मैडिसन स्क्वायर में मोहन भागवत बोले- भारत में एकता ही DNA

Report By: Kiran Prakash Singh

RSS प्रमुख मोहन भागवत ने न्यूयॉर्क के मैडिसन स्क्वायर गार्डन में भारत की विविधता और एकता पर जोर दिया। प्रवासी भारतीयों से भारतीय मूल्यों को अपनाने की अपील की।

30 अगस्त 2026 | digitallivenews.com

मैडिसन स्क्वायर में मोहन भागवत का संदेश, बोले- भारत के DNA में विविधता में एकता

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) प्रमुख मोहन भागवत ने अमेरिका के न्यूयॉर्क स्थित मैडिसन स्क्वायर गार्डन में आयोजित एक कार्यक्रम को संबोधित किया। अपने संबोधन में उन्होंने भारत की विविधता, एकता, मानवीय संवेदना और भारतीय मूल्यों पर विस्तार से बात की। उन्होंने कहा कि भारत में अलग-अलग भाषाएं, धर्म और जीवनशैली होने के बावजूद लोगों के बीच एकता की भावना मौजूद है।

मोहन भागवत ने कहा कि ‘विविधता में एकता’ भारत के DNA का हिस्सा है। उन्होंने इसे भारत की विशेष पहचान बताते हुए कहा कि देश की नियति दुनिया को यह एहसास कराना है कि मानवता मूल रूप से एक है।

भारत की नियति दुनिया को एकता का संदेश देना

मैडिसन स्क्वायर गार्डन में अपने संबोधन के दौरान मोहन भागवत ने स्वामी विवेकानंद का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि हर देश का अपना एक उद्देश्य और नियति होती है।

भागवत के मुताबिक, भारत का दायित्व है कि वह स्वयं विविधता में एकता को महसूस करे और समय-समय पर पूरी दुनिया को भी इसका एहसास कराए। उन्होंने भारत में मौजूद अलग-अलग भाषाओं, धर्मों और जीवनशैलियों का उल्लेख करते हुए कहा कि इन विविधताओं के बावजूद देश को जोड़ने वाली भावना मौजूद है।

उन्होंने कहा कि एकता का अर्थ समानता नहीं बल्कि विविधताओं के साथ मिलकर आगे बढ़ना है।

प्रवासी भारतीयों को भारतीय मूल्यों से जुड़ने का संदेश

कार्यक्रम में मौजूद प्रवासी भारतीयों से भी मोहन भागवत ने विशेष अपील की। उन्होंने कहा कि जिस देश में वे रह रहे हैं, वहां की प्रगति और समाज के लिए काम करना जरूरी है, लेकिन इसके साथ भारत के मूल्यों और संस्कारों को भी नहीं भूलना चाहिए।

उन्होंने प्रवासी भारतीयों से कहा कि वे अपने कर्मस्थल के प्रति जिम्मेदारी निभाएं और साथ ही भारतीय मूल्यों को अपनाकर आगे बढ़ें

भागवत ने इस दौरान समाज के प्रति जिम्मेदारी और योगदान की भावना पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि इंसान अपने जीवन में कई चीजें दूसरों से प्राप्त करता है, इसलिए समाज और दुनिया को वापस देना भी जरूरी है।

कमाई से ज्यादा बांटने की भावना जरूरी

RSS प्रमुख ने कहा कि जीवन में केवल यह महत्वपूर्ण नहीं है कि कोई व्यक्ति कितना कमाता है। इसके साथ यह भी महत्वपूर्ण है कि वह समाज के लिए कितना योगदान देता है और दूसरों के साथ कितना बांटता है।

उन्होंने लोगों को साझा करने और दूसरों की मदद करने की भावना को जीवन का हिस्सा बनाने का संदेश दिया। उनके मुताबिक समाज में संवेदना और सहयोग की भावना ही इंसान को जिम्मेदार नागरिक बनाती है।

उन्होंने इस विचार को समझाने के लिए भोजन का उदाहरण भी दिया। उन्होंने कहा कि यदि कोई भूखा व्यक्ति सामने बैठा हो और वह आपकी थाली को देख रहा हो तो संवेदनशील इंसान के लिए उसे नजरअंदाज करना आसान नहीं होगा।

