
Report By: Kiran Prakash Singh
सोनम वांगचुक की बिगड़ती सेहत पर संजय राउत ने मोदी सरकार पर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि वांगचुक की जान बचाना देश का कर्तव्य है और सरकार को तुरंत कदम उठाने चाहिए।
📅 दिनांक: 17 जुलाई 2026
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सोनम वांगचुक की बिगड़ती सेहत पर संजय राउत का हमला, सरकार से तत्काल हस्तक्षेप की मांग
दिल्ली के जंतर-मंतर पर अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल पर बैठे पर्यावरण कार्यकर्ता सोनम वांगचुक के आंदोलन का शुक्रवार को 20वां दिन पूरा हो गया। लगातार उपवास के कारण उनकी सेहत को लेकर चिंता बढ़ती जा रही है। इसी बीच शिवसेना (यूबीटी) के राज्यसभा सांसद संजय राउत ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्र सरकार पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि वांगचुक की जान बचाना पूरे देश का कर्तव्य है और सरकार को इस मामले में तुरंत पहल करनी चाहिए।
राउत ने दावा किया कि वांगचुक का वजन लगभग 9 किलोग्राम कम हो चुका है और लंबे उपवास के कारण उनकी स्वास्थ्य स्थिति गंभीर बताई जा रही है। उन्होंने सरकार से संवेदनशीलता दिखाने और बातचीत के जरिए समाधान निकालने की अपील की।
संजय राउत ने सरकार पर साधा निशाना
मीडिया से बातचीत के दौरान संजय राउत ने कहा कि सोनम वांगचुक की बिगड़ती हालत को लेकर सरकार की चुप्पी चिंता का विषय है। उन्होंने सवाल उठाते हुए कहा कि क्या केंद्र सरकार में कोई ऐसा मंत्री नहीं है जो प्रधानमंत्री से इस मुद्दे पर गंभीरता से बात कर सके।
राउत ने कहा कि “सोनम वांगचुक की जान बचाना देश का कर्तव्य है और इस दिशा में सरकार को तुरंत कदम उठाने चाहिए।”
हाईकोर्ट के निर्देशों का भी किया जिक्र
जब संजय राउत से दिल्ली हाईकोर्ट द्वारा वांगचुक की स्वास्थ्य निगरानी के निर्देशों पर सवाल पूछा गया, तो उन्होंने कहा कि अदालत के निर्देशों का सम्मान होना चाहिए।
उन्होंने यह भी कहा कि सरकार को स्वास्थ्य संबंधी मामलों पर गंभीरता से ध्यान देना चाहिए और संबंधित अधिकारियों को आवश्यक कदम उठाने चाहिए ताकि किसी भी प्रकार की अप्रिय स्थिति से बचा जा सके।
नेताओं की संवेदनशीलता पर उठाए सवाल
संजय राउत ने कहा कि केवल सोनम वांगचुक ही नहीं, बल्कि उनके साथ कई अन्य प्रदर्शनकारी और छात्र भी अनशन में शामिल हैं। उन्होंने कहा कि यदि किसी भी आंदोलनकारी की तबीयत लगातार खराब हो रही है, तो यह पूरे देश के लिए चिंता का विषय होना चाहिए।
उन्होंने आरोप लगाया कि देश के शीर्ष नेतृत्व को इस मुद्दे पर संवेदनशीलता दिखानी चाहिए और जल्द समाधान की दिशा में पहल करनी चाहिए।
स्वास्थ्य को लेकर बढ़ी चिंता
आंदोलन से जुड़े लोगों के अनुसार लंबे समय से जारी भूख हड़ताल के कारण सोनम वांगचुक का वजन काफी कम हो गया है। डॉक्टरों ने भी लंबे उपवास से होने वाले संभावित चिकित्सीय जोखिमों को लेकर चिंता जताई है।
चिकित्सकों का कहना है कि यदि लंबे समय तक भोजन नहीं लिया जाता है, तो शरीर पर गंभीर प्रभाव पड़ सकता है। इसी वजह से प्रशासन को नियमित स्वास्थ्य निगरानी और आवश्यक चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराने की सलाह दी गई है।
आंदोलन पर देशभर की नजर
सोनम वांगचुक का आंदोलन अब राष्ट्रीय स्तर पर चर्चा का विषय बन चुका है। विभिन्न राजनीतिक दलों के कई नेता जंतर-मंतर पहुंचकर उनसे मुलाकात कर चुके हैं और अपनी-अपनी प्रतिक्रियाएं दे रहे हैं।
इस बीच समर्थक सरकार और आंदोलनकारियों के बीच बातचीत शुरू होने की उम्मीद जता रहे हैं, ताकि शांतिपूर्ण समाधान निकल सके और वांगचुक के स्वास्थ्य को लेकर बनी चिंता भी दूर हो सके।
निष्कर्ष
सोनम वांगचुक की लगातार बिगड़ती स्वास्थ्य स्थिति ने राजनीतिक और सामाजिक हलकों में बहस तेज कर दी है। संजय राउत ने केंद्र सरकार की कार्यशैली पर सवाल उठाते हुए तत्काल हस्तक्षेप की मांग की है। वहीं डॉक्टरों की सलाह, अदालत के निर्देश और विभिन्न राजनीतिक दलों की प्रतिक्रियाओं के बीच अब सबकी निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि सरकार और आंदोलनकारियों के बीच संवाद कब शुरू होता है। फिलहाल वांगचुक का स्वास्थ्य सबसे बड़ी चिंता का विषय बना हुआ है।
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