नॉर्वे पत्रकार को तहसीन पूनावाला का तीखा जवाब

Report By: Kiran Prakash Singh

PM मोदी विवाद पर तहसीन पूनावाला ने नॉर्वे पत्रकार को जवाब दिया। बोले- भारत में अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता मजबूत है, तुलना गलत।

DigitalLiveNews.com

दिनांक: 19 मई 2026

PM मोदी विवाद पर तहसीन पूनावाला का नॉर्वे पत्रकार को जवाब

प्रेस फ्रीडम बहस के बीच भारत पर शुरू हुई नई चर्चा

प्रधानमंत्री Narendra Modi के नॉर्वे दौरे के दौरान एक पत्रकार के सवाल को लेकर शुरू हुआ विवाद अब नई राजनीतिक बहस में बदल गया है। नॉर्वे की पत्रकार Helle Lyng द्वारा भारत की प्रेस फ्रीडम रैंकिंग पर टिप्पणी किए जाने के बाद राजनीतिक विश्लेषक Tehseen Poonawalla ने सोशल मीडिया पर उन्हें जवाब दिया है।


तहसीन पूनावाला ने क्या कहा?

तहसीन पूनावाला ने एक्स पर पोस्ट करते हुए कहा कि वह खुद कई मुद्दों पर सरकार के आलोचक रहे हैं, लेकिन भारत की तुलना फिलिस्तीन, UAE या क्यूबा जैसे देशों से करना सही नहीं है। उन्होंने लिखा, “भारत में अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता को लेकर और सुधार की जरूरत जरूर है, लेकिन हम निश्चित रूप से फिलिस्तीन, UAE या क्यूबा नहीं हैं।”

उन्होंने कहा कि उन्होंने कई बार सरकार और मंत्रियों की सार्वजनिक आलोचना की, टैक्स रेड को “टैक्स टेररिज्म” कहा और भाई-भतीजावाद पर सवाल उठाए, लेकिन इसके बावजूद उन्हें गिरफ्तार नहीं किया गया। पूनावाला ने इसे भारत के लोकतांत्रिक ढांचे की ताकत बताया।


नॉर्वे की पत्रकार ने क्या कहा था?

नॉर्वे की पत्रकार Helle Lyng ने प्रधानमंत्री मोदी के सवालों का जवाब नहीं देने पर सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया दी थी। उन्होंने लिखा था कि नॉर्वे प्रेस फ्रीडम इंडेक्स में दुनिया में पहले स्थान पर है, जबकि भारत 157वें स्थान पर है।

उन्होंने कहा था कि पत्रकारों का काम सत्ता से सवाल पूछना है और यही लोकतंत्र की असली ताकत होती है। उनके इस बयान के बाद सोशल मीडिया पर बहस तेज हो गई और कई राजनीतिक प्रतिक्रियाएं सामने आने लगीं।


विवाद बढ़ने पर पत्रकार की सफाई

मामला बढ़ने के बाद Helle Lyng ने सफाई देते हुए कहा कि वह किसी विदेशी एजेंसी या सरकार की तरफ से काम नहीं कर रहीं। उन्होंने सोशल मीडिया पर लिखा, “मैं किसी विदेशी जासूस की तरह काम नहीं कर रही हूं। मेरा काम पत्रकारिता है और मैं मुख्य रूप से नॉर्वे में काम करती हूं।”

पत्रकार ने कहा कि उनका उद्देश्य केवल सवाल पूछना था और इसे गलत तरीके से पेश किया जा रहा है। हालांकि इस मुद्दे पर सोशल मीडिया पर अलग-अलग प्रतिक्रियाएं लगातार सामने आ रही हैं।


विदेश मंत्रालय ने भी दिया जवाब

विवाद बढ़ने के बाद विदेश मंत्रालय की प्रेस ब्रीफिंग में भी यही मुद्दा उठा। पत्रकार ने MEA सचिव Sibi George से भारत में मानवाधिकार और प्रेस फ्रीडम को लेकर सवाल पूछे।

इसके जवाब में सिबी जॉर्ज ने कहा कि भारत सिर्फ एक देश नहीं बल्कि पांच हजार साल पुरानी सभ्यता है। उन्होंने कहा कि भारत ने कोरोना महामारी के दौरान दुनिया की मदद की और वैश्विक स्तर पर भरोसेमंद साझेदार के रूप में अपनी पहचान बनाई। उन्होंने कहा कि भारत लोकतांत्रिक मूल्यों के साथ मजबूती से आगे बढ़ रहा है।

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