
Report By: Kiran Prakash Singh
पूर्व चुनाव आयुक्त अशोक लवासा ने SIR की प्रक्रिया और Form 6 में बदलाव पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि चुनाव आयोग की छवि खराब होना चिंता की बात है।
———————————————————————————————————————————————————————————-
SIR को लेकर अशोक लवासा की अहम टिप्पणी
स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) को लेकर जारी विवाद के बीच पूर्व चुनाव आयुक्त अशोक लवासा ने चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली और इस प्रक्रिया को लेकर सवाल उठाए हैं। ABP News से बातचीत में लवासा ने कहा कि उन्हें इस बात का दुख है कि चुनाव आयोग जैसी संस्था की छवि इस तरह प्रभावित हो रही है। उन्होंने SIR की मौजूदा प्रक्रिया को लेकर भी अपनी आपत्तियां जाहिर कीं।
‘SIR करवाने का कोई मतलब नहीं’
अशोक लवासा ने बातचीत में कहा कि उन्हें SIR की मौजूदा कवायद का उद्देश्य स्पष्ट नहीं लगता। उनके अनुसार, जिन उद्देश्यों को SIR के जरिए हासिल करने की बात कही जा रही है, उन्हें सरल तरीके से भी पूरा किया जा सकता था।
लवासा ने इस प्रक्रिया में अपनाई गई नई कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि इस तरह की पद्धति पहले इस्तेमाल नहीं की गई थी और इसके मानकों तथा प्रक्रिया को लेकर स्पष्टता जरूरी है।
हालांकि, यह लवासा की व्यक्तिगत राय और टिप्पणी है। SIR की प्रक्रिया को लेकर चुनाव आयोग और अन्य पक्षों की अलग-अलग व्याख्याएं मौजूद हैं।
चुनाव आयोग की छवि पर जताई चिंता
पूर्व चुनाव आयुक्त ने कहा कि उन्हें सबसे ज्यादा अफसोस इस बात का है कि चुनाव आयोग की छवि खराब हो रही है। उन्होंने आयोग को एक महत्वपूर्ण संवैधानिक संस्था बताते हुए मौजूदा विवाद को चिंता का विषय बताया।
लवासा ने यह भी कहा कि SIR को लेकर आम लोगों को हुई परेशानियों की चर्चा के बीच चुनाव आयुक्तों की ओर से भी चिंताएं सामने आने की बात कही गई है। इसी संदर्भ में उन्होंने प्रक्रिया को पारदर्शी और नियमों के अनुरूप रखने की जरूरत पर जोर दिया।
Form 6 में बदलाव पर सवाल
लवासा ने Form 6 को लेकर भी सवाल उठाए। Form 6 नए मतदाताओं के पंजीकरण के लिए इस्तेमाल किया जाता है। हालिया विवाद में इस फॉर्म में किए गए बदलाव और उन्हें लागू करने की प्रक्रिया पर सवाल उठे हैं।
India Today की रिपोर्ट के अनुसार, लवासा ने पूछा कि अगर तीनों चुनाव आयुक्त किसी बदलाव पर सहमत भी हों, तो क्या निर्धारित प्रक्रिया का पालन किए बिना Form 6 में बदलाव किया जा सकता है। उन्होंने इस मामले में चुनाव आयोग से पूरी जानकारी और स्पष्टीकरण देने की जरूरत बताई।
ERO-Net और मतदाता अधिकारों का मुद्दा
SIR विवाद में ERO-Net सिस्टम भी चर्चा में है। लवासा ने सवाल उठाया कि क्या तकनीकी व्यवस्था के कारण Electoral Registration Officers यानी EROs के वैधानिक अधिकार प्रभावित हो रहे हैं।
उनका कहना है कि मतदाता सूची में नाम जोड़ने या हटाने से जुड़े अधिकार निर्धारित कानूनी प्रक्रिया के तहत इस्तेमाल होने चाहिए। उन्होंने इस बात पर भी जोर दिया कि तकनीक का इस्तेमाल कानून में निर्धारित प्रक्रिया को सहायता देने के लिए होना चाहिए, न कि उसे प्रभावित करने के लिए।
SIR विवाद के बीच बढ़ी पारदर्शिता की मांग
अशोक लवासा की टिप्पणियां ऐसे समय आई हैं जब SIR से जुड़े फैसलों को लेकर चुनाव आयोग के भीतर कथित मतभेदों पर भी चर्चा हो रही है। रिपोर्टों में दावा किया गया है कि चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी ने SIR से जुड़े कुछ फैसलों और आदेशों पर आपत्तियां दर्ज की थीं। इनमें Form 6 में बदलाव और मतदाता डेटा के प्रबंधन से जुड़े मुद्दे भी शामिल बताए गए हैं।
वहीं, चुनाव आयोग का पक्ष है कि SIR समेत उसके फैसले संस्थागत प्रक्रिया के तहत लिए गए हैं और आयोग ने इन फैसलों को लेकर एकरूपता की बात कही है। इसलिए मौजूदा विवाद में अलग-अलग दावों और प्रतिक्रियाओं के बीच पूरे रिकॉर्ड और आधिकारिक स्पष्टीकरण का महत्व बढ़ जाता है।
इस पूरे मामले में अशोक लवासा ने प्रक्रिया की कानूनी वैधता, पारदर्शिता और मतदाता अधिकारों से जुड़े सवालों पर स्पष्टता की जरूरत बताई है। SIR को लेकर चुनाव आयोग, राजनीतिक दलों और पूर्व चुनाव अधिकारियों की अलग-अलग राय के बीच आगे की प्रक्रिया और आधिकारिक स्पष्टीकरण पर नजर बनी हुई है।
आज की तारीख: 24 सितंबर 2026
digitallivenews.com