दंबरम के बयान पर BJP का पलटवार, ‘दिमागी नक्सल’ पर घमासान

Report By: Kiran Prakash Singh

‘दिमागी नक्सल’ बयान पर BJP ने पी चिदंबरम को घेरा। सुधांशु त्रिवेदी ने कांग्रेस से नक्सलवाद पर रुख साफ करने और मनमोहन सिंह के बयान का जवाब देने को कहा।

‘दिमागी नक्सल’ पर सियासी संग्राम, BJP ने चिदंबरम को घेरा

17 अगस्त 2026 | digitallivenews.com

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ‘दिमागी नक्सल’ वाले बयान को लेकर शुरू हुआ राजनीतिक विवाद अब और तेज हो गया है। स्वतंत्रता दिवस के मौके पर लाल किले से प्रधानमंत्री के संबोधन में नक्सलवाद और वैचारिक स्तर पर उससे जुड़ी सोच का जिक्र किया गया था। इसके बाद कांग्रेस के वरिष्ठ नेता पी चिदंबरम की प्रतिक्रिया सामने आई, जिस पर भारतीय जनता पार्टी ने तीखा पलटवार किया है।

बीजेपी के प्रवक्ता सुधांशु त्रिवेदी ने चिदंबरम के बयान को आधार बनाकर कांग्रेस पर निशाना साधा और पार्टी से नक्सलवाद को लेकर अपना रुख स्पष्ट करने की मांग की। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री द्वारा ‘दिमागी नक्सल’ का विषय उठाए जाने के 24 घंटे के भीतर ही यह सामने आ गया कि इस शब्द को लेकर किसकी क्या सोच है।

सुधांशु त्रिवेदी ने चिदंबरम पर साधा निशाना

सुधांशु त्रिवेदी ने कहा कि प्रधानमंत्री ने ‘दिमागी नक्सल’ के मुद्दे पर देश को आगाह किया था, लेकिन इसके तुरंत बाद पी चिदंबरम का बयान सामने आ गया। चिदंबरम ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर प्रधानमंत्री की टिप्पणी पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा था कि उन्हें ‘दिमागी नक्सल’ होने पर गर्व है।

बीजेपी नेता ने इसी बयान को लेकर कांग्रेस से सवाल किया कि पार्टी की नक्सलवाद को लेकर वास्तविक सोच क्या है। उन्होंने कहा कि कांग्रेस को यह स्पष्ट करना चाहिए कि वह नक्सलवाद और उससे जुड़ी विचारधारा को किस नजरिए से देखती है।

मनमोहन सिंह के पुराने बयान का भी जिक्र

बीजेपी प्रवक्ता ने पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह के उस पुराने बयान का भी उल्लेख किया, जिसमें उन्होंने नक्सलवाद को देश की आंतरिक सुरक्षा के लिए गंभीर खतरा बताया था।

सुधांशु त्रिवेदी ने कांग्रेस के सामने सवाल रखा कि पार्टी मनमोहन सिंह के पुराने रुख को सही मानती है या फिर पी चिदंबरम के मौजूदा बयान को। उन्होंने कहा कि कांग्रेस को इस मुद्दे पर अपना रुख साफ करना चाहिए।

इस बयान के जरिए बीजेपी ने कांग्रेस के भीतर नक्सलवाद को लेकर मतभेद होने का सवाल भी उठाया है।

कांग्रेस शासन और ‘रेड कॉरिडोर’ का मुद्दा

सुधांशु त्रिवेदी ने कांग्रेस के नेतृत्व वाली पूर्व सरकारों के कार्यकाल का जिक्र करते हुए आरोप लगाया कि उस दौर में देश के कई हिस्सों में नक्सली हिंसा का प्रभाव काफी ज्यादा था।

उन्होंने ‘रेड कॉरिडोर’ का उल्लेख करते हुए दावा किया कि एक समय करीब 180 जिले नक्सली हिंसा से प्रभावित थे और हजारों लोगों की जान गई। बीजेपी नेता ने इसे पूर्ववर्ती सरकारों की नक्सल नीति से जोड़ते हुए कांग्रेस पर राजनीतिक हमला बोला।

हालांकि, इस तरह के राजनीतिक दावों को लेकर कांग्रेस की ओर से अलग-अलग समय पर अपनी प्रतिक्रिया सामने आती रही है।

नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में बदलाव का दावा

बीजेपी नेता ने केंद्र सरकार के प्रयासों का उल्लेख करते हुए दावा किया कि देश में नक्सलवाद का प्रभाव काफी कम हुआ है। उन्होंने 31 मई 2026 को सरकार की ओर से हासिल उपलब्धियों का जिक्र किया और दावा किया कि अब नक्सल प्रभावित जिलों की संख्या शून्य हो गई है।

उन्होंने केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के कार्यकाल में नक्सल प्रभावित इलाकों में हुए बदलाव का भी उल्लेख किया। त्रिवेदी ने कहा कि बस्तर जैसे क्षेत्र, जिसे पहले नक्सली हिंसा के लिए जाना जाता था, वहां अब विकास और सामाजिक गतिविधियों को बढ़ावा मिल रहा है।

‘दिमागी नक्सल’ बयान से शुरू हुआ विवाद

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 15 अगस्त 2026 को लाल किले से दिए स्वतंत्रता दिवस भाषण में नक्सलवाद पर बात करते हुए कहा था कि हथियार उठाने वाले नक्सलियों का प्रभाव काफी हद तक समाप्त हो चुका है, लेकिन वैचारिक स्तर पर नक्सली सोच को बढ़ावा देने वालों से सावधान रहने की जरूरत है। इसी संदर्भ में उन्होंने ‘दिमागी नक्सल’ शब्द का इस्तेमाल किया था।

प्रधानमंत्री के इस बयान पर विपक्ष की ओर से तीखी प्रतिक्रिया आई। कांग्रेस नेता पी चिदंबरम ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उन्हें ‘दिमागी नक्सल’ होने पर गर्व है।

इसके बाद बीजेपी ने कांग्रेस पर हमला तेज कर दिया। सुधांशु त्रिवेदी ने चिदंबरम के बयान को प्रधानमंत्री की टिप्पणी के संदर्भ में जोड़ते हुए कांग्रेस से कई सवाल पूछे। उन्होंने कहा कि नक्सलवाद के खिलाफ लड़ाई को लेकर कांग्रेस को स्पष्ट राजनीतिक और वैचारिक रुख सामने रखना चाहिए।

फिलहाल ‘दिमागी नक्सल’ शब्द को लेकर बीजेपी और कांग्रेस के बीच सियासी बयानबाजी जारी है। एक तरफ बीजेपी इसे नक्सली विचारधारा के खिलाफ चेतावनी बता रही है, वहीं विपक्ष प्रधानमंत्री के बयान की आलोचना कर रहा है। आने वाले दिनों में यह मुद्दा राजनीतिक बहस का एक और बड़ा केंद्र बन सकता है।

17 अगस्त 2026 | digitallivenews.com

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