
Report By: Kiran Prakash Singh
यूरोप में रिकॉर्ड गर्मी के बीच एयर कंडीशनर की मांग तेजी से बढ़ रही है। 80% घरों में AC नहीं होने के बावजूद यह दुनिया का सबसे बड़ा उभरता बाजार बन गया है।
Published: 01 July 2026 | Digitallivenews.com
यूरोप में रिकॉर्ड गर्मी से बढ़ी AC की मांग, 80% घरों में अब भी नहीं है एयर कंडीशनर
यूरोप इस समय भीषण हीटवेव का सामना कर रहा है। फ्रांस, जर्मनी, स्पेन और इटली जैसे देशों में तापमान 40 डिग्री सेल्सियस से ऊपर पहुंच चुका है। लगातार बढ़ती गर्मी के बावजूद यूरोप के लगभग 80 प्रतिशत घरों में अभी भी एयर कंडीशनर (AC) नहीं है। इसके बावजूद यूरोप आज दुनिया का सबसे तेजी से उभरता हुआ एयर कंडीशनर बाजार बन गया है। बढ़ती गर्मी, जलवायु परिवर्तन और बदलती जीवनशैली ने लोगों को अब कूलिंग सिस्टम अपनाने के लिए मजबूर कर दिया है। यही वजह है कि 2026 में यूरोप में AC की बिक्री ने नए रिकॉर्ड बना दिए हैं।
आखिर यूरोप के ज्यादातर घरों में AC क्यों नहीं है?
इंटरनेशनल एनर्जी एजेंसी (IEA) के अनुसार, यूरोप में लंबे समय तक गर्मियां अपेक्षाकृत हल्की रहती थीं। अधिकांश देशों में तापमान इतना अधिक नहीं होता था कि एयर कंडीशनर की जरूरत महसूस हो। यूरोप के पुराने घर भी सर्द मौसम को ध्यान में रखकर बनाए गए हैं। मोटी दीवारें, छोटी खिड़कियां और गर्मी को अंदर रोकने वाला निर्माण डिजाइन यहां आम है।
इसके अलावा, ऐतिहासिक और विरासत इमारतों में बाहरी AC यूनिट लगाने पर सख्त नियम लागू हैं। कई जगह मकान मालिक की अनुमति और प्रशासनिक मंजूरी के बिना AC लगाना संभव नहीं होता। यही कारण है कि आज भी यूरोप के अधिकांश घरों में एयर कंडीशनिंग उपलब्ध नहीं है।
बढ़ती गर्मी ने बदल दी बाजार की तस्वीर
विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के अनुसार, यूरोप दुनिया का सबसे तेजी से गर्म होने वाला महाद्वीप बन चुका है। लगातार बढ़ रही हीटवेव के कारण लोगों की जीवनशैली बदल रही है और एयर कंडीशनर की मांग तेजी से बढ़ रही है।
2026 की गर्मियों में फ्रांस, जर्मनी और स्पेन सहित कई देशों में रिकॉर्ड तापमान दर्ज किया गया। बढ़ती गर्मी के चलते रिटेल स्टोर और ऑनलाइन प्लेटफॉर्म पर AC की बिक्री में कई गुना उछाल देखने को मिला। विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले वर्षों में यूरोप का एयर कंडीशनर बाजार और तेजी से विस्तार करेगा।
बिक्री में रिकॉर्ड बढ़ोतरी, कंपनियों को मिला बड़ा फायदा
2026 की हीटवेव ने एयर कंडीशनर कंपनियों के लिए अभूतपूर्व अवसर पैदा किए हैं। फ्रांस की प्रमुख रिटेल चेन Carrefour ने कुछ ही दिनों में हजारों AC यूनिट बेचने का दावा किया। Amazon, Samsung, TCL, Midea और Xiaomi जैसी कंपनियों ने भी यूरोप में बिक्री में उल्लेखनीय बढ़ोतरी दर्ज की।
चीन से पश्चिमी यूरोप को भेजे जाने वाले घरेलू एयर कंडीशनरों के निर्यात में भी उल्लेखनीय वृद्धि हुई है। कई देशों में स्टोरों का स्टॉक तेजी से खत्म हो रहा है और उपभोक्ताओं को नई खेप का इंतजार करना पड़ रहा है। ऑनलाइन प्लेटफॉर्म पर भी AC और कूलिंग उत्पादों की मांग लगातार बढ़ रही है।
बिजली, लागत और पर्यावरण बनी बड़ी चुनौती
यूरोप में एयर कंडीशनर अपनाने की सबसे बड़ी बाधाओं में बिजली की ऊंची कीमतें शामिल हैं। कई देशों में बिजली की लागत अमेरिका की तुलना में काफी अधिक है, जिससे AC चलाना महंगा पड़ता है।
इसके अलावा, इंस्टॉलेशन का खर्च भी काफी ज्यादा होता है। कई देशों में एक एयर कंडीशनर लगाने पर 1,000 यूरो या उससे अधिक खर्च आता है। पर्यावरण को लेकर भी बहस जारी है क्योंकि बड़े पैमाने पर एयर कंडीशनर के इस्तेमाल से ऊर्जा की खपत और ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन बढ़ने की आशंका जताई जाती है।
2050 तक यूरोप में करोड़ों नए AC लगने का अनुमान
IEA का अनुमान है कि यूरोपीय संघ में एयर कंडीशनर की संख्या आने वाले वर्षों में तेजी से बढ़ेगी। 2019 की तुलना में 2050 तक AC यूनिट्स की संख्या दोगुनी होकर लगभग 27.5 करोड़ तक पहुंच सकती है। वहीं 2030 तक यूरोप में लगभग 13 करोड़ एयर कंडीशनर स्थापित होने का अनुमान है।
विशेषज्ञों का कहना है कि भविष्य में केवल एयर कंडीशनर ही समाधान नहीं होगा। ऊर्जा दक्ष भवन, बेहतर इन्सुलेशन, हरित निर्माण तकनीक और टिकाऊ कूलिंग सिस्टम भी जलवायु परिवर्तन से निपटने के लिए उतने ही जरूरी होंगे। हालांकि फिलहाल रिकॉर्ड गर्मी ने यूरोप को दुनिया का सबसे बड़ा उभरता हुआ एयर कंडीशनर बाजार जरूर बना दिया है।
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