बिहार में 159 बच्चों के लिए सिर्फ 2 कमरे, टीन शेड में पढ़ाई

Report By: Kiran Prakash Singh

मधेपुरा के बेरवा स्कूल में 159 बच्चों की पढ़ाई सिर्फ दो कमरों और टीन शेड में हो रही है। भवन के लिए मंजूर राशि जमीन न मिलने से वापस लौट गई।

26 अगस्त 2026 | digitallivenews.com


159 बच्चों के लिए सिर्फ दो कमरे, टीन शेड में चल रही पढ़ाई

बिहार के मधेपुरा जिले के उत्क्रमित मध्य विद्यालय, बेरवा से शिक्षा व्यवस्था की एक चिंताजनक तस्वीर सामने आई है। कक्षा एक से आठ तक के कुल 159 बच्चों की पढ़ाई महज दो कमरों और एक टीन शेड के सहारे चल रही है। स्कूल में जगह की कमी का असर सीधे बच्चों की पढ़ाई और शिक्षकों की कार्यप्रणाली पर पड़ रहा है।

विद्यालय में हालात ऐसे हैं कि एक कमरे में कक्षा एक से पांच तक के बच्चों को एक साथ बैठाकर पढ़ाया जाता है, जबकि दूसरे कमरे में कक्षा छह से आठ तक के विद्यार्थियों की कक्षाएं संचालित होती हैं। अलग-अलग कक्षाओं के बच्चों को एक ही जगह पढ़ाने से शिक्षकों के सामने भी बड़ी चुनौती खड़ी हो गई है।

एक कमरे में कई कक्षाएं, पढ़ाई पर पड़ रहा असर

विद्यालय में कमरों की कमी के कारण अलग-अलग कक्षाओं को स्वतंत्र रूप से पढ़ाना संभव नहीं हो पा रहा है। एक ही कमरे में कई कक्षाओं के बच्चे बैठते हैं और शिक्षक अलग-अलग विषयों को पढ़ाने की कोशिश करते हैं।

ऐसी स्थिति में जहां एक तरफ गणित का पाठ चल रहा होता है, वहीं दूसरी ओर भाषा या किसी अन्य विषय की पढ़ाई होती है। इससे बच्चों का ध्यान बंटने की संभावना रहती है और शिक्षकों के लिए सभी विद्यार्थियों तक प्रभावी ढंग से पहुंचना मुश्किल हो जाता है।

शिक्षकों का कहना है कि सीमित संसाधनों के बावजूद वे बच्चों को बेहतर शिक्षा देने का प्रयास कर रहे हैं, लेकिन पर्याप्त कमरों के बिना यह काम बेहद कठिन हो रहा है।

टीन शेड में पढ़ने को मजबूर हैं बच्चे

स्कूल में टीन शेड का इस्तेमाल भी कक्षाओं के लिए किया जा रहा है। गर्मी के मौसम में टीन की छत काफी गर्म हो जाती है। ऐसे माहौल में बच्चों के लिए लंबे समय तक बैठकर पढ़ाई करना मुश्किल हो सकता है।

विद्यालय में प्रधानाध्यापक समेत कुल पांच शिक्षक हैं। शिक्षकों की संख्या और विद्यार्थियों की संख्या के बीच भी अतिरिक्त व्यवस्था की जरूरत महसूस की जा रही है। शिक्षक राधेश्याम राम के मुताबिक, कक्षा छह से आठ तक के बच्चों को एक ही कमरे में बैठाकर पढ़ाना पड़ता है।

उनका कहना है कि इस व्यवस्था के कारण पढ़ाने में काफी परेशानी होती है और बच्चों का पाठ्यक्रम समय पर पूरा करना चुनौती बन जाता है।

भवन निर्माण के लिए राशि आई, लेकिन जमीन नहीं मिली

इस मामले का सबसे अहम पहलू यह है कि स्कूल भवन निर्माण के लिए राशि स्वीकृत होकर आई थी, लेकिन जमीन उपलब्ध नहीं होने के कारण निर्माण कार्य शुरू नहीं हो सका।

जमीन की समस्या के चलते भवन निर्माण की योजना आगे नहीं बढ़ पाई और स्वीकृत राशि वापस लौट गई। ऐसे में स्कूल के पास आज भी पर्याप्त भवन नहीं है और बच्चों को उपलब्ध जगह में ही पढ़ाई करनी पड़ रही है।

प्रधानाध्यापक प्रमोद कुमार के अनुसार, स्कूल में 159 बच्चे नामांकित हैं। इनमें रोजाना करीब 90 से 110 विद्यार्थी स्कूल पहुंचते हैं। बच्चों की संख्या के मुकाबले उपलब्ध कमरे बेहद कम हैं।

विभाग को कई बार दी गई जानकारी

विद्यालय प्रशासन का कहना है कि भवन और अन्य सुविधाओं में सुधार के लिए संबंधित विभाग को कई बार लिखित रूप से जानकारी दी जा चुकी है। स्कूल की जरूरतों और कमरों की कमी से अधिकारियों को अवगत कराया गया है।

इसके बावजूद अभी तक समस्या का स्थायी समाधान नहीं हो सका है। विद्यालय प्रशासन के सामने सबसे बड़ी चुनौती यह है कि सीमित संसाधनों में आठवीं कक्षा तक के बच्चों की पढ़ाई को व्यवस्थित तरीके से कैसे संचालित किया जाए।

बच्चों की नियमित उपस्थिति को देखते हुए अतिरिक्त कमरों की जरूरत और भी ज्यादा महसूस होती है।

बच्चों की पढ़ाई और व्यवस्था पर उठे सवाल

बेरवा स्कूल की स्थिति ने सरकारी स्कूलों में बुनियादी सुविधाओं को लेकर सवाल खड़े कर दिए हैं। एक ओर स्कूल में बच्चों की पढ़ाई जारी है और शिक्षक अपनी जिम्मेदारी निभाने की कोशिश कर रहे हैं, वहीं दूसरी ओर पर्याप्त भवन नहीं होने के कारण विद्यार्थियों को टीन शेड और साझा कमरों में पढ़ना पड़ रहा है।

सबसे बड़ा सवाल यह है कि जब भवन निर्माण के लिए राशि स्वीकृत हुई थी, तो जमीन की व्यवस्था क्यों नहीं हो सकी? स्वीकृत राशि वापस लौटने के बाद अब स्कूल के लिए नया भवन कब बनेगा, यह भी अहम सवाल है।

फिलहाल बेरवा स्कूल के 159 बच्चों और उनके अभिभावकों को उम्मीद है कि संबंधित विभाग इस समस्या को गंभीरता से लेगा और जल्द ही पर्याप्त कक्षाओं वाले भवन की व्यवस्था करेगा। इससे बच्चों को बेहतर वातावरण में पढ़ाई का अवसर मिलेगा और शिक्षकों के लिए भी सभी कक्षाओं का पाठ्यक्रम व्यवस्थित तरीके से पूरा करना आसान हो सकेगा।

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