
Reprot By: Kiran Prakash Singh
TMC नेता सुजीत बोस की जमानत याचिका पर सुनवाई कर रहीं जस्टिस सुव्र घोष ने खुद को अलग कर लिया। केस अब कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश के पास भेजा गया।
21 अगस्त 2026 | digitallivenews.com
सुजीत बोस की जमानत पर बड़ा ट्विस्ट, जज ने केस से खुद को अलग किया
जमानत याचिका की सुनवाई कर रहीं जस्टिस सुव्र घोष ने लिया फैसला
तृणमूल कांग्रेस (TMC) नेता और पश्चिम बंगाल के पूर्व मंत्री सुजीत बोस की जमानत याचिका के मामले में कलकत्ता हाईकोर्ट से बड़ा अपडेट सामने आया है। मामले की सुनवाई कर रहीं जस्टिस सुव्र घोष ने खुद को इस केस से अलग कर लिया है। जज ने अपने आदेश में चैंबर में हुई एक घटना का जिक्र करते हुए इस कदम की जानकारी दी।
मामला अब आगे के निर्देश के लिए कलकत्ता हाईकोर्ट के कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश के पास भेज दिया गया है। अब यह तय किया जाएगा कि सुजीत बोस की जमानत याचिका की अगली सुनवाई किस जज या पीठ के सामने होगी।
फैसला सुरक्षित होने के अगले दिन चैंबर पहुंचा वकील
जस्टिस सुव्र घोष ने 19 अगस्त को जारी आदेश में बताया कि सुजीत बोस की जमानत याचिका पर 17 अगस्त को फैसला सुरक्षित रखा गया था। इसके अगले दिन यानी 18 अगस्त को एक ऐसी घटना हुई, जिसके बाद उन्होंने इस मामले से अलग होने का फैसला किया।
आदेश के मुताबिक, सुजीत बोस की ओर से पेश एक वकील अपनी निजी सचिव के साथ जज के चैंबर में पहुंचे। दोनों ने चैंबर के बाहर मौजूद कोर्ट कर्मचारियों से केस की फाइल लाने को कहा।
कर्मचारियों ने फाइल उपलब्ध कराने से इनकार कर दिया। इसके बाद दोनों ने चैंबर के अंदर जाने और केस के रिकॉर्ड को देखने की कोशिश की। कोर्ट कर्मचारियों ने इसका विरोध किया।
जज ने घटना पर जताई नाराजगी
इस घटना को लेकर जस्टिस घोष ने नाराजगी जताई। आदेश में उन्होंने कहा कि केस का रिकॉर्ड देखने की कोशिश से ऐसा प्रतीत होता है कि इसके पीछे कोई अप्रत्यक्ष या गलत मकसद हो सकता है।
इसके बाद जस्टिस सुव्र घोष ने सुजीत बोस की जमानत याचिका की सुनवाई से खुद को अलग कर लिया। उन्होंने निर्देश दिया कि मामले को आगे के निर्देश के लिए कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश के सामने रखा जाए।
अब कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश के निर्देश के बाद ही यह स्पष्ट होगा कि जमानत याचिका की सुनवाई आगे किस पीठ के सामने होगी।
नगरपालिका भर्ती मामले में ED ने किया था गिरफ्तार
सुजीत बोस पश्चिम बंगाल सरकार में मंत्री रह चुके हैं और TMC के प्रमुख नेताओं में गिने जाते हैं। उन्हें प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने नगरपालिका भर्ती में कथित अनियमितताओं से जुड़े मामले में गिरफ्तार किया था।
ED की जांच के अनुसार, दक्षिण दमदम नगरपालिका में अलग-अलग पदों पर करीब 150 लोगों की कथित तौर पर गलत तरीके से सिफारिश किए जाने का आरोप है। जांच एजेंसी का दावा है कि नगरपालिका में नौकरी दिलाने के बदले कथित तौर पर अवैध तरीके से पैसे लिए गए।
इस मामले में ED ने सुजीत बोस से पूछताछ भी की थी और जांच के दौरान उनसे जुड़े वित्तीय लेनदेन की भी जांच की गई।
ED का दावा- नौकरी के बदले खरीदे गए फ्लैट
जांच एजेंसी ने दावा किया था कि मामले की जांच के दौरान कुछ ऐसे फ्लैटों का पता चला, जिन्हें नगरपालिका में नौकरी दिलाने के बदले मिली कथित रकम से खरीदा गया था।
ED ने यह भी दावा किया कि सुजीत बोस के नियंत्रण वाले बैंक खातों में बड़ी रकम जमा होने से जुड़े सबूत जांच में सामने आए। जांच के सिलसिले में उन्हें कई बार समन भी भेजे गए थे।
गिरफ्तारी के बाद सुजीत बोस को विशेष अदालत के सामने पेश किया गया था। बाद में उन्होंने जमानत के लिए हाईकोर्ट का रुख किया। अब जमानत याचिका की सुनवाई कर रहीं जस्टिस सुव्र घोष के केस से अलग होने के बाद इस मामले में नया मोड़ आ गया है।
अब कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश के निर्देश का इंतजार है। उनके निर्देश के बाद ही तय होगा कि सुजीत बोस की जमानत याचिका पर आगे सुनवाई कौन-सी पीठ करेगी।
21 अगस्त 2026 | digitallivenews.com