
Report By: Kiran Prakash Singh
बंगाल में काउंटिंग से पहले स्ट्रांगरूम खोलने को लेकर सियासी घमासान तेज। BJP ने 10 बार खोलने का आरोप लगाया, TMC ने भी उठाए सवाल।
बंगाल में स्ट्रांगरूम विवाद, काउंटिंग से पहले सियासी घमासान तेज
स्ट्रांगरूम खोलने पर बढ़ा विवाद
पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 में काउंटिंग से पहले EVM स्ट्रांगरूम को लेकर बड़ा विवाद खड़ा हो गया है। Bharatiya Janata Party (BJP) और Trinamool Congress (TMC) आमने-सामने हैं और दोनों ही पक्ष चुनाव प्रक्रिया पर सवाल उठा रहे हैं।
BJP का आरोप- ‘कम से कम 10 बार खोला गया’
बीजेपी नेता Sharadwat Mukhopadhyay ने गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि बिधाननगर में एक स्ट्रांगरूम को बिना अनुमति कई बार खोला गया। उन्होंने दावा किया कि यह स्ट्रांगरूम “एक-दो बार नहीं, बल्कि कम से कम 10 बार खोला गया”। उन्होंने यह भी कहा कि जब वे निर्धारित समय पर पहुंचे, तो स्ट्रांगरूम पहले से खुला हुआ था, जो नियमों के खिलाफ है।
6 अधिकारियों पर गिरी गाज
इस मामले में शुरुआती जांच के बाद प्रशासन ने 6 अधिकारियों को निलंबित कर दिया है। Election Commission of India ने इस घटना को गंभीरता से लेते हुए कार्रवाई की है। आयोग का कहना है कि चुनाव प्रक्रिया की पारदर्शिता से कोई समझौता नहीं किया जाएगा।
TMC ने भी उठाए थे गड़बड़ी के आरोप
इससे पहले Trinamool Congress (TMC) ने भी कोलकाता के स्ट्रांगरूम में संदिग्ध गतिविधियों का आरोप लगाया था। पार्टी नेताओं ने दावा किया कि CCTV फुटेज में बाहरी लोग स्ट्रांगरूम के अंदर दिखाई दिए, जो बैलेट पेपर के साथ छेड़छाड़ कर रहे थे। इस मुद्दे पर कुणाल घोष और शशि पांजा ने धरना भी दिया था।
ममता बनर्जी ने कार्यकर्ताओं को किया अलर्ट
पूरे विवाद के बीच मुख्यमंत्री Mamata Banerjee ने अपने कार्यकर्ताओं और उम्मीदवारों को सतर्क रहने की सलाह दी है। उन्होंने कहा कि मतगणना केंद्रों की खुद निगरानी करें और किसी भी गड़बड़ी को हल्के में न लें। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि EVM के परिवहन के दौरान मशीनों में बदलाव की साजिश हो सकती है।
काउंटिंग से पहले बंगाल में इस तरह के आरोप-प्रत्यारोप ने राजनीतिक माहौल को और गर्म कर दिया है। जहां एक ओर बीजेपी और TMC एक-दूसरे पर चुनावी गड़बड़ी के आरोप लगा रहे हैं, वहीं चुनाव आयोग के सामने निष्पक्ष और पारदर्शी काउंटिंग सुनिश्चित करने की बड़ी चुनौती है।
अब सभी की नजरें 4 मई को आने वाले नतीजों पर टिकी हैं, जहां यह साफ होगा कि इन विवादों के बीच जनता का जनादेश किसके पक्ष में जाता है।