
Report By: Kiran Prakash Singh
परिसीमन बिल पर अटकलों के बीच DMK ने साफ किया कि पार्टी पहले की तरह विरोध में है। उदयनिधि स्टालिन ने रुख दोहराया, तमिलनाडु में सियासी हलचल तेज।
परिसीमन बिल पर DMK का बड़ा ऐलान, मोदी सरकार के खिलाफ रुख कायम
📅 07 August 2026 | 🌐 digitallivenews.com
केंद्र सरकार की ओर से परिसीमन (Delimitation) विधेयक को दोबारा लाने के संकेतों के बाद तमिलनाडु की राजनीति में हलचल तेज हो गई है। इस बीच DMK के रुख को लेकर कई तरह की अटकलें लगाई जा रही थीं, लेकिन पार्टी नेता उदयनिधि स्टालिन ने साफ कर दिया कि DMK शुरुआत से ही परिसीमन का विरोध करती रही है और भविष्य में भी इसी रुख पर कायम रहेगी।
हाल के दिनों में ऐसी खबरें सामने आई थीं कि DMK कुछ शर्तों के साथ परिसीमन विधेयक का समर्थन कर सकती है। हालांकि, उदयनिधि स्टालिन ने इन अटकलों को खारिज करते हुए कहा कि पार्टी का रुख बिल्कुल नहीं बदला है। उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार इस मुद्दे को नया बताकर पेश कर रही है, जबकि DMK पहले दिन से इसका विरोध करती आई है।
DMK की तीन प्रमुख मांगें
पार्टी ने परिसीमन को लेकर तीन अहम मांगें रखी हैं। पहली मांग यह है कि 2011 की जनगणना के बजाय 1971 की जनगणना को अगले 25 वर्षों तक परिसीमन का आधार बनाया जाए। दूसरी मांग है कि सभी राज्यों की लोकसभा सीटों में समान रूप से 50 प्रतिशत बढ़ोतरी की जाए, ताकि किसी राज्य के साथ भेदभाव न हो।
तीसरी और महत्वपूर्ण मांग यह है कि प्रस्तावित विधेयक में राज्यवार सीटों की स्पष्ट सूची शामिल की जाए, जिससे यह साफ हो सके कि परिसीमन के बाद किस राज्य को कितनी लोकसभा सीटें मिलेंगी।
तमिलनाडु क्यों कर रहा विरोध?
तमिलनाडु समेत कई दक्षिणी राज्यों का कहना है कि उन्होंने वर्षों तक जनसंख्या नियंत्रण में बेहतर प्रदर्शन किया है। यदि परिसीमन केवल जनसंख्या के आधार पर किया गया तो अधिक जनसंख्या वाले राज्यों, खासकर उत्तर भारत, को ज्यादा लोकसभा सीटें मिलेंगी।
दक्षिणी राज्यों का मानना है कि इससे संसद में उनकी राजनीतिक हिस्सेदारी और निर्णय लेने की क्षमता कमजोर हो सकती है। साथ ही, राज्यों के बीच शक्ति संतुलन भी प्रभावित होने की आशंका जताई जा रही है।
50% सीटें बढ़ने पर भी रहेगा अंतर
फिलहाल तमिलनाडु के पास लोकसभा की 39 सीटें हैं। यदि सभी राज्यों की सीटों में 50 प्रतिशत की वृद्धि होती है, तो तमिलनाडु की सीटें बढ़कर 59 हो जाएंगी। वहीं उत्तर प्रदेश की सीटें 80 से बढ़कर 120 हो सकती हैं।
कांग्रेस सांसद शशि थरूर ने इस अंतर को समझाने के लिए वेतन का उदाहरण दिया। उनका कहना था कि समान प्रतिशत वृद्धि के बावजूद बड़े राज्यों और छोटे राज्यों के बीच अंतर और अधिक बढ़ जाएगा।
सांसदों की अहम बैठक
इसी मुद्दे पर तमिलनाडु के मुख्यमंत्री विजय ने राज्य के सभी लोकसभा और राज्यसभा सांसदों की बैठक बुलाई है। बैठक में परिसीमन के संभावित प्रभाव और आगे की रणनीति पर चर्चा होगी। माना जा रहा है कि इस बैठक के बाद राज्य की राजनीति में बड़ा संदेश निकल सकता है।
राहुल गांधी और विपक्ष का रुख
कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने भी स्पष्ट संकेत दिए हैं कि विपक्ष परिसीमन विधेयक को मौजूदा स्वरूप में स्वीकार नहीं करेगा। उन्होंने इस मुद्दे पर केंद्र सरकार की मंशा पर सवाल उठाते हुए कहा कि दक्षिणी राज्यों के हितों की अनदेखी नहीं होनी चाहिए।
राजनीतिक तनाव बढ़ा
यह पूरा घटनाक्रम ऐसे समय सामने आया है, जब DMK और TVK के बीच राजनीतिक तनाव पहले से ही बढ़ा हुआ है। ऐसे में परिसीमन का मुद्दा तमिलनाडु की राजनीति में एक बड़ा चुनावी और राजनीतिक विषय बनता जा रहा है।
निष्कर्ष
परिसीमन बिल को लेकर DMK ने अपना रुख स्पष्ट कर दिया है कि पार्टी मोदी सरकार के प्रस्तावित मॉडल का विरोध जारी रखेगी। अब सभी की नजरें केंद्र सरकार के अगले कदम और तमिलनाडु में होने वाली सर्वदलीय बैठकों पर टिकी हैं। आने वाले दिनों में यह मुद्दा राष्ट्रीय राजनीति का सबसे बड़ा राजनीतिक विवाद बन सकता है।