
Report By: Kiran Prakash Singh
UCC को लेकर अमित शाह के ऐलान पर सलमान खुर्शीद ने सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि कानून की संवैधानिक और कानूनी जांच जरूरी है, खासकर मौलिक अधिकारों के आधार पर।
———————————————————————————————————————————————————————————-
UCC को लेकर सलमान खुर्शीद का बड़ा बयान, संविधान और मौलिक अधिकारों का दिया हवाला
केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के UCC को लेकर दिए गए ऐलान के बाद इस मुद्दे पर राजनीतिक बहस तेज हो गई है। अमित शाह ने कहा है कि भारतीय जनता पार्टी के नेतृत्व वाले राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन यानी NDA शासित राज्यों में 2029 से पहले समान नागरिक संहिता लागू की जाएगी। इसी बयान पर कांग्रेस नेता और पूर्व केंद्रीय मंत्री सलमान खुर्शीद ने प्रतिक्रिया दी है।
खुर्शीद ने UCC को लेकर सरकार की मंशा और इसके कानूनी प्रभावों पर सवाल उठाते हुए कहा कि किसी भी विचारधारा या राजनीतिक फैसले को संविधान के दायरे में रहकर ही लागू किया जाना चाहिए। उन्होंने विशेष रूप से मौलिक अधिकारों और धार्मिक स्वतंत्रता का उल्लेख किया।
1. UCC पर सलमान खुर्शीद ने क्या कहा?
सलमान खुर्शीद ने कहा कि अगर किसी को लगता है कि बिना ठोस काम किए केवल ऐसे मुद्दों के जरिए चुनाव जीता जा सकता है, तो यह उनका अपना फैसला है। उन्होंने UCC से जुड़े कदमों की कानूनी जांच की आवश्यकता पर जोर दिया।
खुर्शीद के मुताबिक उत्तराखंड में लागू किए गए UCC को अदालत में चुनौती दी गई है और संबंधित मामला अभी लंबित है। उन्होंने उम्मीद जताई कि दूसरे राज्यों में भी यदि ऐसे कानून लागू किए जाते हैं तो उनकी संवैधानिक वैधता पर अदालतों में सवाल उठ सकते हैं।
2. संविधान के दायरे में हो हर फैसला
पूर्व केंद्रीय मंत्री ने कहा कि भाजपा की अपनी एक विशेष विचारधारा है, लेकिन किसी भी विचारधारा को संविधान से अलग नहीं किया जा सकता। उनका कहना है कि सरकार चाहे उत्तराखंड में कोई कदम उठाए या दूसरे राज्यों में UCC लागू करने की तैयारी करे, सभी फैसलों की कानूनी कसौटी पर जांच होनी चाहिए।
उन्होंने कहा कि लोकतांत्रिक व्यवस्था में सरकारों को संविधान और कानून के दायरे में रहकर काम करना होता है। इसी आधार पर UCC से जुड़े प्रावधानों की भी न्यायिक समीक्षा महत्वपूर्ण होगी।
3. मौलिक अधिकारों पर रहेगा फोकस
सलमान खुर्शीद ने कहा कि यदि UCC से जुड़े मामलों की सुनवाई हाई कोर्ट या सुप्रीम कोर्ट में होती है तो मौलिक अधिकार महत्वपूर्ण आधार होंगे। उन्होंने विशेष रूप से हर भारतीय नागरिक को अपनी आस्था और धर्म का पालन करने के अधिकार का उल्लेख किया।
उनका कहना है कि अदालतें जब इन अधिकारों की व्याख्या करते हुए अपना फैसला सुनाएंगी, तभी UCC के कानूनी प्रभाव को लेकर कोई स्पष्ट निष्कर्ष निकाला जा सकेगा। फिलहाल इस मुद्दे पर अलग-अलग राजनीतिक दलों की अपनी-अपनी राय है।
4. अमित शाह ने 2029 से पहले UCC की बात कही
सलमान खुर्शीद की प्रतिक्रिया केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के UCC संबंधी बयान के बाद सामने आई है। शाह ने कहा है कि 2029 से पहले NDA शासित राज्यों में समान नागरिक संहिता लागू करने की दिशा में काम किया जाएगा।
UCC का उद्देश्य अलग-अलग धार्मिक समुदायों से जुड़े व्यक्तिगत कानूनों के स्थान पर नागरिकों के लिए समान कानूनी प्रावधान लागू करना है। हालांकि इसके स्वरूप, दायरे और विभिन्न धार्मिक एवं सामाजिक समूहों पर प्रभाव को लेकर देश में लंबे समय से राजनीतिक और कानूनी बहस होती रही है।
5. उत्तराखंड का मॉडल चर्चा में
UCC को लेकर उत्तराखंड का कानून सबसे प्रमुख उदाहरणों में शामिल है। राज्य में UCC से संबंधित कानून को लागू किया जा चुका है। इसी कानून को लेकर अदालत में चुनौती भी दी गई है, जिसका उल्लेख सलमान खुर्शीद ने अपने बयान में किया।
अब यदि अन्य राज्यों में भी UCC लागू करने की प्रक्रिया आगे बढ़ती है तो इसके अलग-अलग प्रावधानों पर कानूनी और संवैधानिक बहस होने की संभावना है। खासतौर पर धार्मिक स्वतंत्रता, समानता और मौलिक अधिकारों से जुड़े सवाल अदालतों के सामने महत्वपूर्ण हो सकते हैं।
फिलहाल UCC को लेकर केंद्र सरकार और विपक्ष के बीच राजनीतिक मतभेद साफ दिखाई दे रहे हैं। एक तरफ सरकार इसे समान नागरिक अधिकारों और एकरूप कानून की दिशा में महत्वपूर्ण कदम मानती है, वहीं विपक्ष इसके संवैधानिक और सामाजिक प्रभावों पर सवाल उठा रहा है।
सलमान खुर्शीद ने भी स्पष्ट किया कि अंतिम स्थिति अदालतों के फैसलों और संविधान की व्याख्या के बाद ही सामने आएगी। ऐसे में आने वाले समय में UCC को लेकर राजनीतिक बहस के साथ-साथ कानूनी प्रक्रिया भी महत्वपूर्ण रहने वाली है।
दिनांक: 14 सितंबर 2026
डिजिटल लाइव न्यूज | digitallivenews.com