
Report By: Kiran Prakash Singh
RSS प्रमुख मोहन भागवत के Gen Z पर भरोसे वाले बयान पर प्रियंका गांधी ने कहा कि युवाओं को किसी प्रमाणपत्र की जरूरत नहीं। कांग्रेस ने सरकार और गृह मंत्री पर भी निशाना साधा।
मोहन भागवत के Gen Z बयान पर सियासत तेज, प्रियंका गांधी बोलीं- युवाओं को किसी सर्टिफिकेट की जरूरत नहीं
📅 07 अगस्त 2026 | 🌐 digitallivenews.com
राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के सरसंघचालक मोहन भागवत के Gen Z को लेकर दिए गए बयान पर देश की राजनीति गरमा गई है। कांग्रेस महासचिव और सांसद प्रियंका गांधी ने भागवत की टिप्पणी पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि देश के युवाओं को किसी भी तरह के प्रमाणपत्र की आवश्यकता नहीं है। वहीं कांग्रेस के वरिष्ठ नेता के.सी. वेणुगोपाल ने भी केंद्र सरकार और गृह मंत्री पर तीखा हमला बोला। इस मुद्दे पर सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच बयानबाजी लगातार तेज होती जा रही है।
मोहन भागवत के बयान से शुरू हुआ विवाद
RSS प्रमुख मोहन भागवत ने एक कार्यक्रम के दौरान Gen Z यानी नई पीढ़ी के युवाओं से संवाद किया। बातचीत के दौरान उन्होंने कहा कि वह Gen Z पर आंख बंद करके भरोसा करते हैं, लेकिन किसी भी घटना पर निष्कर्ष निकालने से पहले तथ्यों को जानना जरूरी है।
उन्होंने छात्रों और पुलिस के बीच हुई झड़प का जिक्र करते हुए कहा कि उनके पास पूरी जानकारी नहीं है। इसलिए केवल रिपोर्टों के आधार पर किसी एक पक्ष को सही या गलत ठहराना उचित नहीं होगा। उन्होंने यह भी कहा कि कुछ रिपोर्टों में आंदोलन में असामाजिक तत्वों की मौजूदगी की बात कही गई है, लेकिन बिना प्रमाण के कोई निष्कर्ष नहीं निकाला जाना चाहिए।
प्रियंका गांधी का पलटवार
मोहन भागवत के बयान पर प्रतिक्रिया देते हुए प्रियंका गांधी ने कहा कि देश के युवाओं को किसी भी व्यक्ति से प्रमाणपत्र लेने की जरूरत नहीं है।
उन्होंने कहा कि भारत का युवा अपनी क्षमता, मेहनत और संघर्ष से अपनी पहचान बना रहा है। ऐसे में युवाओं के भविष्य और उनके अधिकारों पर गंभीर चर्चा होनी चाहिए, न कि उन्हें प्रमाणित करने की आवश्यकता बताई जाए।
प्रियंका गांधी का यह बयान सामने आने के बाद राजनीतिक हलकों में नई बहस शुरू हो गई है।
के.सी. वेणुगोपाल ने सरकार को घेरा
कांग्रेस सांसद के.सी. वेणुगोपाल ने कहा कि यदि RSS प्रमुख को वास्तव में छात्रों की चिंता है, तो उन्हें केंद्रीय गृह मंत्री से इस्तीफे की मांग करनी चाहिए या कम से कम छात्रों से संसद में आकर माफी मांगने के लिए कहना चाहिए।
उन्होंने आरोप लगाया कि छात्रों पर अत्याचार हुआ है और इस मामले में जवाबदेही तय होनी चाहिए। कांग्रेस नेता ने यह भी कहा कि सरकार को छात्रों के मुद्दों पर संवेदनशील रवैया अपनाना चाहिए।
छात्रों के आंदोलन पर कांग्रेस के सवाल
कांग्रेस ने आरोप लगाया कि छात्रों के प्रदर्शन के दौरान पुलिस द्वारा बल प्रयोग किया गया। पार्टी नेताओं ने दावा किया कि प्रदर्शनकारियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई हुई और इस पूरे मामले की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए।
विपक्ष का कहना है कि लोकतांत्रिक व्यवस्था में छात्रों की आवाज़ को सुना जाना चाहिए और उनकी मांगों पर संसद के भीतर चर्चा होनी चाहिए।
बयानबाजी से फिर गरमाई राजनीति
मोहन भागवत और कांग्रेस नेताओं के बयानों के बाद यह मुद्दा राजनीतिक बहस का केंद्र बन गया है।
एक ओर RSS का कहना है कि किसी भी घटना पर तथ्यों के आधार पर राय बननी चाहिए, वहीं कांग्रेस सरकार की भूमिका और छात्रों के साथ हुए व्यवहार पर सवाल उठा रही है। आने वाले दिनों में संसद और राजनीतिक मंचों पर इस मुद्दे पर और तीखी बहस देखने को मिल सकती है।
निष्कर्ष
Gen Z को लेकर मोहन भागवत की टिप्पणी और उस पर प्रियंका गांधी की प्रतिक्रिया ने नई राजनीतिक चर्चा को जन्म दिया है। जहां RSS संयम और तथ्यों के आधार पर निष्कर्ष निकालने की बात कर रहा है, वहीं कांग्रेस युवाओं के अधिकारों और छात्र आंदोलनों से जुड़े मुद्दों पर सरकार को घेर रही है। यह विवाद आने वाले समय में संसद और राष्ट्रीय राजनीति में अहम मुद्दा बना रह सकता है।