ओम बिरला ने बनाई संसदीय समितियां, वेणुगोपाल अध्यक्ष

Report By: Kiran Prakash Singh

लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने संसदीय समितियों का गठन किया। केसी वेणुगोपाल PAC अध्यक्ष बने, तेजस्वी सूर्या और धर्मेंद्र यादव को भी अहम जिम्मेदारी मिली।


ओम बिरला ने गठित की संसदीय समितियां, कई सांसदों को बड़ी जिम्मेदारी

PAC के अध्यक्ष बने केसी वेणुगोपाल

लोकसभा अध्यक्ष Om Birla ने संसद की अहम समितियों का गठन करते हुए कई वरिष्ठ सांसदों को महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां सौंपी हैं। कांग्रेस नेता K. C. Venugopal को एक बार फिर लोक लेखा समिति (PAC) का अध्यक्ष नियुक्त किया गया है। यह समिति संसद की सबसे महत्वपूर्ण वित्तीय निगरानी समितियों में से एक मानी जाती है।

बैजयंत पांडा को सार्वजनिक उपक्रम समिति की कमान

बीजेपी नेता Baijayant Panda को सार्वजनिक उपक्रम समिति का चेयरपर्सन बनाया गया है। यह समिति सरकारी कंपनियों और उपक्रमों के कामकाज की समीक्षा करती है। आधिकारिक अधिसूचना के अनुसार, इन नियुक्तियों का कार्यकाल 1 मई 2026 से 30 अप्रैल 2027 तक रहेगा।

लोकसभा और राज्यसभा के कुल 21 सदस्य शामिल

लोक लेखा समिति में कुल 21 सदस्यों को शामिल किया गया है, जिनमें 15 लोकसभा और 6 राज्यसभा सांसद हैं। लोकसभा से शामिल प्रमुख नामों में T. R. Baalu, Kalyan Banerjee, Nishikant Dubey, Ravi Shankar Prasad, Tejasvi Surya, Anurag Thakur और Dharmendra Yadav शामिल हैं।

राज्यसभा से भी दिग्गज नेताओं को जगह

राज्यसभा से जिन नेताओं को समिति में शामिल किया गया है, उनमें Ashok Chavan, K. Laxman, Praful Patel, Sukhendu Sekhar Ray, Akhilesh Prasad Singh और Sudhanshu Trivedi शामिल हैं। इस तरह दोनों सदनों का संतुलित प्रतिनिधित्व सुनिश्चित किया गया है।

अन्य समितियों में भी अहम नियुक्तियां

इसके अलावा, Faggan Singh Kulaste को अनुसूचित जाति और जनजाति कल्याण समिति का अध्यक्ष बनाया गया है, जिसमें कुल 30 सदस्य शामिल हैं। वहीं बीजेपी सांसद Sanjay Jaiswal को प्राक्कलन समिति का अध्यक्ष नियुक्त किया गया है। इस समिति में भी 30 सदस्यों को शामिल किया गया है, जिनमें लोकसभा और राज्यसभा दोनों के सांसद शामिल हैं।


संसदीय समितियों का यह नया गठन संसद के कामकाज को अधिक प्रभावी और जवाबदेह बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। इन समितियों के माध्यम से सरकारी नीतियों, खर्चों और योजनाओं की गहन समीक्षा की जाती है, जिससे लोकतांत्रिक व्यवस्था को मजबूती मिलती है।

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