
Report By: Kiran Prakash Singh
बिहार विधानसभा चुनाव 2025: भाजपा ने 101 सीटों पर चुनाव लड़ने का किया ऐलान, छह जिलों में नहीं उतारे उम्मीदवार
पटना, (Digital Live News):
बिहार विधानसभा चुनाव 2025 के मद्देनजर भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने अपनी रणनीति और उम्मीदवारों की सूची जारी कर दी है। पार्टी ने राज्य की 243 विधानसभा सीटों में से 101 सीटों पर चुनाव लड़ने का फैसला किया है। इस बार चुनाव में भाजपा के उम्मीदवारों की संख्या और चुनावी रणनीति ने राजनीतिक गलियारों में काफी चर्चा पैदा कर दी है। आगामी 6 और 11 नवंबर को मतदान होने जा रहा है, ऐसे में सभी की निगाहें इन सीटों पर टिकी हैं।
लेकिन इस बार भाजपा की रणनीति में एक दिलचस्प बदलाव देखने को मिला है। 101 सीटों में से छह ऐसे जिले हैं, जहां भाजपा ने एक भी उम्मीदवार नहीं उतारा। ये जिले हैं: मधेपुरा, खगड़िया, शेखपुरा, शिवहर, जहानाबाद और रोहतास। इसका मतलब यह है कि इन जिलों में भाजपा ने अपने घटक दलों को चुनाव मैदान में बढ़त दिलाने का रास्ता दिया।
इन जिलों में भाजपा के घटक दलों ने एनडीए की ओर से चुनाव लड़ने की जिम्मेदारी संभाली है। वहीं, कुछ जिलों में भाजपा ने सिर्फ एक-एक सीट पर ही उम्मीदवार उतारे हैं, जैसे कि सहरसा, लखीसराय, नालंदा, बक्सर और जमुई। पार्टी ने यह रणनीति गठबंधन संतुलन और सहयोगी दलों को प्राथमिकता देने के लिए अपनाई है।
पिछले विधानसभा चुनाव (2020) में भी भाजपा ने कुछ जिलों में उम्मीदवार नहीं उतारे थे। उस समय पांच जिलों—शिवहर, खगड़िया, शेखपुरा, जहानाबाद और मधेपुरा—में भाजपा के कोई उम्मीदवार नहीं थे। इस बार सूची में एक नया जिला रोहतास शामिल हुआ है। रोहतास की दो सीटों- डिहरी और काराकाट पर पिछली बार भाजपा ने उम्मीदवार उतारे थे, लेकिन इस बार उन्होंने खुद मैदान में नहीं उतरने का फैसला किया और सहयोगी दलों को प्राथमिकता दी।
भाजपा के नेताओं का कहना है कि यह कदम यह दर्शाता है कि राज्य में गठबंधन रणनीति को प्राथमिकता दी जा रही है। भाजपा अकेले चुनाव लड़ने की बजाय एनडीए की ताकत के साथ मैदान में उतर रही है। इस बार भाजपा ने कुल 101 सीटें लड़ी हैं, वहीं जदयू-भाजपा ने 101-101 सीटों का फार्मूला अपनाया है। इसके अलावा, लोजपा (आर) को 29 सीटें और हम-आरएलएम को 6-6 सीटें दी गई हैं।
राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार, जिन जिलों में भाजपा ने उम्मीदवार नहीं उतारे हैं, वहां उनके सहयोगी दलों की पकड़ मजबूत है या राजनीतिक समीकरण ऐसे हैं कि भाजपा खुद चुनावी मैदान में उतरने से बच रही है। यह रणनीति संसाधन वितरण और गठबंधन संतुलन के लिए अपनाई गई है।
वहीं, कुछ जिलों में भाजपा का दबदबा अधिक है। उदाहरण के लिए:
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पश्चिम चंपारण: 12 में से 8 सीटों पर भाजपा उम्मीदवार
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पूर्वी चंपारण: 9 में से 7 सीटों पर भाजपा उम्मीदवार
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पटना: 14 में से 7 सीटों पर भाजपा उम्मीदवार
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दरभंगा: 6 सीटों में से 6 पर उम्मीदवार
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मुजफ्फरपुर: 5 सीटों पर उम्मीदवार
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भोजपुर और मधुबनी: 5-5 सीटों पर उम्मीदवार
विश्लेषकों का कहना है कि भाजपा संसाधन और राजनीतिक संतुलन की दृष्टि से इस रणनीति को अपनाकर अपने गठबंधन को मजबूत करना चाहती है। जिन जिलों में सिर्फ एक सीट पर उम्मीदवार हैं, वहां भाजपा ने आसान जीत की उम्मीद रखते हुए सहयोगी दलों को अधिक भूमिका दी है।
इस प्रकार भाजपा की रणनीति स्पष्ट रूप से यह संकेत देती है कि पार्टी गठबंधन की ताकत और सहयोगी दलों को प्राथमिकता देने के लिए चुनावी योजना में लचीलापन रख रही है। आगामी मतदान और इसके परिणाम बिहार की राजनीतिक तस्वीर को पूरी तरह बदल सकते हैं।
Digital Live News इस मामले पर लगातार तथ्यात्मक रिपोर्टिंग और अपडेट जारी रखेगा।