
Report By: Kiran Prakash Singh
नीतीश कुमार ने सीएम आवास छोड़ 7 सर्कुलर रोड शिफ्ट किया। बिहार की राजनीति में बदलाव के संकेत, सम्राट चौधरी लेंगे 1 अणे मार्ग आवास।
नीतीश कुमार का घर बदला, बिहार की राजनीति में नए संकेत
- 1 अणे मार्ग से विदाई का फैसला
- 7 सर्कुलर रोड बना नया ठिकाना
- सम्राट चौधरी को मिलेगा सीएम आवास
- 20 साल बाद बदला राजनीतिक केंद्र
- सत्ता बदलाव के साथ बदली तस्वीर
बिहार की राजनीति में एक बड़ा बदलाव उस समय देखने को मिला जब नीतीश कुमार ने अपने लंबे समय से जुड़े मुख्यमंत्री आवास 1 अणे मार्ग को छोड़ने का फैसला किया। करीब दो दशकों तक यह आवास न सिर्फ उनका घर रहा, बल्कि राज्य की सत्ता और प्रशासन का प्रमुख केंद्र भी रहा। अब उनके इस फैसले को राजनीतिक बदलाव के संकेत के रूप में देखा जा रहा है।
सूत्रों के अनुसार, नीतीश कुमार अब 7 सर्कुलर रोड स्थित सरकारी बंगले में शिफ्ट हो चुके हैं या होने की प्रक्रिया में हैं। यह वही बंगला है, जहां वह पहले भी रह चुके हैं और जिससे उनका खास जुड़ाव रहा है।
यह बदलाव केवल एक घर बदलने तक सीमित नहीं है, बल्कि इसे बिहार की राजनीति में एक नए दौर की शुरुआत माना जा रहा है। क्योंकि 1 अणे मार्ग लंबे समय तक सत्ता का प्रतीक रहा है और अब वहां नए मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी के शिफ्ट होने की तैयारी है।
नीतीश कुमार के इस कदम के पीछे उनके हालिया राजनीतिक बदलाव भी जुड़े हैं। उन्होंने अप्रैल 2026 में मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा देकर राज्यसभा सदस्य के रूप में नई भूमिका स्वीकार की। इसके बाद से ही यह साफ हो गया था कि उनका राजनीतिक फोकस अब राज्य से आगे बढ़कर राष्ट्रीय स्तर पर भी हो सकता है।
बताया जा रहा है कि 7 सर्कुलर रोड का बंगला पूरी तरह से तैयार कर लिया गया है और वहां गृह प्रवेश की तैयारियां भी पूरी हो चुकी हैं। उनके सामान—जिसमें किताबें, फर्नीचर और निजी वस्तुएं शामिल हैं—पहले ही नए आवास में शिफ्ट किए जा चुके हैं।
इस पूरे घटनाक्रम का एक दिलचस्प पहलू यह भी है कि नया आवास बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री लालू प्रसाद यादव के घर के बेहद करीब है। यानी अब बिहार की राजनीति के दो बड़े चेहरे एक-दूसरे के पड़ोसी बन गए हैं, जो आगे चलकर राजनीतिक समीकरणों को भी प्रभावित कर सकता है।
नीतीश कुमार के आवास खाली करने के बाद 1 अणे मार्ग में मेंटेनेंस और रिनोवेशन का काम किया जाएगा। इसके बाद मौजूदा मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी वहां शिफ्ट होंगे। यह प्रक्रिया सिर्फ प्रशासनिक बदलाव नहीं बल्कि सत्ता हस्तांतरण का प्रतीक भी है।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह बदलाव बिहार की राजनीति में एक संक्रमण काल को दर्शाता है। जहां एक तरफ नीतीश कुमार जैसे अनुभवी नेता सक्रिय भूमिका में बने रहेंगे, वहीं दूसरी तरफ नई नेतृत्व टीम राज्य की बागडोर संभालेगी।
करीब 20 वर्षों तक मुख्यमंत्री रहे नीतीश कुमार का 1 अणे मार्ग से जाना एक तरह से एक युग के अंत जैसा माना जा रहा है। इस आवास से उन्होंने कई बड़े फैसले लिए, कई चुनाव लड़े और बिहार की राजनीति को दिशा दी।
अब जब वह नए आवास में शिफ्ट हो चुके हैं, तो यह देखना दिलचस्प होगा कि उनकी नई भूमिका क्या होगी और बिहार की राजनीति में उनका प्रभाव किस रूप में जारी रहेगा।
कुल मिलाकर, यह सिर्फ एक घर बदलने की कहानी नहीं है, बल्कि यह बिहार की राजनीति में बदलते नेतृत्व, नई रणनीति और सत्ता के नए अध्याय की शुरुआत का संकेत है।