सत्य निकेतन हादसे पर राहुल गांधी का सरकार पर हमला

Report By: Kiran Prakash Singh

सत्य निकेतन हादसे को लेकर राहुल गांधी ने सरकार पर जवाबदेही से बचने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा- हादसों के बाद बयानबाजी होती है, लेकिन रोकथाम नहीं।

Digital Live News | 7 सितंबर 2026 | digitallivenews.com

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सत्य निकेतन हादसे पर राहुल गांधी का हमला, सरकार से जवाबदेही का सवाल

दक्षिण-पश्चिम दिल्ली के सत्य निकेतन में इमारत ढहने की घटना को लेकर लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने केंद्र और दिल्ली सरकार पर निशाना साधा है। राहुल गांधी ने आरोप लगाया कि हादसों से पहले रोकथाम पर पर्याप्त ध्यान नहीं दिया जाता और घटना के बाद बयानबाजी तथा कुछ अधिकारियों पर कार्रवाई तक मामला सीमित रह जाता है।

राहुल गांधी ने सवाल उठाया कि दिल्ली में ट्रिपल इंजन सरकार होने के बावजूद ऐसी घटनाओं को रोकने में सरकार असहाय क्यों दिखाई दे रही है। उन्होंने कहा कि जहां नीयत नहीं होती, वहां जवाबदेही भी नहीं होती।

हादसों के बाद कार्रवाई पर राहुल के सवाल

राहुल गांधी ने सत्य निकेतन हादसे को किसी एक घटना तक सीमित नहीं बताया। उन्होंने दिल्ली में पिछले कुछ महीनों के दौरान हुई अन्य घटनाओं का भी जिक्र किया।

उन्होंने कहा कि हर बार हादसों के बाद जिम्मेदारी छोटे अधिकारियों पर डालने की कोशिश होती है, जबकि असली जवाबदेही तय नहीं होती। राहुल के मुताबिक हादसों की रोकथाम के लिए पहले से ठोस व्यवस्था बनाने की जरूरत है।

उन्होंने सैदुलाजाब और हौज रानी में हुई घटनाओं का भी उल्लेख किया और कहा कि बार-बार ऐसी त्रासदियों में लोगों की जान जा रही है, लेकिन कार्रवाई और जवाबदेही का सवाल बना हुआ है।

‘दिमागी नक्सल’ वाले बयान का भी जिक्र

राहुल गांधी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के कथित ‘दिमागी नक्सल’ और ‘नाराज फूफा’ जैसे बयानों का भी जिक्र किया। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार से जवाबदेही मांगने वालों को अलग-अलग तरह के तमगों से निशाना बनाया जाता है।

राहुल गांधी ने कहा कि सवाल पूछने वालों को शर्मिंदा या बदनाम करने के बजाय सरकार को वास्तविक मुद्दों पर जवाब देना चाहिए। उन्होंने दिल्ली की सरकार को लेकर भी सवाल उठाते हुए पूछा कि जब यहां ट्रिपल इंजन सरकार है तो फिर ऐसी घटनाओं को रोकने में परेशानी क्यों आ रही है।

दिल्ली हाईकोर्ट ने भी लिया संज्ञान

सत्य निकेतन हादसे को लेकर दिल्ली हाईकोर्ट में भी सुनवाई हुई। अदालत ने मामले में DU, MCD, राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग, दिल्ली सरकार, केंद्र सरकार और दिल्ली पुलिस को नोटिस जारी किया है।

याचिकाकर्ता की ओर से अदालत में दलील दी गई कि दिल्ली में अलग-अलग अंतराल पर आग, जलभराव और इमारत गिरने जैसी घटनाएं सामने आती रहती हैं। ऐसे में दिल्ली नगर निगम और संबंधित विभागों को सुरक्षा व्यवस्था मजबूत करने के लिए ठोस कदम उठाने की जरूरत है।

हाईकोर्ट ने भी PG और हॉस्टल की सुरक्षा तथा इमारतों के नियमों के पालन को लेकर सवाल उठाए हैं।

दो वर्षों में कई बड़े हादसे

राहुल गांधी के बयान में दिल्ली में हुई पुरानी घटनाओं का भी संदर्भ सामने आया। पिछले दो वर्षों में रोहिणी, साकेत, वेलकम, करोल बाग, पहाड़गंज और मुस्तफाबाद समेत कई इलाकों में इमारत गिरने की घटनाएं हुई हैं।

बताए गए मामलों में इस साल मई में साकेत मेट्रो स्टेशन के पास पांच मंजिला इमारत गिरने से छह लोगों की मौत और जुलाई में रोहिणी सेक्टर-16 में इमारत गिरने से तीन मजदूरों की मौत का मामला शामिल है। अप्रैल 2025 में मुस्तफाबाद में चार मंजिला मकान ढहने से 11 लोगों की मौत का भी जिक्र किया गया है।

आग और जलभराव की घटनाओं पर भी चिंता

दिल्ली में केवल इमारत गिरने की घटनाएं ही नहीं, बल्कि बड़े अग्निकांड और जलभराव भी चिंता का विषय रहे हैं। इस साल मार्च में पालम की एक इमारत में आग से नौ लोगों की मौत बताई गई। मई में विवेक विहार अग्निकांड में भी नौ लोगों की जान गई।

जून में मालवीय नगर के ‘फ्लोरिश स्टे’ होटल में आग लगने की घटना में 21 लोगों की मौत का उल्लेख किया गया है। इससे पहले मुंडका औद्योगिक क्षेत्र में मई 2022 में आग से 27 लोगों की मौत हुई थी। फरवरी 2019 में करोल बाग के एक होटल में आग से 17 लोगों की जान गई थी और उसी साल रानी झांसी रोड की अनाज मंडी में आग से 43 लोगों की मौत हुई थी।

जनवरी 2018 के बवाना औद्योगिक क्षेत्र की आग और जुलाई 2024 में ओल्ड राजेंद्र नगर के कोचिंग सेंटर के बेसमेंट में जलभराव से तीन सिविल सेवा अभ्यर्थियों की मौत जैसी घटनाओं ने भी दिल्ली की सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल खड़े किए हैं।

सत्य निकेतन हादसे के बाद अब राजनीतिक बयानबाजी के साथ-साथ प्रशासनिक जवाबदेही, भवन सुरक्षा और हादसों की रोकथाम पर भी बहस तेज हो गई है। आने वाले समय में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि सरकार और संबंधित एजेंसियां इन घटनाओं से सबक लेते हुए सुरक्षा व्यवस्था में क्या ठोस बदलाव करती हैं।

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