
Report By: Kiran Prakash Singh
RTI के जरिए बदरी-केदार मंदिर समिति में टीए-डीए भुगतान में कथित अनियमितताओं का खुलासा। सामाजिक कार्यकर्ता ने श्रद्धालुओं के धन के दुरुपयोग का आरोप लगाया।
Date: 27 June 2026
Website: digitallivenews.com
RTI में बड़ा खुलासा, बदरी-केदार मंदिर समिति पर करोड़ों नहीं, लेकिन लाखों के कथित अनियमित भुगतान के आरोप
उत्तराखंड की बदरी-केदार मंदिर समिति (बीकेटीसी) एक बार फिर विवादों में आ गई है। सूचना के अधिकार (RTI) के तहत प्राप्त दस्तावेजों के आधार पर सामाजिक कार्यकर्ता एवं वरिष्ठ अधिवक्ता विकेश सिंह नेगी ने समिति के कुछ सदस्यों पर टीए/डीए (यात्रा एवं दैनिक भत्ता) के नाम पर कथित अनियमित भुगतान लेने के आरोप लगाए हैं। नेगी का दावा है कि श्रद्धालुओं के दान और चढ़ावे से संचालित मंदिर कोष का उपयोग नियमों के अनुरूप नहीं किया गया। हालांकि, इन आरोपों पर समिति की ओर से आधिकारिक प्रतिक्रिया अभी सामने नहीं आई है।
RTI में सामने आई भुगतान से जुड़ी जानकारी
विकेश सिंह नेगी ने प्रेस वार्ता में बताया कि आरटीआई के माध्यम से प्राप्त दस्तावेजों के अनुसार मंदिर एक्ट की धारा 26 (च) के तहत समिति के सदस्यों को केवल आधिकारिक कार्यों और बोर्ड अथवा उपसमितियों की बैठकों में भाग लेने पर ही यात्रा भत्ता और दैनिक भत्ता दिया जा सकता है। नियमों के अनुसार सदस्यों को प्रतिदिन 6,000 रुपये का दैनिक भत्ता और चार रुपये प्रति किलोमीटर की दर से यात्रा व्यय का भुगतान किया जाता है।
नेगी का आरोप है कि इन प्रावधानों का पालन किए बिना कुछ सदस्यों को बड़ी राशि का भुगतान किया गया।
आठ महीने में कथित तौर पर लाखों रुपये का भुगतान
नेगी के अनुसार वर्तमान बोर्ड का गठन पिछले वर्ष जून में हुआ था और आठ महीनों के दौरान बोर्ड की केवल एक बैठक आयोजित हुई। इसके बावजूद कुछ सदस्यों ने विभिन्न यात्राओं और कार्यक्रमों के नाम पर कई बार टीए-डीए का दावा प्रस्तुत किया। उनका कहना है कि कई निजी या परंपरागत धार्मिक आयोजनों को भी सरकारी कार्यक्रम दर्शाकर भुगतान लिया गया, जिसकी जांच आवश्यक है।
उन्होंने आरोप लगाया कि इससे मंदिर कोष पर अनावश्यक वित्तीय भार पड़ा और नियमों की अनदेखी हुई।
धार्मिक आयोजनों और हेलीकॉप्टर खर्च पर भी सवाल
आरटीआई के आधार पर नेगी ने दावा किया कि बसंत पंचमी के अवसर पर नरेंद्रनगर राजमहल में आयोजित कपाट खुलने की तिथि निर्धारण कार्यक्रम में शामिल होने पर भी कई सदस्यों ने भत्ते प्राप्त किए। उनका कहना है कि यह कार्यक्रम टिहरी राजपरिवार की परंपरा का हिस्सा है और इसे समिति की आधिकारिक बैठक नहीं माना जा सकता।
इसके अलावा केदारनाथ यात्रा के दौरान कुछ सदस्यों के हेलीकॉप्टर किराए का भुगतान भी मंदिर कोष से किए जाने का आरोप लगाया गया है। नेगी ने कहा कि ऐसे मामलों की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए।
कुछ सदस्यों के भुगतान पर उठे सवाल
नेगी ने उदाहरण देते हुए दावा किया कि समिति के सदस्य डॉ. विनीत पोस्ती ने केदारनाथ, बदरीनाथ, तुंगनाथ तथा मद्महेश्वर मेले सहित विभिन्न अवसरों पर यात्रा भत्ते प्राप्त किए। वहीं एक अन्य सदस्य प्रह्लाद पुष्पाण के भुगतान से संबंधित फाइल पर लेखा अनुभाग द्वारा सत्यापन संबंधी आपत्ति दर्ज होने के बावजूद भुगतान किए जाने का आरोप लगाया गया।
नेगी का कहना है कि यदि ये आरोप सही पाए जाते हैं तो यह वित्तीय नियमों का गंभीर उल्लंघन माना जाएगा।
समिति का पक्ष आना बाकी, जांच की मांग तेज
विकेश सिंह नेगी ने यह भी याद दिलाया कि इससे पहले भी उन्होंने मंदिर कोष के उपयोग, वीआईपी मेहमानों के खर्च और अन्य भुगतान संबंधी मामलों को लेकर सवाल उठाए थे। उन्होंने समिति के कुछ पदाधिकारियों पर अतिरिक्त वित्तीय लाभ लेने के भी आरोप लगाए हैं।
हालांकि, इस पूरे मामले में बदरी-केदार मंदिर समिति के अध्यक्ष हेमंत द्विवेदी का पक्ष सामने नहीं आ सका है। नेगी ने कहा कि यदि समिति या अध्यक्ष की ओर से कोई स्पष्टीकरण आता है तो उसे भी सार्वजनिक किया जाएगा।
फिलहाल यह मामला आरोपों और आरटीआई दस्तावेजों पर आधारित है। किसी भी कथित अनियमितता की पुष्टि सक्षम जांच और संबंधित अधिकारियों की कार्रवाई के बाद ही होगी। अब सभी की निगाहें इस मामले में संभावित जांच और समिति की आधिकारिक प्रतिक्रिया पर टिकी हुई हैं।