
Report By: Kiran Prakash Singh
लखनऊ के अमीनाबाद में एफएसडीए ने फर्जी बिलिंग नेटवर्क का खुलासा किया। बंद फर्मों के नाम पर करोड़ों की दवाओं की खरीद-बिक्री दिखाने का आरोप है।
लखनऊ में फर्जी बिलिंग नेटवर्क का खुलासा, दवाओं के कारोबार पर बड़े सवाल
उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में दवाओं के फर्जी कारोबार से जुड़ा एक गंभीर मामला सामने आया है। खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन (एफएसडीए) की जांच में अमीनाबाद इलाके में कथित फर्जी बिलिंग नेटवर्क का खुलासा हुआ है। जांच के अनुसार, कुछ व्यापारियों ने बिना वास्तविक सप्लाई के ही करोड़ों रुपये की दवाओं की खरीद-बिक्री कागजों पर दिखाई।
आरोप है कि बंद फर्मों के नाम, फर्जी बिल और कागजी लेनदेन के जरिए संदिग्ध दवाओं को वैध सप्लाई चेन का हिस्सा दिखाने की कोशिश की गई। मामले में एफएसडीए की तहरीर पर अमीनाबाद थाने में चार लोगों के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया गया है।
चार कारोबारियों पर मुकदमा दर्ज
एफएसडीए की शिकायत के आधार पर अमीनाबाद थाने में हेल्थ प्लस के प्रोपराइटर अंकुर अवस्थी, एमके फार्मा के संचालक मनीष बाजपेयी, राम फार्मा के संचालक गोविंद शुक्ला और सहारनपुर स्थित पेशेंट केयर सर्जिकल हाउस के संचालक ऐजाज अहमद के खिलाफ मामला दर्ज किया गया है।
विभाग की ओर से मामले की जांच आगे बढ़ाई जा रही है। अधिकारियों के अनुसार, जांच के दौरान कई ऐसे लेनदेन सामने आए, जिनमें दवाओं की वास्तविक आपूर्ति के स्पष्ट प्रमाण नहीं मिले।
क्रॉस-बिलिंग से दिखाया करोड़ों का कारोबार
सहायक आयुक्त ब्रजेश सिंह के अनुसार, जांच में फर्मों के बीच क्रॉस-बिलिंग और फर्जी बिल तैयार किए जाने के संकेत मिले हैं। आरोप है कि बिना वास्तविक बैंक लेनदेन और दवाओं की सप्लाई के ही खरीद-बिक्री को रिकॉर्ड में दिखाया गया।
जांच एजेंसी को आशंका है कि इस तरीके से संदिग्ध दवाओं को वैध कारोबारी नेटवर्क में शामिल करने का प्रयास किया गया। विभाग अब यह पता लगाने में जुटा है कि कागजों पर दिखाई गई दवाओं की वास्तविक आवाजाही कहां हुई और उनका इस्तेमाल किस तरह किया गया।
हेल्थ प्लस पर भी उठे सवाल
जांच के दौरान हेल्थ प्लस से जुड़े रिकॉर्ड भी अधिकारियों के निशाने पर आए। विभाग के मुताबिक, फर्म के प्रोपराइटर अंकुर अवस्थी के पास बिना लाइसेंस के बड़ी मात्रा में दवाओं का भंडारण होने की बात सामने आई।
जांच में गोविंद शुक्ला की भूमिका को भी महत्वपूर्ण बताया गया है। विभाग के अनुसार, हेल्थ प्लस में उनकी करीब 20 प्रतिशत हिस्सेदारी थी। अधिकारियों ने फर्म से जुड़े दस्तावेजों और लेनदेन की जांच शुरू कर दी है।
बंद फर्म के नाम पर करोड़ों की खरीद
जांच में सहारनपुर की पेशेंट केयर सर्जिकल हाउस का नाम भी सामने आया। विभाग का कहना है कि यह फर्म करीब दो वर्षों से बंद थी। इसके बावजूद उसके नाम पर दवाओं की खरीद और कागजी लेनदेन दिखाए जाने की बात सामने आई।
इसके अलावा एमके फार्मा की ओर से वर्ष 2026 में करीब 8.87 करोड़ रुपये की दवाओं की खरीद रिकॉर्ड में दिखाए जाने की जानकारी सामने आई है। जांच के दौरान यह आशंका भी जताई गई कि इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्यों को छिपाने के लिए लैपटॉप का पुराना डेटा डिलीट किया गया।
39.20 लाख की दवा का रिकॉर्ड गायब
मामले में सबसे गंभीर बिंदुओं में से एक जोरिल एम-1 दवा से जुड़ा है। विभाग के अनुसार, एमके फार्मा के रिकॉर्ड में करीब 39.20 लाख रुपये की जोरिल एम-1 दवाओं का हिसाब नहीं मिला।
एफएसडीए को आशंका है कि रिकॉर्ड से गायब दवाओं को अवैध तरीके से बाजार में खपाया गया हो सकता है। यदि जांच में यह आरोप सही साबित होता है, तो मामला केवल वित्तीय अनियमितता तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि लोगों की सेहत से जुड़े गंभीर खतरे का विषय भी बन सकता है।
एफएसडीए अब फर्जी बिलिंग, संदिग्ध दवाओं की सप्लाई और फर्मों के बीच हुए लेनदेन की कड़ियों को जोड़ने में जुटा है। अधिकारियों का कहना है कि जांच के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।
आज की तारीख: 13 अगस्त 2026
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