
Report By: Kiran Prakash Singh
मक्का में पहली बार हवाई खतरे का अलर्ट जारी हुआ। सऊदी अरब ने हूती ड्रोन रोकने का दावा किया, जबकि हूतियों ने मक्का को निशाना बनाने से इनकार किया। जानें पूरा इतिहास।
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मक्का पर फिर मंडराया खतरा, इतिहास में भी कई बार संकट से घिर चुका है पवित्र शहर
इस्लाम के सबसे पवित्र शहर मक्का को लेकर सितंबर 2026 में सुरक्षा संबंधी घटनाक्रम ने दुनिया का ध्यान खींचा है। सऊदी अरब के नेतृत्व वाले गठबंधन के मुताबिक, मक्का के प्रतिबंधित हवाई क्षेत्र में प्रवेश करने से पहले एक हूती ड्रोन को इंटरसेप्ट कर नष्ट कर दिया गया। इसके बाद मक्का में पहली बार हवाई खतरे से जुड़ा आपातकालीन अलर्ट जारी किए जाने की रिपोर्ट सामने आई।
हालांकि, हूती पक्ष ने मक्का को निशाना बनाने के आरोप को खारिज किया है। ऐसे में मौजूदा घटना में सऊदी दावे और हूती पक्ष के इनकार, दोनों को ध्यान में रखना जरूरी है।
2026 में पहली बार मक्का में एयर अलर्ट
सितंबर 2026 में सऊदी अधिकारियों ने मक्का और आसपास के इलाकों में सुरक्षा चेतावनी जारी की। सऊदी नेतृत्व वाले गठबंधन के प्रवक्ता तुर्की अल-मलिकी के अनुसार, मक्का के दक्षिण में एक ड्रोन को प्रतिबंधित हवाई क्षेत्र में प्रवेश करने से पहले रोक दिया गया।
सऊदी पक्ष ने इस घटना को गंभीर सुरक्षा खतरे के तौर पर देखा और कहा कि मक्का और वहां आने वाले जायरीनों की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता है। रिपोर्टों के अनुसार, अलर्ट कुछ समय बाद हटा दिया गया।
वहीं हूती प्रवक्ता ने मक्का को निशाना बनाने की बात से इनकार किया और सऊदी दावे को गलत बताया। इसलिए घटना के उद्देश्य को लेकर दोनों पक्षों के बयान अलग-अलग हैं।
2017 में भी मक्का की ओर मिसाइल का दावा
मक्का को लेकर इससे पहले बड़ा विवाद जुलाई 2017 में सामने आया था। उस समय सऊदी नेतृत्व वाले गठबंधन ने दावा किया था कि यमन से हूती विद्रोहियों द्वारा मक्का की दिशा में बैलिस्टिक मिसाइल दागी गई, जिसे मक्का से करीब 69 किलोमीटर दूर रोक लिया गया था।
हालांकि, हूती पक्ष ने उस समय कहा था कि मिसाइल का लक्ष्य ताइफ स्थित किंग फहद एयर बेस था, न कि मक्का। इस वजह से उस घटना में भी लक्ष्य को लेकर दोनों पक्षों के दावे अलग रहे।
1979 में ग्रैंड मस्जिद पर हुआ कब्जा
मक्का के आधुनिक इतिहास की सबसे गंभीर घटनाओं में 1979 का ग्रैंड मस्जिद कब्जा शामिल है। नवंबर 1979 में जुहैमान अल-उतैबी के नेतृत्व में सशस्त्र समूह ने मस्जिद अल-हरम पर कब्जा कर लिया था।
घटना के दौरान श्रद्धालुओं को बंधक बनाया गया और समूह के एक सदस्य को महदी के रूप में पेश किया गया। सऊदी सुरक्षा बलों ने कई दिनों की कार्रवाई के बाद मस्जिद परिसर पर दोबारा नियंत्रण हासिल किया। यह संकट करीब दो सप्ताह तक चला और इसके बाद सऊदी अरब की सुरक्षा तथा धार्मिक नीतियों पर भी इसका गहरा प्रभाव पड़ा।
683 और 692 में मक्का की घेराबंदी
इस्लाम के शुरुआती राजनीतिक इतिहास में भी मक्का संघर्षों से अछूता नहीं रहा। 683 ईस्वी में उमय्यद सेना ने अब्दुल्ला इब्न अल-जुबैर के समर्थकों के खिलाफ मक्का की घेराबंदी की। ऐतिहासिक स्रोतों के अनुसार, उस संघर्ष में काबा को भी नुकसान पहुंचा।
इसके बाद 692 ईस्वी में उमय्यद शासक अब्द अल-मलिक के सेनापति अल-हज्जाज इब्न यूसुफ ने फिर मक्का की घेराबंदी की। लंबे संघर्ष के बाद इब्न अल-जुबैर की हार हुई और उमय्यद शासन का नियंत्रण स्थापित हुआ। मक्का के इन संघर्षों को उस दौर के सत्ता संघर्ष और दूसरे फितना के संदर्भ में देखा जाता है।
930 में कर्मतियों का हमला और हजर-ए-अस्वद
मक्का के इतिहास की सबसे चर्चित घटनाओं में 930 ईस्वी का कर्मती हमला भी शामिल है। कर्मती नेता अबू ताहिर अल-जनाबी के नेतृत्व में समूह ने मक्का पर हमला किया। ऐतिहासिक विवरणों के अनुसार, इस हमले के दौरान तीर्थयात्रियों पर हिंसा हुई और हजर-ए-अस्वद को मक्का से ले जाया गया।
ब्लैक स्टोन को कई वर्षों तक मक्का से बाहर रखा गया और बाद में वापस लाया गया। यह घटना मक्का के इतिहास में धार्मिक और राजनीतिक संघर्ष के एक बेहद महत्वपूर्ण अध्याय के रूप में दर्ज है।
आज सितंबर 2026 की घटना ने एक बार फिर मक्का की सुरक्षा को अंतरराष्ट्रीय चर्चा के केंद्र में ला दिया है। सऊदी अरब ने जहां ड्रोन को मक्का की ओर बढ़ता हुआ बताया है, वहीं हूती पक्ष ने इस आरोप को खारिज किया है। ऐसे में मौजूदा घटनाक्रम की रिपोर्टिंग में दोनों पक्षों के दावों को अलग-अलग समझना जरूरी है।
तारीख: 16 सितंबर 2026
digitallivenews.com