3 महीने में जातीय जनगणना, अखिलेश यादव का बड़ा ऐलान

Report By: Kiran Prakash Singh

अखिलेश यादव ने सपा सरकार बनने पर 3 महीने में जातीय जनगणना कराने का ऐलान किया। महिलाओं को 40 हजार रुपये देने समेत कई वादे दोहराए।

दिनांक: 30 अगस्त 2026 | digitallivenews.com

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3 महीने में जातीय जनगणना, अखिलेश यादव का बड़ा ऐलान

समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने रविवार को खंगार समाज के लोगों से मुलाकात के बाद प्रेस वार्ता की। इस दौरान उन्होंने उत्तर प्रदेश की राजनीति, जातीय जनगणना, महिलाओं के लिए आर्थिक सहायता, सड़क और एक्सप्रेसवे, सरकारी संपत्तियों तथा कानून-व्यवस्था जैसे कई मुद्दों पर अपनी बात रखी। अखिलेश यादव ने कहा कि यदि प्रदेश में समाजवादी पार्टी की सरकार बनती है तो तीन महीने के भीतर जातीय जनगणना कराई जाएगी।

तीन महीने में जातीय जनगणना का ऐलान

अखिलेश यादव ने कहा कि अर्कवंशी और खंगार समाज लंबे समय से उपेक्षा का सामना कर रहे हैं। उन्होंने दावा किया कि सपा सरकार बनने पर जातीय जनगणना कराकर आबादी के अनुपात में लोगों को उनका अधिकार और प्रतिनिधित्व दिलाया जाएगा।

उन्होंने कहा कि सामाजिक भागीदारी और प्रतिनिधित्व के लिए आंकड़ों का होना जरूरी है। इसी आधार पर सरकार में हिस्सेदारी तय करने की बात उन्होंने कही। अखिलेश ने खंगार समाज के सम्मान में लखनऊ की किसी प्रतिष्ठित जगह पर महाराजा खंगार की अष्टधातु की प्रतिमा स्थापित करने का भी वादा किया।

महिलाओं को 40 हजार रुपये देने का दावा

सपा अध्यक्ष ने महिलाओं को 40 हजार रुपये देने के अपने पुराने वादे को एक बार फिर दोहराया। उन्होंने कहा कि प्रदेश में सपा की सरकार बनने पर महिलाओं को यह राशि दी जाएगी। अखिलेश ने इसे पिछले वर्षों की कथित उपेक्षा से जोड़ते हुए कहा कि महिलाओं के लिए आर्थिक सहायता की योजना लागू की जाएगी।

उन्होंने कन्या विद्या धन और अन्य राहत योजनाओं को दोबारा शुरू करने की भी बात कही। अखिलेश का कहना था कि महिलाओं और युवाओं के लिए सामाजिक सुरक्षा तथा आर्थिक अवसर बढ़ाना उनकी सरकार की प्राथमिकताओं में शामिल होगा।

सड़कों और एक्सप्रेसवे की गुणवत्ता पर सवाल

अखिलेश यादव ने प्रदेश में सड़क और एक्सप्रेसवे निर्माण की गुणवत्ता को लेकर योगी सरकार पर निशाना साधा। उन्होंने बुंदेलखंड एक्सप्रेसवे, गंगा एक्सप्रेसवे और कानपुर एक्सप्रेसवे का जिक्र करते हुए निर्माण कार्यों पर सवाल उठाए।

उन्होंने कहा कि सरकार तकनीक के इस्तेमाल की बात करती है, लेकिन इसके बावजूद कई जगह सड़क संबंधी समस्याएं सामने आती हैं। अखिलेश ने दावा किया कि सत्ता में आने के बाद PWD के कामों का ऑडिट कराया जाएगा।

उन्होंने सड़क निर्माण, पाइपलाइन डालने के लिए बार-बार सड़कों की खुदाई और जल निकासी जैसी व्यवस्थाओं पर भी सवाल उठाए। उनका कहना था कि सरकारी योजनाओं में खर्च होने वाले पैसे और काम की गुणवत्ता की जांच जरूरी है।

JPNIC और सरकारी संपत्तियों का मुद्दा

सपा प्रमुख ने लखनऊ स्थित जयप्रकाश नारायण इंटरनेशनल सेंटर (JPNIC) को लेकर भी बीजेपी सरकार पर आरोप लगाए। उन्होंने दावा किया कि इस परियोजना से जुड़े मामलों में सरकार को जवाब देना चाहिए कि इसे लेकर क्या निर्णय लिए गए और सार्वजनिक संपत्तियों के साथ सरकार की नीति क्या है।

अखिलेश ने JPNIC के अलावा छतर मंजिल, कन्नौज के मिल्क प्लांट और प्रदेश की अन्य संपत्तियों का भी जिक्र किया। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार सार्वजनिक संपत्तियों को बेचने या उनके स्वरूप में बदलाव करने की दिशा में आगे बढ़ रही है।

उन्होंने JPNIC के निर्माण से जुड़े इंजीनियर को मिले दूसरे बड़े प्रोजेक्ट का उल्लेख करते हुए सरकार से सवाल किया। हालांकि, इन मामलों में लगाए गए आरोप अखिलेश यादव के राजनीतिक दावे हैं।

कानून-व्यवस्था और गोमती नदी पर भी सरकार को घेरा

अखिलेश यादव ने उत्तर प्रदेश की कानून-व्यवस्था को लेकर भी सरकार पर निशाना साधा। उन्होंने आरोप लगाया कि पुलिस के कामकाज पर राजनीतिक दबाव है और जनता के बीच पुलिस कार्रवाई को लेकर सवाल उठते रहे हैं।

उन्होंने हरियाणवी कलाकार अंकित बालियान से जुड़े हत्याकांड का जिक्र करते हुए पीड़ित परिवार को न्याय दिलाने की मांग की। इसके अलावा दिग्विजय भाटी के मामले का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि यदि किसी के साथ गलत हुआ है तो निष्पक्ष जांच और कानूनी कार्रवाई होनी चाहिए।

सपा अध्यक्ष ने गोमती नदी की सफाई और अकबर नगर का मुद्दा भी उठाया। उन्होंने कहा कि सरकार को नदी के विकास और सफाई की ठोस योजना स्पष्ट करनी चाहिए। अकबर नगर से विस्थापित लोगों से किए गए वादों को लेकर भी उन्होंने सरकार से जवाब मांगा।

अखिलेश यादव की प्रेस वार्ता में सामाजिक न्याय से लेकर विकास और कानून-व्यवस्था तक कई मुद्दे प्रमुख रहे। जातीय जनगणना और महिलाओं को 40 हजार रुपये देने का वादा आने वाले समय में उत्तर प्रदेश की राजनीतिक बहस का अहम हिस्सा बन सकता है।

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