बंगाल के 15 बूथों पर री-पोलिंग, शाम 6 बजे तक वोटिंग

Report By: Kiran Prakash Singh

पश्चिम बंगाल में गड़बड़ी के बाद 15 बूथों पर दोबारा मतदान जारी है। EVM छेड़छाड़ के आरोपों के बीच चुनाव आयोग ने कड़ा कदम उठाया।


पश्चिम बंगाल में 15 बूथों पर दोबारा मतदान, चुनाव आयोग सख्त

गड़बड़ी के बाद चुनाव आयोग का बड़ा फैसला

पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 के दौरान सामने आई अनियमितताओं के बाद Election Commission of India ने बड़ा कदम उठाते हुए 15 मतदान केंद्रों पर दोबारा वोटिंग कराने का फैसला लिया है। यह निर्णय डायमंड हार्बर और मगराहाट पश्चिम विधानसभा क्षेत्रों से मिली शिकायतों के आधार पर लिया गया।

रिप्रेजेंटेशन ऑफ पीपल एक्ट के तहत कार्रवाई

चुनाव आयोग ने बताया कि 29 अप्रैल को हुए मतदान के दौरान कुछ बूथों पर EVM में छेड़छाड़ और गड़बड़ी की शिकायतें मिली थीं। रिटर्निंग ऑफिसर और ऑब्जर्वर की रिपोर्ट के बाद आयोग ने रिप्रेजेंटेशन ऑफ पीपल एक्ट 1951 के तहत इन बूथों पर मतदान रद्द कर दिया और दोबारा वोटिंग का आदेश जारी किया।

सुबह 7 बजे से शुरू हुई वोटिंग, शाम तक जारी

इन सभी 15 बूथों पर 2 मई को सुबह 7 बजे से मतदान शुरू हो चुका है, जो शाम 6 बजे तक चलेगा। चुनाव आयोग ने निर्देश दिए हैं कि इस री-पोलिंग की जानकारी अधिक से अधिक लोगों तक पहुंचे, इसके लिए ढोल बजाकर घोषणा करने और सभी उम्मीदवारों को लिखित सूचना देने की व्यवस्था की गई है।

मगराहाट पश्चिम और डायमंड हार्बर में री-पोलिंग

मगराहाट पश्चिम के 11 और डायमंड हार्बर के 4 बूथों पर दोबारा मतदान कराया जा रहा है। इन केंद्रों में कई स्कूलों और मदरसों के कमरे शामिल हैं, जहां लोग लंबी लाइनों में लगकर वोट डाल रहे हैं। प्रशासन ने इन इलाकों में सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए हैं ताकि मतदान शांतिपूर्ण तरीके से पूरा हो सके।

शुभेंदु अधिकारी ने क्या कहा?

री-पोलिंग को लेकर विपक्ष के नेता Suvendu Adhikari ने कहा कि यह कदम स्वागत योग्य है, लेकिन और अधिक बूथों पर दोबारा मतदान होना चाहिए था। उन्होंने कहा कि यह एक तय प्रक्रिया है और उनकी पार्टी चुनाव आयोग के फैसले का सम्मान करती है।


पश्चिम बंगाल में इस बार दो चरणों में 23 और 29 अप्रैल को मतदान हुआ था, जिसमें रिकॉर्ड 92.47% वोटिंग दर्ज की गई। अब सभी की नजरें 4 मई को आने वाले नतीजों पर टिकी हैं। चुनाव के बाद किसी भी तरह की हिंसा को रोकने के लिए प्रशासन अलर्ट पर है और कई जगहों पर धारा 144 जैसी पाबंदियां भी लागू की गई हैं।

इस पूरे घटनाक्रम ने एक बार फिर चुनावी प्रक्रिया की पारदर्शिता और सुरक्षा को लेकर बहस तेज कर दी है, वहीं चुनाव आयोग ने साफ कर दिया है कि निष्पक्ष और स्वतंत्र चुनाव सुनिश्चित करना उसकी प्राथमिकता है।

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