मानवीय संवेदना को बताया महत्वपूर्ण

मोहन भागवत ने अपने संबोधन में मानवीय संवेदना को विशेष महत्व दिया। उन्होंने कहा कि इंसानों के भीतर दूसरों के दुख और जरूरत को समझने की क्षमता होती है। यही भावना समाज को बेहतर बनाने में मदद करती है।

उन्होंने कहा कि सही दिशा में जीवन जीना जरूरी है। उनके अनुसार जब व्यक्ति अपनी संवेदनाओं को समझते हुए दूसरों के प्रति जिम्मेदारी निभाता है तो वह समाज और दुनिया के लिए सकारात्मक भूमिका निभा सकता है।

उन्होंने यह भी कहा कि केवल व्यक्तिगत सफलता पर्याप्त नहीं है। व्यक्ति की सफलता का महत्व तब और बढ़ जाता है जब उसका लाभ समाज के दूसरे लोगों तक भी पहुंचे।

39 राज्यों और 853 शहरों से लोगों के शामिल होने का दावा

‘यूनिवर्सल वननेस सेलिब्रेशन’ नाम से आयोजित इस कार्यक्रम का आयोजन अमेरिकन हिंदूज फॉर एंगेजमेंट एंड डायलॉग (AHEAD) की ओर से किया गया था। आयोजकों के अनुसार, कार्यक्रम में अमेरिका के 39 राज्यों और 853 शहरों से लोग शामिल हुए।

कार्यक्रम में अलग-अलग विश्वविद्यालयों के 250 से अधिक छात्रों के मौजूद रहने का भी दावा किया गया। प्रवासी भारतीय समुदाय के बीच आयोजित इस कार्यक्रम में भारत की संस्कृति, एकता और मानवता से जुड़े विचारों पर चर्चा हुई।

मोहन भागवत का संबोधन मुख्य रूप से भारत की विविधता और वैश्विक स्तर पर मानवीय एकता के संदेश पर केंद्रित रहा। उन्होंने प्रवासी भारतीयों से अपनी कर्मभूमि के प्रति जिम्मेदारी निभाने के साथ-साथ भारतीय मूल्यों को भी जीवन में बनाए रखने की अपील की।

उनके बयान के बाद भारत में भी राजनीतिक और सामाजिक प्रतिक्रियाओं का दौर शुरू हो गया है। हालांकि, न्यूयॉर्क में दिए गए उनके संबोधन का मुख्य संदेश विविधता, एकता, संवेदना और जिम्मेदारी के इर्द-गिर्द रहा।

digitallivenews.com

Also Read

रुपया 95 के पार, डॉलर के आगे टूटा बाजार

EAM Jaishankar ने Iranian Foreign Minister Abbas Araghchi से की बातचीत

Petrol-Diesel सस्ता कब होगा? 2-3 महीने वाला पूरा गणित समझिए

यूपी में चुनावी अभियान शुरू करेंगे चिराग पासवान, विपक्ष पर निशाना

भ्रष्टाचार में 6 पुलिसकर्मी निलंबित

You Might Also Like

रोहित रॉय के बयान पर मुकेश छाबड़ा का पलटवार, टीवी एक्टर्स का समर्थन

अनुपमा से वसुधा तक, टीवी सीरियल्स में आएंगे बड़े ट्विस्ट

महिला एशिया कप फाइनल: श्रीलंका से बदला लेने उतरेगा भारत

निगार सुल्ताना ने नहीं मिलाया हरमनप्रीत से हाथ, कप्तानी पर फैसला जल्द

पूर्व राज्यपाल कलराज मिश्रा की पत्नी का निधन, योगी ने जताया दुख

वाराणसी में घटा गंगा का जलस्तर, नाव संचालन अभी भी बंद

2027 से पहले BJP ने कसी कमर, Gen-Z और जातीय समीकरण पर मंथन

गणेशोत्सव में मुंबई के 4 फुटओवर ब्रिज बंद, जांच में असुरक्षित

Select Your City