
Report By: Kiran Prakash Singh
अमेरिका ने ईरान पर फिलहाल नए सैन्य हमले से दूरी बनाने का संकेत दिया है। मार्को रुबियो ने आर्थिक प्रतिबंधों और दबाव की रणनीति बताई है।
26 अगस्त 2026 | digitallivenews.com
ईरान पर अमेरिका की नई रणनीति, सैन्य हमले के बजाय आर्थिक दबाव पर जोर
अमेरिका और ईरान के बीच तनाव के बीच अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने सहयोगी देशों के विदेश मंत्रियों के साथ बातचीत में वॉशिंगटन की मौजूदा रणनीति के संकेत दिए हैं। रिपोर्ट के मुताबिक, फिलहाल अमेरिका की ओर से ईरान के खिलाफ नए बड़े सैन्य हमले शुरू करने की उम्मीद नहीं है। इसके बजाय अमेरिका आर्थिक प्रतिबंधों और अन्य दबाव के तरीकों पर ज्यादा ध्यान दे रहा है।
यह रुख ऐसे समय सामने आया है जब ईरान और अमेरिका के बीच तनाव का असर होर्मुज जलडमरूमध्य और वैश्विक ऊर्जा बाजारों पर भी पड़ रहा है। अमेरिकी अधिकारियों के अनुसार, वॉशिंगटन फिलहाल सैन्य अभियान को बढ़ाने के बजाय ईरान पर आर्थिक और रणनीतिक दबाव बनाए रखना चाहता है।
रुबियो ने सहयोगी देशों को क्या बताया?
Axios की रिपोर्ट के मुताबिक, मार्को रुबियो ने कई देशों के विदेश मंत्रियों से फोन पर बातचीत की। इन बातचीत में उन्होंने अमेरिका की ईरान नीति को लेकर मौजूदा रुख स्पष्ट किया।
रिपोर्ट के अनुसार, अमेरिका फिलहाल बड़े पैमाने पर नए सैन्य अभियानों में लौटने की योजना नहीं बना रहा है। हालांकि, अमेरिकी अधिकारियों ने यह भी स्पष्ट किया है कि अगर ईरान की ओर से पहले हमला किया जाता है तो अमेरिका की सैन्य प्रतिक्रिया की संभावना को पूरी तरह खारिज नहीं किया गया है।
इससे संकेत मिलता है कि अमेरिका एक ओर तनाव को और बढ़ाने से बचना चाहता है, वहीं दूसरी ओर ईरान पर दबाव कम करने के पक्ष में भी नहीं है।
सैन्य कार्रवाई की जगह आर्थिक प्रतिबंधों पर जोर
अमेरिका की नई रणनीति में आर्थिक दबाव को अहम स्थान दिया गया है। रिपोर्ट के मुताबिक, अमेरिकी ट्रेजरी विभाग की ओर से लगाए गए नए प्रतिबंधों के जरिए ईरान पर दबाव बढ़ाने की तैयारी है।
अमेरिका का लक्ष्य ईरान की आर्थिक गतिविधियों पर असर डालना और उसके ऊपर अंतरराष्ट्रीय दबाव बनाए रखना है। इसके साथ ही होर्मुज जलडमरूमध्य के जरिए वैश्विक बाजारों तक तेल की आपूर्ति को यथासंभव जारी रखने की कोशिश की जा रही है।
एक अमेरिकी अधिकारी के मुताबिक, कम से कम मध्यावधि चुनावों तक यही रणनीति जारी रहने की उम्मीद है। इसके बाद हालात के आधार पर सैन्य विकल्पों पर दोबारा विचार किया जा सकता है।
होर्मुज जलडमरूमध्य बना रणनीति का अहम हिस्सा
ईरान को लेकर अमेरिकी रणनीति में होर्मुज जलडमरूमध्य की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण हो गई है। यह जलमार्ग वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति के लिए प्रमुख रास्तों में से एक है।
रिपोर्ट के मुताबिक, अमेरिकी नौसेना की ओर से होर्मुज में बारूदी सुरंगों को हटाने की कार्रवाई को युद्ध की स्थिति में महत्वपूर्ण बदलाव के तौर पर देखा जा रहा है। अमेरिकी अधिकारी का दावा है कि इससे ईरान की दबाव बनाने की क्षमता प्रभावित हुई है।
हालांकि, इस पूरे घटनाक्रम का असर अंतरराष्ट्रीय शिपिंग और ऊर्जा बाजार पर बना हुआ है।
मंगलवार को सिर्फ 5 कमोडिटी जहाज गुजरे
रॉयटर्स की रिपोर्ट के अनुसार, मंगलवार को होर्मुज जलडमरूमध्य से गुजरने वाले कमोडिटी जहाजों की संख्या 5 रही। यह संख्या पिछले दिन के मुकाबले लगभग समान रही, लेकिन सामान्य औसत की तुलना में काफी कम बताई गई है।
शिप-ट्रैकिंग कंपनी Kpler के शुरुआती आंकड़ों के मुताबिक, दो LPG टैंकर और बिटुमेन ले जा रहा एक टैंकर जलडमरूमध्य से बाहर निकला। वहीं कुछ खाली प्रोडक्ट टैंकर इस जलमार्ग में दाखिल हुए।
कम जहाजों की आवाजाही से यह साफ है कि क्षेत्र में तनाव का असर समुद्री व्यापार पर भी दिखाई दे रहा है।
अमेरिका-ईरान तनाव पर दुनिया की नजर
अमेरिका की मौजूदा नीति से संकेत मिलता है कि वॉशिंगटन फिलहाल सीधी सैन्य कार्रवाई से बचते हुए दबाव की रणनीति अपनाना चाहता है। आर्थिक प्रतिबंध, नौसैनिक गतिविधियां और ऊर्जा आपूर्ति को बनाए रखने की कोशिश इस रणनीति के प्रमुख हिस्से हैं।
दूसरी ओर, ईरान की प्रतिक्रिया और होर्मुज जलडमरूमध्य की स्थिति आने वाले दिनों में बेहद महत्वपूर्ण रहेगी। अगर यहां जहाजों की आवाजाही प्रभावित होती है तो इसका असर केवल अमेरिका और ईरान तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि वैश्विक ऊर्जा बाजारों और अंतरराष्ट्रीय व्यापार पर भी पड़ सकता है।
फिलहाल अमेरिका की ओर से यही संकेत दिया जा रहा है कि नए बड़े हमले की तत्काल योजना नहीं है, लेकिन ईरान की ओर से किसी सैन्य कार्रवाई की स्थिति में अमेरिकी प्रतिक्रिया की संभावना खुली रखी गई है। इससे दोनों देशों के बीच तनाव कम होने के बजाय फिलहाल एक नियंत्रित लेकिन संवेदनशील स्थिति में बना हुआ है।