आजमगढ़ में 50 हजार घूस लेते बाबू रंगे हाथ गिरफ्तार

Report By: Kiran Prakash Singh

आजमगढ़ में एंटी करप्शन टीम ने 50 हजार रिश्वत लेते बाबू को पकड़ा। मान्यता के नाम पर 3 लाख मांगने का आरोप, जांच जारी।

आजमगढ़ में रिश्वतखोरी का बड़ा खुलासा, 50 हजार लेते बाबू गिरफ्तार


एंटी करप्शन टीम ने रंगे हाथ पकड़ा आरोपी

आजमगढ़ से एक चौंकाने वाला भ्रष्टाचार का मामला सामने आया है, जहां एंटी करप्शन (विजिलेंस) टीम ने एक बाबू को ₹50,000 की रिश्वत लेते हुए रंगे हाथ गिरफ्तार कर लिया। यह कार्रवाई महाराजा सुहेलदेव विश्वविद्यालय के रजिस्ट्रार कार्यालय में की गई, जिससे पूरे परिसर में हड़कंप मच गया।

सूत्रों के मुताबिक, शिकायत मिलने के बाद टीम ने पहले पूरे मामले की जांच की और फिर ट्रैप लगाकर आरोपी को पकड़ लिया


मान्यता और परीक्षा केंद्र के नाम पर मांगी जा रही थी घूस

आरोप है कि कॉलेज की मान्यता बढ़ाने और परीक्षा केंद्र से जुड़े काम के नाम पर रिश्वत मांगी जा रही थी। शिकायतकर्ता ने बताया कि कुल ₹3 लाख की मांग की गई थी, जिसमें पहली किस्त के रूप में ₹50,000 दिए जा रहे थे।

यह रकम आरोपी बाबू के माध्यम से ली जा रही थी, जिससे यह मामला और भी गंभीर हो गया है।


संजय यादव पर गंभीर आरोप, बड़े नामों की जांच

इस मामले में आरोपी बाबू संजय यादव बताया जा रहा है, जो रजिस्ट्रार कार्यालय में तैनात था। आरोप यह भी है कि यह रिश्वत उच्च अधिकारियों के कहने पर ली जा रही थी, जिसमें रजिस्ट्रार स्तर तक नाम सामने आए हैं।

हालांकि, अधिकारियों ने कहा है कि पूरे मामले की गहन जांच जारी है और जो भी दोषी पाया जाएगा, उसके खिलाफ सख्त कार्रवाई होगी।


तलाशी में लाखों रुपये बरामद, बढ़ा मामला

गिरफ्तारी के बाद जब विजिलेंस टीम ने आरोपी की तलाशी ली, तो उसके पास से ₹1.87 लाख से अधिक नकदी भी बरामद हुई, जिसका वह संतोषजनक जवाब नहीं दे सका।

इस बरामदगी ने यह संकेत दिया है कि मामला केवल एक बार की रिश्वत तक सीमित नहीं, बल्कि बड़े भ्रष्टाचार नेटवर्क से जुड़ा हो सकता है।


विश्वविद्यालय प्रशासन में मचा हड़कंप

इस कार्रवाई के बाद विश्वविद्यालय प्रशासन में भारी हलचल मच गई है। अधिकारियों ने साफ किया है कि संस्थान की छवि खराब करने वालों को बख्शा नहीं जाएगा

वहीं, आरोपी के खिलाफ भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत केस दर्ज कर लिया गया है और आगे की कानूनी कार्रवाई जारी है।


आजमगढ़ का यह मामला एक बार फिर दिखाता है कि शिक्षा संस्थानों में भी भ्रष्टाचार की जड़ें गहरी हो सकती हैं। हालांकि, एंटी करप्शन टीम की इस कार्रवाई से यह संदेश जरूर गया है कि अब रिश्वतखोरी पर सख्ती बढ़ रही है और दोषियों को बख्शा नहीं जाएगा।

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