
Report By: Kiran Prakash Singh
भारत-अफगानिस्तान T20 मैच से पहले वंदे मातरम गाए जाने पर मुफ्ती वजाहत कासमी ने इसे देश के लिए खुशी की बात बताया और लोगों से सम्मान के साथ गाने की अपील की।
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वंदे मातरम पर मुफ्ती वजाहत कासमी का बयान, बोले- देशभक्ति दिखाएं
भारत और अफगानिस्तान के बीच खेले गए T20 मुकाबले को लेकर वंदे मातरम गाए जाने का मुद्दा चर्चा में है। राष्ट्रगान से पहले राष्ट्रीय गीत वंदे मातरम गाए जाने पर इस्लामिक विद्वान मुफ्ती वजाहत कासमी ने प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने इसे देश के लिए खुशी की बात बताते हुए कहा कि उन्हें उम्मीद है कि देशभर के लोग पूरे सम्मान के साथ वंदे मातरम गाएंगे और अपनी देशभक्ति जाहिर करेंगे।
कासमी ने न्यूज एजेंसी IANS से सोमवार, 14 सितंबर को बातचीत के दौरान यह बात कही। उन्होंने राष्ट्रीय गीत को लेकर अपने विचार रखते हुए कहा कि वंदे मातरम को राष्ट्रगान के बराबर कानूनी सम्मान दिया गया है।
1. वंदे मातरम को लेकर कासमी ने क्या कहा?
मुफ्ती वजाहत कासमी ने कहा कि वंदे मातरम का क्रिकेट स्टेडियम में गाया जाना खुशी की बात है। उन्होंने कहा कि यह केवल खेल के मैदान तक सीमित नहीं है, बल्कि संसद और देश में आयोजित होने वाले कई अन्य कार्यक्रमों में भी इसे गाया जा रहा है।
कासमी ने उम्मीद जताई कि देशभर के लोग उसी सम्मान के साथ वंदे मातरम गाएंगे और अपनी देशभक्ति जाहिर करेंगे। उन्होंने कहा कि वह चाहते हैं कि इस मुद्दे को देश की एकता और सकारात्मक भावना के साथ देखा जाए।
2. विरोध करने वालों को भी सद्बुद्धि की अपील
मुफ्ती वजाहत कासमी ने अपने बयान में उन लोगों को लेकर भी प्रतिक्रिया दी, जो वंदे मातरम का विरोध करते हैं। उन्होंने कहा कि वह प्रार्थना करते हैं कि जो लोग इसका विरोध करते हैं, उन्हें भी ईश्वर सद्बुद्धि दे।
उनका बयान ऐसे समय में आया है जब राष्ट्रीय गीत को लेकर सार्वजनिक मंचों पर बहस देखने को मिलती रही है। कासमी ने अपने बयान के जरिए लोगों से देशभक्ति और राष्ट्रीय एकता की भावना के साथ आगे बढ़ने की अपील की।
3. मथुरा-काशी विवाद पर भी रख चुके हैं राय
मुफ्ती वजाहत कासमी इससे पहले मथुरा-काशी विवाद को लेकर भी अपनी राय रख चुके हैं। उन्होंने कहा था कि अगर सभी विद्वान एक साथ बैठकर बातचीत करें तो इस तरह के विवाद का समाधान निकाला जा सकता है।
उन्होंने देश में धर्म से जुड़े पुराने विवादों का जिक्र करते हुए अयोध्या मामले का भी उदाहरण दिया था। कासमी ने कहा था कि जब सुप्रीम कोर्ट ने अयोध्या में राम मंदिर निर्माण को लेकर फैसला दिया, तब मुस्लिम समुदाय के लोगों ने भी उसका स्वागत किया था।
उनका कहना था कि बातचीत और आपसी समझ के जरिए देश में ऐसे मुद्दों का समाधान निकालने की कोशिश की जा सकती है।
4. कौन हैं मुफ्ती वजाहत कासमी?
मुफ्ती वजाहत कासमी एक इस्लामिक स्कॉलर और न्यायविद् के तौर पर जाने जाते हैं। उन्होंने सहारनपुर स्थित प्रसिद्ध दारुल उलूम देवबंद से शिक्षा हासिल की है।
कासमी इक्रा वेलफेयर ट्रस्ट के मुख्य संरक्षक हैं। वह समय-समय पर देश के सामाजिक और राष्ट्रीय मुद्दों पर अपनी राय रखते रहे हैं। खास तौर पर वह अमन-चैन, राष्ट्रीय एकता और आतंकवाद के विरोध से जुड़े संदेश देते हैं।
5. युवाओं की शिक्षा पर देते हैं जोर
मुफ्ती वजाहत कासमी मुस्लिम समाज में शिक्षा को लेकर भी लगातार बात करते रहे हैं। वह खास तौर पर युवाओं को शिक्षा के रास्ते पर आगे बढ़ने और समाज में सकारात्मक भूमिका निभाने का संदेश देते हैं।
वह राजनीति, सामाजिक सुधार और राष्ट्रीय मुद्दों पर भी बेबाकी से अपनी राय रखने के लिए जाने जाते हैं। वंदे मातरम को लेकर उनका ताजा बयान भी इसी सिलसिले में देखा जा रहा है।
भारत-अफगानिस्तान T20 मुकाबले से पहले वंदे मातरम गाए जाने के मुद्दे पर कासमी का बयान सामने आने के बाद यह मामला एक बार फिर चर्चा में आ गया है। उन्होंने इसे देश के लिए खुशी की बात बताते हुए लोगों से सम्मान और देशभक्ति की भावना के साथ राष्ट्रीय गीत गाने की उम्मीद जताई है।
उनके बयान में राष्ट्रीय एकता और देशभक्ति पर जोर दिया गया है। अब यह देखना होगा कि वंदे मातरम को लेकर सार्वजनिक और राजनीतिक स्तर पर आगे किस तरह की प्रतिक्रियाएं सामने आती हैं।
दिनांक: 14 सितंबर 2026
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