
Report By: Kiran Prakash Singh
मल्लिकार्जुन खरगे ने चीनी महंगी होने और E20 नीति पर सरकार को घेरा। BJP के अमित मालवीय ने उत्पादन, स्टॉक और आयात के आंकड़ों से जवाब दिया।
22 अगस्त 2026 | digitallivenews.com
चीनी कीमतों पर खरगे का हमला, BJP ने आंकड़ों से दिया जवाब
चीनी की बढ़ती कीमतों को लेकर खरगे ने सरकार पर साधा निशाना
चीनी की बढ़ती कीमतों को लेकर कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने केंद्र सरकार पर निशाना साधा है। शनिवार, 22 अगस्त को खरगे ने चीनी की कीमतों में बढ़ोतरी और देश में घटते स्टॉक को लेकर सरकार से सवाल किए। उन्होंने इसके साथ ही इथेनॉल और E20 नीति को लेकर भी केंद्र से जवाब मांगा।
खरगे ने दावा किया कि पिछले कुछ महीनों में चीनी की कीमतों में करीब 40 फीसदी तक बढ़ोतरी हुई है। उन्होंने सवाल उठाया कि त्योहारों से पहले आम लोगों पर महंगाई का बोझ क्यों बढ़ रहा है और सरकार को विदेश से चीनी आयात करने की जरूरत क्यों पड़ी।
खरगे ने पूछे सरकार से तीन बड़े सवाल
खरगे ने कहा कि भारत दुनिया के प्रमुख चीनी उत्पादक और निर्यातक देशों में शामिल है, इसके बावजूद देश में चीनी का स्टॉक नौ साल के निचले स्तर पर क्यों पहुंच गया है।
उन्होंने सवाल किया कि स्थिति ऐसी क्यों बनी कि चीनी के निर्यात पर रोक लगानी पड़ी और करीब 10 लाख टन चीनी आयात करने का फैसला लेना पड़ा।
कांग्रेस अध्यक्ष ने यह भी पूछा कि जब घरेलू बाजार में चीनी की उपलब्धता को लेकर चिंता जताई जा रही है, तो गन्ने और अनाज से एथेनॉल बनाने की नीति की समीक्षा क्यों नहीं की जा रही है।
खरगे का तर्क है कि E20 नीति के कारण गन्ने और अन्य कृषि उत्पादों का एक हिस्सा एथेनॉल उत्पादन में जा रहा है, जिससे चीनी की उपलब्धता पर असर पड़ सकता है।
अमित मालवीय ने आंकड़ों के साथ दिया जवाब
खरगे के आरोपों पर बीजेपी नेता अमित मालवीय ने पलटवार किया। उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर पोस्ट करते हुए कहा कि चीनी की कीमत, स्टॉक और आयात को सीधे E20 से जोड़ना राजनीतिक रूप से सुविधाजनक हो सकता है, लेकिन उपलब्ध आंकड़े इसकी पुष्टि नहीं करते।
मालवीय के मुताबिक, मौजूदा स्थिति की मुख्य वजह चीनी उत्पादन में कमी, स्थिर खपत और घटता क्लोजिंग स्टॉक है।
उन्होंने बताया कि 2025-26 सीजन के लिए शुरुआती उत्पादन अनुमान करीब 349 लाख टन था, लेकिन बाद में यह घटकर लगभग 280 लाख टन रह गया। बीजेपी नेता के अनुसार उत्पादन में आई इस बड़ी गिरावट ने घरेलू चीनी बाजार पर दबाव बढ़ाया है।
BJP का दावा- E20 को वजह बताना सही नहीं
अमित मालवीय ने खरगे के उस सवाल का भी जवाब दिया जिसमें उन्होंने पूछा था कि चीनी की कमी के बावजूद गन्ने और अनाज को E20 के लिए एथेनॉल बनाने में क्यों इस्तेमाल किया जा रहा है।
मालवीय ने कहा कि E20 को चीनी की कमी का मुख्य कारण बताना सही नहीं है। उन्होंने दावा किया कि भारत E20 कार्यक्रम से पहले भी चीनी का आयात करता रहा है।
उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि UPA-II के दौरान 2009-10 से 2013-14 के बीच भारत ने कुल 75.25 लाख टन चीनी का आयात किया था। अकेले 2009-10 में करीब 41.8 लाख टन चीनी आयात की गई थी।
उनका कहना है कि उस समय E20 का सवाल ही नहीं था। इसलिए मौजूदा चीनी आयात को केवल एथेनॉल नीति से जोड़ना उचित नहीं है।
चीनी आयात पर भी BJP ने रखी अपनी बात
अमित मालवीय ने कहा कि चीनी का आयात शुगर बैलेंस के आधार पर किया जाता है। इसके लिए उत्पादन, घरेलू खपत, उपलब्ध स्टॉक और बाजार की परिस्थितियों को ध्यान में रखा जाता है।
उन्होंने यह भी कहा कि हर आयातित चीनी घरेलू उपभोग के लिए नहीं होती। उनके अनुसार कच्ची चीनी का कुछ हिस्सा प्रोसेसिंग और री-एक्सपोर्ट के लिए भी इस्तेमाल किया जाता है।
बीजेपी नेता ने दावा किया कि मौजूदा समय में चीनी की कीमतों पर दबाव का प्रमुख कारण उत्पादन और स्टॉक में कमी है। ऐसे में घरेलू बाजार में उपलब्धता बनाए रखने के लिए आयात को एक नीतिगत प्रक्रिया के तौर पर देखा जाना चाहिए।
चीनी, इथेनॉल और E20 पर सियासी बहस तेज
चीनी की कीमतों को लेकर कांग्रेस और बीजेपी के बीच अब E20 नीति और इथेनॉल उत्पादन भी राजनीतिक बहस का बड़ा मुद्दा बन गया है।
कांग्रेस जहां चीनी की कीमतों और घटते स्टॉक को सरकार की नीतियों से जोड़ रही है, वहीं बीजेपी का कहना है कि इसके पीछे मुख्य कारण उत्पादन में गिरावट और स्टॉक की कमी है।
आने वाले दिनों में त्योहारों के दौरान चीनी की मांग बढ़ने की संभावना के बीच इस मुद्दे पर राजनीतिक बयानबाजी और तेज हो सकती है। फिलहाल दोनों पक्ष अपने-अपने तर्क और आंकड़ों के जरिए जनता के सामने अपनी बात रख रहे हैं।
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