्हीलचेयर पर कोर्ट पहुंचे।
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राबड़ी देवी और तेजस्वी यादव भी व्यक्तिगत रूप से अदालत में उपस्थित हुए।
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तीनों से जब कोर्ट ने पूछा कि क्या वे आरोप स्वीकार करते हैं, तो उनका जवाब था — “हम निर्दोष हैं।”
🗳️ राजनीतिक भूचाल की आहट
यह मामला ऐसे समय में सामने आया है जब:
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बिहार में आगामी विधानसभा चुनाव की चर्चा शुरू हो चुकी है।
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तेजस्वी यादव खुद को अगले मुख्यमंत्री के चेहरे के रूप में पेश कर रहे हैं।
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विपक्ष लगातार केंद्र सरकार पर राजनीतिक बदले की भावना से कार्रवाई करने का आरोप लगा रहा है।
राजद और महागठबंधन के अन्य नेता इसे राजनीतिक साजिश बता रहे हैं, जबकि सीबीआई इसे दस्तावेजों और गवाहों पर आधारित निष्पक्ष जांच कह रही है।
🧭 आगे क्या होगा?
अब जब कोर्ट ने आरोप तय कर दिए हैं, तो:
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केस की नियमित सुनवाई शुरू होगी।
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अभियोजन पक्ष और बचाव पक्ष दोनों अपने-अपने तर्क पेश करेंगे।
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यदि आरोप सिद्ध होते हैं, तो लालू यादव परिवार को कानूनी सज़ा का सामना करना पड़ सकता है, जो उनके राजनीतिक भविष्य को प्रभावित कर सकता है।
✍️ निष्कर्ष: भ्रष्टाचार बनाम राजनीति
लालू यादव के खिलाफ यह पहला मामला नहीं है — इससे पहले भी वे चारा घोटाले में दोषी करार दिए जा चुके हैं।
लेकिन इस बार मामला उनके साथ-साथ अगली पीढ़ी यानी तेजस्वी यादव तक पहुंच चुका है। यह देखना दिलचस्प होगा कि अदालत का रुख क्या होता है और इसका बिहार की राजनीति पर क्या प्रभाव पड़ता है।