कैबिनेट से बाहर होने पर छलका दिनेश गुंडू राव का दर्द

Report By: Kiran Prakash Singh

कर्नाटक कैबिनेट विस्तार में जगह न मिलने पर कांग्रेस विधायक दिनेश गुंडू राव ने सोशल मीडिया पर निराशा जताई। उनकी पत्नी ने भी फैसले पर सवाल उठाते हुए नाराजगी जाहिर की।

कैबिनेट में जगह नहीं मिलने पर दिनेश गुंडू राव की नाराजगी सामने आई

कैबिनेट से बाहर होने पर जताई निराशा

कर्नाटक के कांग्रेस के वरिष्ठ विधायक दिनेश गुंडू राव ने मुख्यमंत्री डी.के. शिवकुमार के नेतृत्व वाले मंत्रिमंडल में शामिल न किए जाने पर सोशल मीडिया के जरिए निराशा व्यक्त की।

वर्षों की सेवा का किया जिक्र

राव ने कहा कि विधायक और मंत्री के रूप में उन्होंने कर्नाटक के लोगों की सेवा पूरी निष्ठा से की। उन्होंने लिखा कि छह बार विधायक बनना जनता के भरोसे का परिणाम है और यही उनके लिए सबसे बड़ी उपलब्धि है।

कारण नहीं बताए जाने पर सवाल

उन्होंने कहा कि राज्य और पार्टी की वर्षों की सेवा के बावजूद उन्हें मंत्रिमंडल में जगह नहीं मिली और सबसे अधिक निराशा इस बात की है कि उन्हें बाहर रखने का कोई कारण भी नहीं बताया गया

कैबिनेट में एक पद अब भी खाली

कर्नाटक में मुख्यमंत्री सहित कुल 34 मंत्री पद हैं। हालिया कैबिनेट विस्तार के बाद भी एक मंत्री पद अभी खाली है, जिसे आगे भरा जा सकता है।

पत्नी ने भी उठाए सवाल

दिनेश गुंडू राव की पत्नी ने सोशल मीडिया पर लिखा कि उनके पति स्वास्थ्य मंत्री रहते हुए कई बड़े बदलाव लाए, पार्टी के कठिन दौर में भी वफादार रहे और छह बार विधायक चुने गए। उन्होंने सवाल उठाया कि आखिर उन्हें क्यों दरकिनार किया गया और कहा कि “आखिरकार बात जाति पर आकर रुक जाती है, काम पर नहीं।”


कैबिनेट से बाहर होने पर छलका दिनेश गुंडू राव का दर्द

4 अगस्त 2026 | digitallivenews.com

कर्नाटक में कैबिनेट विस्तार के बाद वरिष्ठ कांग्रेस विधायक दिनेश गुंडू राव ने मंत्रिमंडल में जगह न मिलने पर निराशा जताई। सोशल मीडिया पर उन्होंने लिखा कि वर्षों तक विधायक और मंत्री के रूप में जनता और पार्टी की सेवा करने के बावजूद उन्हें इस बार मंत्रिमंडल में शामिल नहीं किया गया और इसकी कोई वजह भी नहीं बताई गई। राव ने जनता के भरोसे और अपने छह बार विधायक चुने जाने का भी उल्लेख किया। वहीं उनकी पत्नी ने भी फैसले पर सवाल उठाते हुए कहा कि दिनेश गुंडू राव ने स्वास्थ्य मंत्री रहते हुए कई अहम बदलाव किए और पार्टी के कठिन समय में भी निष्ठा दिखाई, फिर भी उन्हें दरकिनार कर दिया गया। उन्होंने आरोप लगाया कि काम से ज्यादा जाति को महत्व दिया गया, जिससे वे भी हैरान हैं।

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